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नई दिल्ली@ पाक के नूर खान बेस पर क्या गुल खिला रहा अमेरिका

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भारत ने किया तबाह, इजरायल-देहरादून से है कनेक्शन
नई दिल्ली,03 जून 2025 (ए)।
पाकिस्तान का नूर खान एयरबेस ऑपरेशन सिंदूर के दौरान काफी चर्चा में रहा था। अब सोशल मीडिया पर पाकिस्तान से जुड़ा एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक पाकिस्तानी पत्रकार नूर खान एयरबेस के बारे में सनसनीखेज दावा कर रहा है। वीडियो में पत्रकार का कहना है कि इस एयरबेस पर एक वक्त अमेरिका का कब्जा था और पाकिस्तानी सेना को भी वहां जाने की इजाजत नहीं थी। वायरल वीडियो में न तो तारीख बताई गई और न ही कोई स्पष्टीकरण है। हालांकि, पूरे वीडियो की जानकारी अभी सामने नहीं आई है। पाकिस्तानी पत्रकार का नाम भी क्लिप में साफ नहीं है। मगर,आज जानते हैं इस एयरबेस का यह नाम कैसे पड़ा और इसका देहरादून और इजरायल कनेक्शन क्या था।
पाकिस्तान के एयरबेस पर अमेरिका का कब्जा
पाकिस्तानी पत्रकार वीडियो क्लिप में पत्रकार बताते हैं कि नूर खान एयरबेस पर अमेरिकी विमान नियमित रूप से उतरते थे और सामान उतारते थे। इतना ही नहीं जब एक पाकिस्तानी सैनिक ने वहां हो रही गतिविधियों के बारे में जानने की कोशिश की,तो अमेरिकी सैनिक ने उस पर बंदूक तान दी। पत्रकार के अनुसार, पाकिस्तान की अपनी सेना को भी इस इलाके में घुसने की इजाजत नहीं थी।
पाकिस्तान का हार्ट एयरबेस है नूर खान
नूर खान एयरबेस पाकिस्तानी वायुसेना का एक प्रमुख बेस है। यह रावलपिंडी पंजाब के पास स्थित है और अतीत में अमेरिका और पाकिस्तान के सामरिक रिश्तों के दौरान इसका इस्तेमाल अमेरिकी सेनाओं ने किया है। इसे पहले चकलाला एयरबेस के नाम से जाना जाता था। इसे आरएएफ चकलाला के नाम से जाना जाता था। इसे पहले आरएएफ स्टेशन चकलाला और आरएएफ बेस चकलाला भी कहा जाता था। यह पाकिस्तान एयर फोर्स का एक बड़ा एयरबेस है। पुराना बेनजीर भुट्टो अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा अब इस एयरबेस का हिस्सा है। यहां आरएएफ कॉलेज, चकलाला जैसे शिक्षण संस्थान भी हैं। यह कॉलेज एविएशन कैडेट्स के लिए है।
नूर खान एयर बेस में क्या छिपा है पाकिस्तान का राज
नूर खान एयर बेस फेडरल एयर कमांड का हिस्सा है। इस साल भारत-पाकिस्तान युद्ध में भारतीय हवाई हमलों से इसे नुकसान हुआ था। यह एयर मोबिलिटी कमांड का मुख्यालय है। यह रसद, परिवहन और रणनीतिक कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यहां सी-130 हरक्यूलिस और ढ्ढस्क्र (इंटेलिजेंस, सर्विलांस, रिकॉनिसेन्स) जैसे विमान भी हैं। आईएसआर का मतलब है खुफिया जानकारी जुटाना, निगरानी करना और टोह लेना।
जब चकलाला का नाम बदलकर नूर खान कर दिया
2012 में चकलाला बेस का नाम बदलकर आरएएफ बेस नूर खान कर दिया गया। यह नाम 1947 में इसके पहले बेस कमांडर, एयर मार्शल नूर खान की याद में रखा गया। नूर खान पाकिस्तान एयर फ़ोर्स के दूसरे चीफ थे। उन्होंने पाकिस्तान के कई युद्धों में भाग लिया था। 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ। इस दौरान भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान में कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर क्रूज मिसाइलों से हमले किए। इन हमलों में तकनीकी ढांचे, कमांड और कंट्रोल सेंटर,रडार साइट और हथियार भंडारण क्षेत्र शामिल थे। बीते 10 मई को नूर खान एयरबेस पर हमला हुआ। कहा गया कि यह हमला कैलिब्रेटेड रिस्पांस” था। इसका मतलब है कि यह हमला पाकिस्तान की उन सैन्य प्रतिष्ठानों को निष्क्रिय करने के लिए किया गया था जो भारत में सीमा पार हमलों का समर्थन कर रहे थे।
सीजफायर की वजह कहीं नूर खान एयरबेस तो नहीं
इन हवाई हमलों के बाद युद्धविराम का प्रस्ताव रखा गया। भारत के मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद अमेरिका ने बताया कि दोनों देश युद्धविराम पर सहमत हो गए हैं। नूर खान एयरबेस आरएएस के लिए एक महत्वपूर्ण संपत्ति है। यह केंद्रीय परिवहन केंद्र है और हवाई ईंधन भरने की क्षमता ( 10 स्क्वाड्रन) का घर है। यह बेस स्ट्रेटेजिक प्लान्स डिवीजन के मुख्यालय से भी सिर्फ एक मील दूर है।


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