पहचान छुपाकर रह रही थीं तीन महिलाओं की पहचान, अब तक 41 डिटेन
अजमेर ,22 मई 2025 (ए)। पर्यटन स्थल अजमेर में इन दिनों विदेशी घुसपैठियों के लिए शरणस्थली बनती जा रही है। ताजा मामले में अजमेर जिला पुलिस और सीआईडी जोन की संयुक्त टीम ने सिलावट मोहल्ला से तीन बांग्लादेशी महिलाओं को पकड़ा है, जो वर्षों से फर्जी पहचान के सहारे इस इलाके में छिपकर रह रही थीं। यह महिलाएं खुद को पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर की निवासी बताकर यहां की आबोहवा में घुल-मिल गई थीं, लेकिन दस्तावेजों की जांच ने उनके झूठ की परतें उधेड़ दीं।
फर्जी दस्तावेज, नकली पहचान
पुलिस जांच में सामने आया कि पकड़ी गई महिलाएं—पन्ना बेगम उर्फ अमीन,समीर, और साहनी उर्फ समीना उर्फ रिहाना—ने भारत में दाखिल होने के लिए बांग्लादेश-भारत की बेनापोल और हिल्ली सीमा से अवैध रूप से प्रवेश किया। इनकी इस गैरकानूनी एंट्री में एजेंटों की भूमिका सामने आई है, जो पैसों के बदले इन घुसपैठियों को चुपचाप सीमा पार करवाते हैं।
ढाका की गलियों से अजमेर तक का सफर
तीनों महिलाएं मूल रूप से बांग्लादेश के जुरेंन तुला बगीचा, डाकघर फरीदाबाद, श्याम्पुर,ढाका साउथ सिटी कॉरपोरेशन की निवासी हैं। भारत में घुसने के बाद वे पहले मेदिनीपुर और फिर देश के अलग-अलग शहरों में रुकीं। आखिरकार पिछले दो वर्षों से अजमेर के दरगाह क्षेत्र में स्थायी रूप से बस गईं और स्थानीय समाज में पूरी तरह घुल-मिल गईं।
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