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लेख@ आओ नव वर्ष संकल्प करें…

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संसार के अनेक देशों की तरह भारत में भी हर बार नया साल बहुत उत्साह ,मस्ती तथा हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है! नए वर्ष पर पहले तो ग्रीटिंग कार्ड का आदान-प्रदान होता था ,आजकल एसएमएस का आदान-प्रदान होने लगा है! नए साल के जशन मनाए जाते हैं! लोग परिवार के सदस्यों के साथ महंगे महंगे होटलों में नाच गाने के बाद डिनर करते हैं। कुछ लोग नए साल के शुभ आगमन पर संकल्प करते हैं। हमारे समाज में संकल्प करना हजारों सालों से एक परंपरा रही है। कुछ लोग नव वर्ष पर अपने बिजनेस में और ज्यादा तरक्की करने का संकल्प लेते हैं! योजनाएं बनाते हैं, साधनों को एकत्रित करने तथा निवेश करने के बारे में खाका तैयार करते हैं। कुछ अन्य लोग शराब छोड़ने के लिए संकल्प करते हैं। यूं तो शराबी लोग हर रात शराब पीने से पहले अपने आप को यह कहकर शराब छोड़ने का संकल्प करते हैं…बस! आज आज ही थोड़ी सी पी लेता हूं। कल से मेरी तथा मेरे बाप की भी शराब पीने से तौबा। लेकिन साहब वह वायदा ही क्या जो वफा हो गया। वायदे तो किये ही जाते हैं तो तोड़ने के लिए और शराबियों ने तो शराब छोड़ने के लिए कब-कब और कितने-कितने संकल्प बीवी, बहन ,भाई तथा दोस्तों से किए होंगे। मैं समझता हूं कि नव वर्ष पर पति-पत्नी को मिल बैठकर संकल्प करना चाहिए कि वे आपस में कभी झगड़ा नहीं करेंगे, एक दूसरे से कुछ भी नहीं छुपाएंगे, एक दूसरे की इज्जत करेंगे,किसी तीसरे में दिलचस्पी नहीं दिखाएंगे, घर के बुजुर्गों की इज्जत करेंगे तथा बच्चों के सामने कलह क्लेश करके उन्हें गलत शिक्षा नहीं देंगे। अगर ऐसा होता है तो घर खुशियों से भरपूर होगा और घर स्वर्ग बन जाएगा।
नव वर्ष पर हमारे राजनेताओं को भी संकल्प करना चाहिए कि वे मन, कर्म और वचन से जनप्रतिनिधि के तौर पर ही व्यवहार करेंगे, भ्रष्ट तरीकों से तौबा करेंगे, संसद की मर्यादा बनाए रखेंगे, एक दूसरे पर छींटाकशी नहीं करेंगे, सरकार की जनकल्याण संबंधी नीतियों का समर्थन करेंगे,विरोध के लिए विरोध नहीं करेंगे,देश में जातिवाद, सांप्रदा यिकता,आतंक वाद, क्षेत्रीय वाद तथा भाषावाद नहीं फैलने देंगे,सदन में नियमित तौर पर हाजिर होकर इसकी कार्रवाई में हिस्सा लेंगे। अगर ऐसा होता है तो हमारे देश का लोकतंत्र विश्व के लिए एक आदर्श बन जाएगा। क्या हमारे देश के राजनेता नव वर्ष पर सचमुच ही ऐसा संकल्प ले सकेंगे।
एक संकल्प हमारे देश के टीवी चैनलों को भी करना चाहिए। हमारे देश में इस समय लगभग 500 टीवी चैनल चल रहे हैं जिनका मुख्य उद्देश्य मनोरंजन, जानकारी तथा समाचारों के द्वारा बीच-बीच में विज्ञापनों द्वारा बहुत रुपए कमाना ही है। यह टीवी चैनल बेशक इस प्रकार धन कमाए, लेकिन आम दर्शकों को दिखाए जाने वाले समाचार निष्पक्ष
हो, दिखाए जाने वाले सीरियल गरिमा,मर्यादा,भारतीय परंपरा तथा नैतिकता का इतना तो ध्यान रखें कि हम परिवार के सभी सदस्य, बड़े बूढ़े, स्त्री पुरुष तथा बच्चे मिल बैठकर इनका आनंद उठा सकें। टीवी सीरियल मनोरंजक, शिक्षाप्रद तथा जानकारी बढ़ाने वाले होने चाहिए। उन में हिंसा, हत्या, बलात्कार, चोरी डकैती, अपहरण आदि का महिमा मंडन नहीं करना चाहिए। बुजुर्गों, स्ति्रयों तथा बच्चों की कोमल भावनाओं का ध्यान रखना चाहिए। टीवी सीरियल लंबे तथा उबाऊ नहीं होने चाहिए। समाचार हमें डराने वाले, आपस में भेदभाव तथा नफरत फैलाने नहीं होने चाहिए बल्कि जानकारी निष्पक्षता के तौर पर देने वाले होने चाहिए। अगर कहीं ऐसा होता है तो टीवी देखना सचमुच ज्यादा उपयोगी हो जाएगा।
एक संकल्प,, प्रतिभा खोज,, करने वाले संगठनों को भी करना चाहिए। कृपया इससे संबंधित कार्यक्रमों का प्रदर्शन तथा संचालन इस तरह करें कि युवाओं में अनैतिकता, छिछोरापन, चरित्रहीनता तथा नंगापन ना आए। इस प्रकार के आयोजनों में अपनी बेटी के प्रतिभा प्रदर्शन पर अपने पिता को गर्व तो महसूस हो परंतु शर्म नहीं आनी चाहिए। नव वर्ष पर संकल्प तथा वायदे तो किए जाते हैं लेकिन निभा पाना सबके बस की बात नहीं होती तभी तो एक फिल्मी गाने में मन्ना डे ने कहा है,,, कसमे वादे, प्यार वफा। बातें हैं, बातों का क्या।
प्रोफेसर शाम लाल कौशल
रोहतक हरियाणा


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