- नियमित अध्यनरत छात्रा का 2020 से वर्तमान तक लगातार मनरेगा में हाजिरी
- नियमित अध्यनरत छात्रा शासकीय कर्मचारी की संतान और उपसरपंच के परिवार से संबंधित
- छात्रा की मनरेगा में हाजिरी,उसने पहले किया कृषि महाविद्यालय से स्नातक,वर्तमान में स्नातक की कर रही है नियमित पढ़ाई
- 5 वर्षों में मनरेगा के नाम पर लाखों का आहरण छात्रा के जॉब कार्ड से
- जनपद पंचायत बैकुंठपुर में कार्यरत डाटा एंट्री ऑपरेटर के भाई का भी लगातार भरा गया मस्टर रोल
- जबकि डाटा एंट्री ऑपरेटर का भाई कर रहा बी एड की नियमित पढ़ाई
- 2020 से वर्तमान तक ग्राम पंचायत के प्रत्येक मनरेगा कार्य में उक्त दोनों छात्रों की हाजिरी
- बिना सरपंच,रोजगार सहायक और ग्राम पंचायत सचिव के सहमति बिना नहीं हो सकता भ्रष्टाचार
- सूत्रों के अनुसार ग्राम पंचायत के पूरे निर्माण एवं मनरेगा कार्य जनपद उपाध्यक्ष के दखल से…
- जिन छात्रों का भरा गया मनरेगा में हाजिरी,उनका परिवार जनपद उपाध्यक्ष पति का खास
- मामला सामने आने के बाद जिन पंचायत में रहा जनपद उपाध्यक्ष का दखल,वहां अतिशीघ्र लग सकता है सूचना का अधिकार
- मामले के खुलासे का कारण बना वार्डबार मतदाता सूची में हेर-फेर
- चुनाव जीतने के लिए उपसरपंच ने वार्ड बार मतदाता सूची में सचिव और डाटा एंट्री ऑपरेटर के माध्यम से कराया था फेरबदल
-रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर,12 दिस΄बर 2024(घटती-घटना)। भ्रष्टाचार को रोकने के शासन चाहे जितने उपाय कर ले, आज के आधुनिक युग में तकनीकी रूप से कितनी भी व्यवस्था बना ले, परंतु भ्रष्टाचारी व्यक्तियों से निजात पाना असंभव प्रतीत होता है। लगातार हो रही तकनीकी विकास और पारदर्शिता के तमाम तरह के उपाय भ्रष्टाचारियों के मंशा के आगे पानी मांगते नजर आते हैं। भ्रष्टाचार ना हो पाए इसके लिए कई कानून भी बने, सूचना के अधिकार अधिनियम को लागू किया गया, जमीनी स्तर से लेकर के शीर्ष स्तर तक की चीजों को ऑनलाइन किया गया और तकनीक से जोड़ा गया, परंतु तमाम तरह के उपाय के बावजूद वर्तमान तक भ्रष्टाचारियों के मन में भय व्याप्त नहीं कर पाया। यही कारण है कि शासन प्रशासन के नाक के नीचे, अधिकारी कर्मचारियों के मिलीभगत से तथाकथित नेता और ठेकेदार शासन की आंख में धूल झोंकने का कार्य करते हैं, और भ्रष्टाचार को अंजाम देते हैं। शासन की मनरेगा योजना बहुत ही महत्वाकांक्षी योजना है, जिसमें ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराने और दैनिक आजीविका की पूर्ति करने का सशक्त माध्यम प्रदान करना शासन का उद्देश्य है। मनरेगा के मार्फत ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराने के साथ ही पंचायत स्तर पर होने वाले विभिन्न प्रकार के कार्य को अंजाम दिया जाता है। जिसकी पूरी निगरानी का जिम्मा ग्राम पंचायत के सरपंच के साथ-साथ शासन के द्वारा नियुक्त रोजगार सहायक और ग्राम पंचायत सचिव का होता है। परंतु जब ऐसे ही व्यक्ति शासन को पलीता लगाने में अपना सर्वस्व झोंक दें, तो परिणीति भ्रष्टाचार के रूप में सामने आती है।
स्नातक बीएड का नियमित छात्र की हाजिरी मनरेगा में कैसे?
कुछ ऐसा ही मामला बैकुंठपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत डकईपारा का है। जहां विगत 2020 से पंचायत में होने वाले मनरेगा के मार्फत प्रत्येक कार्य में ऐसे लोगों का जॉब कार्ड लगाकर हाजिरी भरी गई है, और मस्टर रोल के माध्यम से लाखों रुपए निकाले गए हैं, जो नियमित छात्र छात्रा के रूप में ग्राम से सैकड़ो किलोमीटर दूर अध्यनरत हैं, और जहां प्रतिदिन उनके महाविद्यालय और विश्वविद्यालय में हाजिरी अंकित हो रही है। ऑनलाइन जानकारी के अनुसार विगत 5 वर्षों में ऐसा कोई सप्ताह नहीं है जहां छात्र-छात्रा कि मनरेगा में हाजिरी ना लगाई गई हो और मस्टर रोल के माध्यम से रूपयों का आहरण ना किया गया हो। मामले का खुलासा तब हुआ जब ग्राम के भूतपूर्व सरपंच ने सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत विगत 5 वर्षों में ग्राम में हुए मनरेगा के तहत कार्यों का ब्यौरा मांगा। जब इसकी जानकारी दैनिक घटती घटना को हुई तो खबर प्रकाशित हुई और इसके बाद जब अपने स्तर पर छानबीन की गई तो बहुत ही चौंकाने वाले मामले सामने आए। विगत चुनाव में निर्वाचित हुए उप सरपंच परिवार के एक सदस्य जिसने विगत कुछ वर्षों में कृषि महाविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और वर्तमान में परास्नातक की पढ़ाई करने के लिए अंबिकापुर कृषि महाविद्यालय में दाखिला लिया है, और जो आयकर दाता शासकीय कर्मचारी की संतान है, उसका नाम 2020 से लेकर के वर्तमान तक पंचायत के प्रत्येक मनरेगा कार्य में मजदूर के रूप में अंकित है, लगातार उसकी हाजिरी लगाई गई है, और साथ ही मस्टर रोल के माध्यम से उसके खाते में लाखों का भुगतान प्राप्त किया गया है। साथ ही जनपद पंचायत बैकुंठपुर में डाटा एंट्री ऑपरेटर के पद पर कार्य कर रहे व्यक्ति के भाई जो की शिक्षा स्नातक बीएड का नियमित छात्र है, उसकी भी हाजिरी मनरेगा कार्यो में निरंतर पाई गई एवं मस्टर रोल के माध्यम से उसके नाम से भी लाखों का भुगतान प्राप्त किया गया है। यह कैसे संभव है कि जो छात्र-छात्रा ग्राम पंचायत से सैकड़ो किलोमीटर दूर किसी महाविद्यालय में नियमित छात्र के रूप में दर्ज हैं, और जहां प्रतिदिन उनकी उपस्थिति दर्ज हो रही है, उनका नाम मजदूर के रूप में मनरेगा कार्यो में भी दर्ज हो, और यह एक संयोग नहीं अपितु सोची समझी रणनीति के तहत भ्रष्टाचारियों द्वारा अंजाम दिया गया कृत्य है, और पूरी तरह से आपराधिक मामला है। बगैर ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक के मिलीभगत के यह कृत्य संभव भी नहीं है।
पंचायत सचिव और रोजगार सहायक की भूमिका संदिग्ध
मनरेगा में हुए भ्रष्टाचार के, और महाविद्यालय में अध्यनरत नियमित छात्र-छात्राओं के मनरेगा मजदूर के रूप में कार्य करने वाले इस अपराधिक मामले में ग्राम पंचायत के सचिव और रोजगार सहायक की भूमिका संदिग्ध है। क्योंकि मनरेगा के समस्त कार्यों का क्रियान्वयन इन्हीं के द्वारा संचालित किया जाता है, और मजदूरों की हाजिरी से लेकर मस्टर रोल निर्माण और भुगतान की जवाबदारी भी इन्हीं की होती है। यह कैसे संभव है कि बगैर रोजगार सहायक और पंचायत सचिव की मिली भगत के इतने बड़े कार्य को वर्षों से अंजाम दिया जा रहा है। अगर छात्र-छात्राओं की हाजिरी एकाध बार मनरेगा मजदूर के रूप में लगी होती तो यह संयोग माना भी जा सकता था। परंतु 2020 से लेकर के अब तक पंचायत के प्रत्येक कार्यों में लगातार हाजिरी लगाकर रूपयों का भुगतान संयोग नहीं कहा जा सकता। और यह तो केवल एक बानगी है। यदि पूरे पंचायत में हुए विगत पांच वर्षों में मनरेगा कार्यो की जांच की जाए तो ऐसे सैकड़ो मामले सामने आने की पूरी संभावना है। इस मामले की वृहद जांच होना जरूरी है, और संबंधितों पर प्रकरण दर्ज कर उचित कार्यवाही ही एक नजीर बनेगी, जिससे भ्रष्टाचारियों पर भय व्याप्त किया जा सकता है।
ग्राम पंचायत डकईपारा के विगत 5 वर्ष के निर्माण एवं मनरेगा कार्य जनपद उपाध्यक्ष के दखल से:सूत्र
दैनिक घटती घटना को प्राप्त जानकारी और सूत्रों के हवाले से मिली खबर के अनुसार ग्राम पंचायत डकईपारा में विगत 5 वर्ष में जितने भी निर्माण कार्य या मनरेगा के तहत कार्य किये और कराए गए हैं, उन सब में प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से जनपद उपाध्यक्ष का सीधा दखल रहा है। और निर्माण कार्यों में एजेंसी भले ही ग्राम पंचायत रही हो परंतु सचिव, रोजगार सहायक, उपसरपंच और सरपंच के मिली भगत से पूरी ठेकेदारी जनपद उपाध्यक्ष की रही है। जिन छात्रों की मनरेगा के तहत लगातार हाजिरी भर कर के रुपए निकालने का प्रकरण सामने आ रहा है, उनका परिवार भी जनपद उपाध्यक्ष पति का खास माना जाता है। यही कारण है कि पंचायत से लेकर के जनपद पंचायत तक बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार को बड़ी आसानी से अंजाम दिया गया है। ग्राम पंचायत के भूतपूर्व सरपंच और अन्य लोगों ने संवाददाता से बात करते हुए यह भी आरोप लगाया कि जनपद उपाध्यक्ष द्वारा जितने भी कार्य कराए गए हैं, वह बेहद घटिया और गुणवत्ता विहीन हैं। जिसकी जांच कर कार्यवाही करना अत्यंत आवश्यक है। ग्राम पंचायत डकईपारा के इस मामले के सामने आने के बाद जिन-जिन ग्राम पंचायत में जनपद उपाध्यक्ष का दखल रहा है, और जहां-जहां सरपंच सचिव के मिलीभगत से जनपद उपाध्यक्ष ने अपने ठेकेदारी के माध्यम से कार्य कराए हैं, उन सभी कार्यों से संबंधित तथा उक्त ग्राम पंचायत में मनरेगा के तहत किए गए कार्यों से संबंधित जानकारी के लिए अति शीघ्र लग सकता है सूचना का अधिकार। ऐसा सूत्रों के हवाले से खबर है। वर्तमान सरकार के पूर्व विगत वर्ष तक प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी और तत्कालीन विधायक का संरक्षण प्राप्त होने के कारण जनपद उपाध्यक्ष ने ठेकेदारी के माध्यम से अपनी मनमानी की। परंतु भाजपा की सरकार आने के बाद विपक्षियों ने निर्माण कार्यों की पोल खोलने और अनियमितता तथा भ्रष्टाचार के मामलों को उजागर करने के लिए अब कमर कस ली है।
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur