@भारत-पाकिस्तान ने एक-दूसरे को क्यों सौंपी अपने परमाणु प्रतिष्ठानों की लिस्ट
@भारत-पाकिस्तान ने परमाणु प्रतिष्ठानों की सूची का आदान-प्रदान किया
@ द्विपक्षीय समझौते के तहत दोनों पड़ोसी राष्ट्र ने जारी रखी परंपरा
नई दिल्ली,01 जनवरी 2025 (ए)। नए साल के पहले दिन भारत और पाकिस्तान ने अपने-अपने परमाणु प्रतिष्ठानों की लिस्ट एक दूसरे को सौंपी है। तीन दशक से अधिक समय से जारी सिलसिले को बरकरार रखते हुए एक द्विपक्षीय समझौते के तहत दोनों पड़ोसी राष्ट्र ने ये कदम उठाया। दोनों देशों ने न्यूक्लियर प्रतिष्ठानों की सूची का आदान-प्रदान बुधवार को किया।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि लिस्ट का आदान-प्रदान परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमले को रोकने वाले एक समझौते के प्रावधानों की वजह से किया गया है। भारत और पाकिस्तान ने इस दौरान एक-दूसरे की
हिरासत में बंद कैदियों की लिस्ट का भी आदान-प्रदान किया।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि नई दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच राजनयिक माध्यम से परमाणु प्रतिष्ठानों लिस्ट का आदान-प्रदान एक साथ किया गया। भारत और पाकिस्तान ने राजनयिक माध्यम के जरिए इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। दोनों देशों ने एक साथ लिस्ट एक-दूसरे को सौंपा। इस सूची का आदान-प्रदान ऐसे समय में हुआ जब कश्मीर मुद्दे के साथ-साथ बॉर्डर पार आतंकवाद को लेकर दोनों देशों के बीच रिश्तों में गतिरोध बना हुआ है।
परमाणु प्रतिष्ठानों को लेकर इसलिए हुआ समझौता
विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह दोनों देशों के बीच ऐसी सूचियों का लगातार 34वां आदान-प्रदान है। इस लिस्ट का पहला आदान-प्रदान एक जनवरी,1992 को हुआ था। ये समझौता दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली का एक महत्वपूर्ण कदम था। इसका उद्देश्य ये सुनिश्चित करना था कि दोनों देश एक-दूसरे के परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमला नहीं करेंगे। इस समझौते का एक और उद्देश्य ये भी था कि दोनों देशों के बीच परमाणु हथियारों और प्रतिष्ठानों के संभावित इस्तेमाल से बचाव करना और क्षेत्रीय स्थिरता को बनाए रखना था।
भारत ने पाकिस्तान से 183 भारतीय नागरिकों की रिहाई में तेजी लाने को कहा, जिन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली है। भारत ने 18 अन्य कैदियों तक तुरंत राजनयिक पहुंच की भी मांग रखी। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ने अपनी हिरासत में 381 नागरिक कैदियों और 81 मछुआरों के नाम साझा किए, जो पाकिस्तानी हैं या माने जाते हैं कि पड़ोसी मुल्क से आए हैं। पाकिस्तान ने अपनी हिरासत में 49 नागरिक कैदियों और 217 मछुआरों के नाम साझा किए, जो भारतीय हैं या माने जाते हैं कि भारत से आए हैं।
1988 में हुए समझौते के तहत सौंपी गई लिस्ट
भारत और पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के बीच हुए परमाण प्रतिष्ठानों से जुड़ी लिस्ट का आदान-प्रदान एक खास समझौते के तहत हुआ है। इस एग्रीमेंट पर 31 दिसंबर, 1988 को हस्ताक्षर किए गए थे। फिर 27 जनवरी, 1991 को यह लागू हुआ। समझौते के तहत दोनों देशों के बीच, हर साल की पहली जनवरी को अपने-अपने परमाणु प्रतिष्ठानों के बारे में एक-दूसरे को सूचित करने का प्रावधान है।
खास समझौते के तहत होता है ऐसा
भारत-पाकिस्तान, दोनों पक्ष हर साल दो बार, 1 जनवरी और 1 जुलाई को, 2008 के कॉन्सुलर एक्सेस समझौते के प्रावधानों के तहत कैदियों और मछुआरों की सूची का आदान-प्रदान करते हैं। विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान से उन 183 भारतीय मछुआरों और नागरिक कैदियों की रिहाई और वापसी में तेजी लाने के लिए कहा, जिन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली है।
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