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मुंबई,@ नम आंखों से दी गई रतन टाटा को विदाई

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@देश के बड़े उद्योगपति रतन टाटा की शव यात्रा में उमड़ा विशाल जनसैलाब…
@राजकीय सम्मान के साथ किया गया अंतिम संस्कार…उमड़ी भारी भीड़


मुंबई,10 अक्टूबर 2024 (ए)। वर्ली श्मशान घाट में महाराष्ट्र पुलिस ने रतन टाटा को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम सलामी दी। दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा का मुंबई के वर्ली श्मशान घाट पर राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
रतन टाटा के डॉग गोवा ने मुंबई में एनसीपीए लॉन में दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा को श्रद्धांजलि दी। टाटा संस के मानद चेयरमैन रतन टाटा का 86 साल की उम्र में बुधवार रात को निधन हो गया। उन्होंने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में आखिरी सांस ली। उनका पार्थिव शरीर मुंबई के एनसीपीए ग्राउंड में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया, जहां भारी तादाद में लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने आए। नेताओं से लेकर अभिनेता, खिलाड़ी और आम लोगों तक उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। उद्धव ठाकरे, शरद पवार, सुप्रिया सुले, राज ठाकरे से लेकर कुमार मंगलम बिड़ला और रवि शास्त्री ने एनसीपीए ग्राउंड पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
गुजरात सरकार ने रतन टाटा को श्रद्धांजलि देते हुए एकदिवसीय शोक की घोषणा की
गुजरात सरकार ने रतन टाटा के सम्मान में बृहस्पतिवार को एक दिवसीय राजकीय शोक की घोषणा की है। रतन टाटा का बुधवार रात मुंबई में निधन हो गया था। राज्य सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार,बृहस्पतिवार को गुजरात में सरकारी भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा और दिनभर कोई आधिकारिक कार्यक्रम नहीं होगा। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल मुंबई पहुंचे और टाटा को पुष्पांजलि अर्पित की, जिनके पार्थिव शरीर को लोगों के अंतिम दर्शन के लिए शहर के राष्ट्रीय प्रदर्शन कला केंद्र (एनसीपीए) में रखा गया है। एक बयान में पटेल ने टाटा के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि भारत ने अपना रत्न खो दिया है और उनके निधन से एक ऐसा खालीपन पैदा हो गया है जिसे कभी नहीं भरा जा सकता।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दी श्रद्धांजलि

रतन टाटा के निधन पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा, देश में उद्योग जगत को आगे बढ़ाने में उनका बहुत बड़ा योगदान था। उन्होंने देश में शिक्षा, स्वास्थ्य, सफाई के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम किया। उनका निधन देश के लिए अपूर्णीय क्षति है। मैं उनको विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं…।
श्मशान घाट पहुंचे अमित शाह
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे और डिप्टी सीएम देवेंद्र फड़नवीस दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा के अंतिम संस्कार के लिए वर्ली श्मशान घाट पहुंचे।
वो सादगी और विनम्रता के प्रतीक थे- पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद


रतन टाटा के निधन पर पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने कहा, वो सादगी और विनम्रता के प्रतीक थे…उनकी सोच बहुत अच्छी थी…वो सबको कहते थे कि अगर उद्योग लगाना है या व्यापार करना है तो सबसे पहले राष्ट्रहित आपका होना चाहिए।
ब्रिटेन के मंत्री ने उद्योग जगत के ‘रत्न’ रतन टाटा को श्रद्धांजलि दी
ब्रिटेन के व्यापार एवं वाणिज्य मंत्री जोनाथन रेनॉल्ड्स ने दिवंगत रतन टाटा को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें उद्योग जगत का ‘‘रत्न’’ बताया और कहा कि टाटा ने ब्रिटिश उद्योग को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बुधवार रात टाटा समूह के प्रमुख रतन टाटा के निधन की खबर सामने आने के तुरंत बाद मंत्री ने सोशल मीडिया पर उन्हें अपनी श्रद्धांजलि दी। टाटा को मुंबई स्थित अपनी कंपनी को ब्रिटेन में सबसे बड़े नियोक्ताओं में से एक के रूप में प्रतिष्ठा दिलाने का श्रेय दिया जाता है।
रतन टाटा की विरासत देश का मार्गदर्शन करती रहेगीः बीएसई
देश के प्रमुख शेयर बाजार बीएसई ने दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा के निधन पर बृहस्पतिवार को कहा कि भारत ने कारोबार जगत के एक अग्रदूत को भले ही खो दिया है लेकिन उनकी विरासत बरकरार है।
रतन टाटा के साथ हमेशा नजर आता था ये युवक
शांतनु से क्या है उसका रिश्ता जो आखिरी सफर में भी रहा सबसे आगे


देश के दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा ने बुधवार की रात दुनिया को अलविदा कह दिया। निधन की खबर आते ही पूरा देश शोक में डूब गया। देश के प्रधानमंत्री से लेकर सभी हस्तियों ने रतन टाटा के निधन पर अपनी भावनाएं व्यक्त की। रतन टाटा के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए मुंबई के नेशनल सेंटर फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स हॉल में रखा गया। रतन टाटा के पार्थिव शरीर को अस्पताल से मुंबई के नेशनल सेंटर फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स हॉल तक ले जाने के समय उनकी इस यात्रा में सबसे आगे शांतनु नायडू दिखे।
नम आंखों के साथ शांतनु नायडू बाइक से रतन टाटा की अंतिम यात्रा में आगे-आगे चल रहे थे। उन्होंने आज सुबह एक इमोशन पोस्ट भी शेयर किया था। अपनी पोस्ट के माध्यम से उन्होंने राष्ट्रीय आइकन के निधन पर शोक जताया था। भारत के सबसे बड़े समूह टाटा संस के मानद चेयरमैन रतन टाटा का बुधवार देर रात संक्षिप्त बीमारी के बाद निधन हो गया। वह 86 वर्ष के थे।
कौन हैं शांतनु नायडू?
31 साल के शांतनु नायडू मुंबई के रहने वाले हैं। शांतनु नायडू ने रतन टाटा को काफी प्रभावित किया था। शांतनु टाटा ट्रस्ट के सबसे युवा असिस्टेंस और भरोसेमंद थे। वे पहली बार 2014 में रतन टाटा से मिले थे जब नायडू ने रात के समय यातायात दुर्घटनाओं से आवारा कुत्तों की सुरक्षा के लिए चिंतनशील कॉलर बनाए थे। इसके बाद ही रतन टाटा ने नायडू को अपनी टीम में शामिल किया था। पिछले 10 सालों में शांतनु नायडू,रतन टाटा के करीबी और भरोसेमंद दोस्त बन गए थे।
कौन होगा पद्म विभूषण रतन टाटा का उत्तराधिकारी
जो संभालेगा 3800 करोड़ का साम्राज्य


दिग्गज उद्योगपति और टाटा संस के मानद प्रमुख पद्म विभूषण रतन टाटा का बुधवार रात को स्वर्गवास हो गया। वह 86 वर्ष के थे। उन्होंने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली। रतन टाटा की अगर कोई संतान होती तो शायद यह सवाल कभी खड़ा नहीं होता कि उनका उत्तराधिकारी कौन होगा।
वहीं रतन टाटा के जाने के बाद टाटा के समूह की जिम्मेदारी किसके कंधे होगी उसमें कई नाम शामिल है। नोएल टाटा रतन टाटा के सौतेले भाई सबसे आगे है। सिर्फ नोएल टाटा पर ही नही टाटा की नई पीढ़ी के कंधों पर टाटा समूह की जिम्मेदारी होगी। टाटा की नई पीढ़ी में लिआ, माया और नेविल शामिल हैं जो रतन टाटा के सौतेले भाई नोएल नवल टाटा के बच्चे हैं। वे अन्य पेशेवरों की तरह कंपनी के माध्यम से आगे बढ़ते हुए, टाटा समूह के भीतर लगातार अपनी जगह बना रहे हैं।
लिआ टाटा समूह में बड़े पद पर कार्यरत
सबसे बड़ी लिआ टाटा ने स्पेन के मैड्रिड में आईई बिजनेस स्कूल से मार्केटिंग में मास्टर डिग्री हासिल की है। वह 2006 में ताज होटल रिसॉर्ट्स एंड पैलेसेस में सहायक बिक्री प्रबंधक के रूप में टाटा समूह में शामिल हुईं और अब विभिन्न भूमिकाओं के माध्यम से प्रगति करते हुए द इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड में उपाध्यक्ष के रूप में कार्य करती हैं।
माया टाटा और नेविल भी उत्तराधिकारी की दौड़ में
छोटी बेटी माया टाटा ने समूह की प्रमुख वित्तीय सेवा कंपनी में एक विश्लेषक के रूप में टाटा कैपिटल में अपना करियर शुरू किया है। वहीं, उनके भाई नेविल टाटा ने ट्रेंट में अपनी पेशेवर यात्रा शुरू की, जिस खुदरा श्रृंखला के निर्माण में उनके पिता ने मदद की थी। नेविल की शादी मानसी किर्लोस्कर से हुई है, जो टोयोटा किर्लोस्कर समूह की उत्तराधिकारी हैं।
1991 में, जब उनके चाचा जेआरडी टाटा ने पद छोड़ दिया, तो उन्होंने समूह का नेतृत्व संभाला। यह समय भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण था, क्योंकि देश ने अपने अर्थव्यवस्था को विश्व के लिए खोलने और तेज तरक्की के युग की शुरुआत करने के लिए क्रांतिकारी सुधार शुरू किए थे। अपने शुरुआती कदमों में से एक में, रतन टाटा ने समूह की कुछ कंपनियों के प्रमुखों की शक्ति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। उन्होंने सेवानिवृत्ति आयु लागू की, युवा लोगों को वरिष्ठ पदों पर पदोन्नत किया और कंपनियों पर नियंत्रण बढ़ाया।
रतन टाटा के विवाह न करने की वजह रही खास
भारतीय उद्योग के जगत में रतन टाटा व्यावसायिक दृष्टिकोण और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों के लिए जाने जाते हैं। हालांकि, उनकी निजी जिंदगी का एक पहलू जो अक्सर चर्चा का विषय रहा है और वह है उनका अविवाहित रहना। साल 1937 में 28 दिसंबर को रतन टाटा का जन्म पारसी परिवार में हुआ था। उनके दादा जमशेदजी टाटा ने टाटा ग्रुप की नींव रखी थी, जिसे रतन टाटा ने आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। रतन टाटा की शुरुआती शिक्षा मुंबई में हुई। इसके बाद वो अमेरिका चले गए, यहां उन्होंने आर्किटेख्र की पढ़ाई की। फिर मैनेजमेंट की पढ़ाई के लिए हार्वर्ड बिजनेस स्कूल का रुख किया। उनके शिक्षित और सक्षम होने का गुण उनके करियर में भी झलकता है। 1962 में रतन टाटा ने टाटा समूह में काम करना शुरू किया। बाद में, वह टाटा ग्रुप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने लगे। साल 1991 में उन्होंने टाटा समूह के अध्यक्ष का पद संभाला और अपने नेतृत्व में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को सफलतापूर्वक लागू किया।
देश की मशहूर शख्सियत, नामी परिवार, अथाह पैसा फिर भी रतन टाटा अविवाहित रहे तो आखिर वजह क्या है? इससे जुड़े सवाल कई बार और बार बार पूछे जाते रहे। तो हकीकत ये है कि रतन टाटा को प्यार हुआ था। एक बार नहीं चार बार। लॉस एंजिल्स में मिली लड़की से तो बात शादी तक पहुंच गई थी लेकिन वो हो न सका और प्यार अधूरा रह गया। एक इंटरव्यू में रतन टाटा ने बताया था कि लॉस एंजिल्स स्थित एक आर्किटेख्र फर्म में काम करने के दौरान एक लड़की से वह मिले और देखते ही देखते उन्हें प्यार हो गया। उस लड़की के साथ शादी करके टाटा सेटल होना चाहते थे, लेकिन इसी बीच उन्हें अपनी बीमार दादी की देखभाल के लिए भारत आना पड़ा और फिर वह वापस नहीं जा सके।
इस दौरान सोचा कि वो लड़की भारत आ जाए लेकिन तभी भारत-चीन के बीच जंग छिड़ गई और उस प्रेमिका के माता पिता ने भारत नहीं भेजा। नतजीतन रिश्ता टूट गया। ऐसा टूटा कि फिर कभी जुड़ नहीं पाया।
रतन टाटा की कुंडली का पारस पत्थर योग
मिट्टी को सोना बना दिया,लेकिन इस योग ने नहीं होने दी शादी


देश के महान उद्योगपति रतन टाटा अब हमारे बीच नहीं हैं. बुधवार की शाम उन्होंने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली थी. रतन टाटा भले ही अपने प्रेम संबंध को सर्वोच्च परिणाम तक नहीं ले जा पाए, लेकिन लोक व्यवहार में उन्होंने जो भी चाहा हासिल किया. उन्हें किसी भी काम में सहज ही उपलब्धि कैसे मिल जाती थी? इस सवाल को लेकर अक्सर अन्य उद्योगपति ही नहीं, ज्योतिष विज्ञान के जानने वाले लोग भी हैरान रह जाते थे. दरअसल, इस सवाल का जवाब उनके जन्म की परिस्थिति को देखने को मिल जाता है. दरअसल रतन टाटा की जन्म कुंडली ऐसी है, जिसमें वह किसी भी काम में हाथ लगाते ही सृष्टि के सभी ग्रह और नक्षत्र खुद सफलता का मार्ग बनाने लग जाते थे
यहां उनकी जन्म कुंडली पर एक सरसरी नजर डालते हैं. रतन टाटा का जन्म 28 दिसंबर 1937 की सुबह 6.30 बजे हुआ था. उनकी जन्मकुंडली धनु लग्न और तुला राशि की है. उनके लग्न में सूर्य, बुध और शुक्र शानदार पोजिशन में बैठे हैं. बड़ी बात यह कि गुरू बृहस्पति धन भाव में है और मंगल तीसरे भाव में. इसी प्रकार शनि की स्थिति चतुर्थ भाव में है. जबकि चंद्रमा एकादश और राहु-केतु बारहवें व छठें भाव में बेहतर समीकरण बना रहे हैं. इस परिस्थिति में रतन टाटा की लग्न कुंडली में दुर्लभ बुधादित्य योग बन रहा है. यह परिस्थिति जातक को दूर दृष्टि के साथ तत्काल और बेहतर परिणाम वाला निर्णय देने की शक्ति प्रदान करता है. दूसरे शब्दों में कहें तो इस परिस्थिति की वजह से ही उन्हें कोई भी काम करने से पहले ही हानि और लाभ का ज्ञान हो जाता था.
लग्न कुंडली में बुधादित्य योग
तमाम ज्योतिष विज्ञानी लग्न कुंडली में इस तरह के योग को पारस पत्थर योग की संज्ञा देते हैं. इसका अर्थ यह होता है कि इस योग का स्वामी यदि किसी काम को छू दे या किसी भी काम में उसका नाम भी शामिल हो जाए तो सफलता का प्रतिशत अपने आप बढ़ जाता है. वहीं कुंडली में सूर्य की ताकतवर स्थिति उन्हें आत्मविश्वासी और दृढ इच्छा शक्ति वाला बनाती थी. लग्न कुंडली में मौजूद तीन ग्रहों में से एक शुक्र का भी उनके जीवन पर बड़ा प्रभाव देखने को मिलता है. इस कुंडली में शुक्र 4 डिग्री पर हैं. यह परिस्थिति उनकी उच्च महत्वकांक्षा को तो दर्शाती ही है, उनके पारिवारिक जीवन को भी स्पष्ट करती है. इसके ही वजह से रतन टाटा के जीवन में प्रेम संबंध तो बने, लेकिन वैवाहिक परिणाम तक नहीं पहुंच सके. लेकिन यही शुक्र उनकी शैक्षिक स्थिति को भी उच्च स्तर तक ले जाने में कारगर रहा है.
दशमेश बुध और भाग्येश का योग
रतन टाटा की लग्न कुंडली में बुध का बली होना उन्हें सफल बिजनेसमैन बनाता है. दशमेश बुध और भाग्येश का योग भी उन्हें राज योग प्रदान करता है. इस योग की वजह से वह ना केवल व्यक्तिगत जीवन में उन्नति करते हैं, बल्कि उन्हें सामाजिक और कारोबारी प्रतिष्ठा भी हासिल होती है. यही नहीं, उनसे जुड़े लोग और संस्थाओं के लिए भी उन्नति के मार्ग खुल जाते हैं. बड़ी बात यह कि रतन टाटा की कुंडली में दशमेश बुध, भाग्येश सूर्य तथा लाभेश शुक्र का संयोग भी शुभ फल देने वाला बन जाता हैं. वैश्विक ख्याति दिलाने वाला यह दुर्लभ योग बहुत कम जातकों की कुंडली में पाया जाता है.
तीसरे भाव में मंगल ने बनाया कुशल आर्किटेक्ट
इस योग की वजह से उनका कारोबार ना केवल जंबूद्वीप, बल्कि समूचे मृत्युलोक यानी विश्व में चरम तक पहुंचा. रतन टाटा की कुंडली में लग्नेश बृहस्पति नीच राशि में नजर आ रहा है. यहां शनि केंद्र में होने की वजह से गुरु बृहस्पति का नीचभंग राजयोग बना हुआ है. रतन टाटा की कुंडली के करियर वाले भाव यानी दसवें स्थान पर शनि की दृष्टि है. चूंकि शनि की पहचान कल पुर्जों से है. इसलिए यही शनि उन्हें कुल पुर्जों के कारोबार में श्रेष्ठ फल देने वाला बन जाता है. वहीं तीसरे भाव में मंगल उन्हें अच्छा कलाकार भी बनाता है. इसी दशा की वजह से रतन टाटा एक अच्छे आर्किटेक्ट बन जाते हैं.
रतन को कैसे मिला था टाटा का टाइटल,
अनाथालय से गोद लिये गये थे पिता,


86 वसंत ऋतुओं का सफर और इसी खुशनुमा मौसम की तरह चेहरे पर बनी मुस्कान, यह खास पहचान थी मशहूर उद्योगपति रतन टाटा की. उन्होंने 9 अक्टूबर की रात करीब 11 बजे मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अपनी आखिरी सांस ली. रतन टाटा के पिता का नाम नवल टाटा है, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि नवल टाटा से पहले उनके किसी भी बुजुर्ग का ‘टाटा’ सरनेम से दूर-दूर तक रिश्ता नहीं था. यहां तक कि कोई बड़ा कारोबारी भी नहीं रहा. किस्मत तब चमकी जब नवल टाटा 13 साल के थे और अनाथलय में रहकर पढ़ाई कर रहे थे.
28 दिसंबर, 1937 को रतन टाटा ने टाटा सन्स ग्रुप के एविएशन डिपार्टमेंट के सेक्रेटरी नवल टाटा के घर जन्म लिया. उनके जन्म के ठीक 2 साल बाद नवल टाटा, टाटा मिल्स के जॉइन्ट मैनेजिंग डायरेक्टर बन गए. नवल टाटा के पैदाइश के वक्त उनके पिता होर्मुसजी टाटा समूह की अहमदाबाद स्थित एडवांस मिल्स में स्पिनिंग मास्टर के तौर पर काम करते थे. लेकिन ‘टाटा’ परिवार से उनका कोई रिश्ता नहीं था. उनके जीवन में यू टर्न 1917 में आया. चलिए जानते हैं रतन टाटा के पिता नवल टाटा के बारे मेंज्मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ जन्म, 4 साल की उम्र में पिता का निधन नवल टाटा का जन्म 30 अगस्त 1904 को होर्मुसजी के घर हुआ था. उनका परिवार मुंबई (उस वक्त के बॉम्बे) में रहता था. जब नवल टाटा 4 साल के हुए तब उनके पिता होर्मुसजी का 1908 में निधन हो गया. उनके गुजर जाने के बाद अचानक से परिवार पर आर्थिक संकट आ गया. इसके बाद नवल और उनकी मां मुंबई से गुजरात के नवासारी में आ गईं. यहां रोजगार का कोई मजबूत साधन नहीं था. उनकी मां ने कपड़े की कढ़ाई का खुद का छोटा सा काम शुरू कर दिया. इस काम से होने वाली इंकम से परिवार का सिर्फ गुजारा चल रहा था. जैसे-जैसे नवल की उम्र बढ़ती जा रही थी वैसे-वैसे मां को उनके भविष्य की चिंता सता रही थी.
अनाथालय जाते ही बदल गई किस्मत
उनके परिवार को जानने वालों ने नवल की पढ़ाई और मदद के लिए उन्हें जेएन पेटिट पारसी अनाथालय भिजवा दिया. वहां वह अपनी पढ़ाई-लिखाई करने लगे. शुरूआती पढाई उन्होंने यहीं से की. जब 13 साल के हुए तब 1917 में सर रतन टाटा (सुविख्यात पारसी उद्योगपति और जनसेवी जमशेदजी नासरवान जी टाटा के पुत्र) की पत्नी नवाजबाई जेएन पेटिट पारसी अनाथालय पहुंची. वहां उन्हें नवल दिखाई दिए. नवाजबाई को नवल बहुत पसंद आए और उन्हें अपना बेटा बनाकर गोद ले लिया. जिसके बाद ‘नवल’ टाटा परिवार से जुड़कर ‘नवल टाटा’ बन गए.
26 साल की उम्र में टाटा ग्रुप से जुड़े
टाटा परिवार से जुड़ने के बाद नवल टाटा की किस्मत बदलने लगी. वह पढ़ाई में बचपन से होशियार थे. उन्होंने बॉम्बे यूनिवर्सिटी से इकॉनमिक्स से ग्रेजुएशन करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए लंदन चले गए. वहां से नवल टाटा अकाउंटिंग की पढ़ाई कर वापस लौटे. 1930 में जब नवल टाटा 26 साल के हुए तब वह टाटा संस ग्रुप से जुड़े और क्लर्क-कम-असिस्टेंट सेक्रेटरी की नौकरी हासिल की. इसके बाद तेजी से उनकी पदोन्नति होती गई. वह जल्द टाटा संस के असिस्टेंट सेक्रेटरी बन गए.
बढ़ता गया कद, मिलता गया प्रमोशन
1933 में नवल टाटा एविएशन डिपार्टमेंट के सेक्रेटरी फिर टेक्सटाइल यूनिट में एग्जीक्यूटिव के तौर पर जुड़े. उसके बाद 1939 में नवल टाटा को टाटा मिल्स के जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर की जिम्मेदारी मिल गई. 2 साल बाद 1941 में उन्हें टाटा संस का डायरेक्टर बनाया गया. नवल टाटा को 1961 में टाटा इलेक्टि्रक कंपनी के चेयरमैन, ठीक एक साल बाद उन्हें टाटा संस के मुख्य ग्रुप का डिप्टी चेयरमैन बना दिया गया.
अतीत को याद करते हुए कहा- ‘मैं भगवान का आभारी हूं
1965 में नवल टाटा ने सर रतन टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन बने और अपने आखिरी समय तक वह इससे जुड़कर समाजसेवा का काम किया. नवल टाटा ने अपने अतीत को याद करते हुए कहा था, ‘मैं भगवान का आभारी हूं कि उन्होंने मुझे गरीबी की पीड़ा का अनुभव करने का अवसर दिया. इसने मेरे जीवन के बाद के वर्षों में किसी भी चीज़ से अधिक मेरे चरित्र को आकार दिया.’
2 शादी, पहली पत्नी से हुए रतन टाटा
नवल टाटा ने दो शादियां की थीं. पहली पत्नी सूनी कॉमिस्सैरिएट और दूसरी सिमोन डुनोयर थीं. सूनी कॉमिस्सैरिएट से उनके दो बच्चे रतन टाटा और जिमी टाटा हुए. 1940 में नवल टाटा का सूनी कॉमिस्सैरिएट से तलाक हो गया था. 1955 में नवल टाटा ने स्विट्जरलैंड की बिजनेसवूमन सिमोन से शादी की. जिनसे नियोल टाटा का जन्म हुआ. नवल टाटा कैंसर की बीमारी से ग्रस्त हो गए. 5 मई 1989 को मुंबई (बॉम्बे) में उनका निधन हो गया.


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