@ फर्जी प्रमाण-पत्र के आधार पर नौकरी कर रहे अधिकारियों के प्रमाण-पत्र की जांच कराने की गई मांग…
@ स्वास्थ्य मंत्री के ओएसडी का नाम भी है शामिल फर्जी दिव्यांग बनकर नौकरी करने वालों की सूची में…
@ छत्तीसगढ़ दिव्यांग सेवा संघ वास्तविक दिव्यांगों को मिलने वाले लाभ के लिए लड़ रहा है लड़ाई…
@ फर्जी दिव्यांग प्रमाण-पत्र के आधार पर नौकरी करने वाले वास्तविक दिव्यांगों के अधिकारों का कर रहे हनन…इतने बड़े मामले में सरकार क्यों चुप बैठी है?
-विशेष संवाददाता-
अम्बिकापुर/रायपुर,25 अगस्त 2024 (घटती-घटना)। सरकार दिव्यांगों के लिए कई योजना लाती है और दिव्यांगों को मजबूत बनाने के लिए तरह-तरह से प्रयास किए जाते हैं, ताकि ईश्वर के सताए हुए लोगों को सर उठाकर जीने का अधिकार मिल सके। इसके लिए कई नियम भी बनाए गए रोजगार देने की भी पहल की गई है पर दिव्यांगों के बीच में भी कुछ ऐसे लोग हैं जो उनके हक को भी मारकर उनके हक को छीन रहे हैं और ऐसे मामले पूरे देश में इस समय उदाहरण बने हुए हैं…जो सही में दिव्यांग है। उनके हक फर्जी दिव्यांग छीन रहे हैं। सरकार भी वास्तविक दिव्यांग के अधिकार को मारने वालों पर कार्यवाही करने से बच रही है …क्योंकि फर्जी दिव्यांग सरकार को अपनी मर्जी से चला रहे हैं… इतनी ऊंची पहुंच व पकड़ है कि… शिकायत कोई भी कर ले… ना जांच होगी ना कार्यवाही होगी…और सही दिव्यांग अपने हक खोते जा रहे हैं। इस समय छत्तीसगढ़ में दिव्यांग संघ फर्जी तरीके से फर्जी दिव्यांग प्रमाण -पत्र के आधार पर नौकरी कर रहे लोगों को लेकर लगातार शिकायत कर रहा है और जांच कार्यवाही की मांग कर रहे हैं ताकि सही दिव्यांगों को उनका हक दिला सके। एक बार फिर दिव्यांग संघ वित्त मंत्री ओपी चौधरी को ज्ञापन सौंपकर जांच की मांग की है और सही दिव्यांगों को उनका हक मिल सके इसकी वह लड़ाई लड़ रहे हैं बड़ा आंदोलन भी उनके तरफ से होने जा रहा है ऐसे में ही सवाल यह उठता है कि छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री के ओएसडी जो राज्य सेवा आयोग के अधिकारी हैं उनकी भी नौकरी फर्जी दिव्यांग प्रमाण-पत्र के आधार पर लगी हुई है जिसका नाम भी दिव्यांग संघ के सूची में मौजूद है जो फर्जी अधिकारी कर्मचारी वाली ही सूची में शामिल है जो फर्जी दिव्यांग प्रमाण-पत्र के आधार पर नौकरी कर रहे हैं।
फर्जी दिव्यांग प्रमाण-पत्र में सुçर्ख़र्खयों में है स्वास्थ्य मंत्री के ओएसडी
स्वास्थ्य मंत्री के ओएसडी राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी फर्जी दिव्यांग प्रमाण-पत्र के आधार पर ही चुने गए हैं और इसके लिए उन्होंने श्रवण बाधित बनकर उसका फर्जी दिव्यांग प्रमाण-पत्र बनवाकर यह नौकरी हासिल की है। स्वास्थ्य मंत्री के ओएसडी का दिव्यांग प्रमाण-पत्र फर्जी है यह हम नहीं कह रहे हैं यह प्रदेश का दिव्यांग संघ कह रहा है और उसका कहना है की सभी को सरकार निकालने की नौकरी से कार्यवाही करे वरना वह बड़ा आंदोलन करेंगे क्योंकि फर्जी दिव्यांग प्रमाण-पत्र बनवाकर ऐसे लोग दिव्यांग लोगों का हक मार रहे हैं और वह ऐसा इसलिए कर पा रहे हैं क्योंकि उनकी पहुंच ऊपर तक है। स्वास्थ्य मंत्री के ओएसडी फर्जी दिव्यांग प्रमाण-पत्र के आधार पर राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारी की कुर्सी हथियाने वाले अधिकारी की पहुंच भी ऊंची है उनके एक भाई राज्य प्रशासनिक सेवा के ही अधिकारी हैं और वह पूर्व में मुख्यमंत्री के ओएसडी रह चुके हैं और उस समय माना जा रहा है अपने भाई को वह बचाने का काम करते थे वहीं अब खुद उनका भाई स्वास्थ्य मंत्री से जाकर इसलिए चिपक गया है उनका ओएसडी बन गया है क्योंकि उसे भी मालूम है वर्तमान सरकार में उसका बचाव एक ही व्यक्ति गलत होने के बावजूद भी कर सकता है वह खुद स्वास्थ्य मंत्री हैं जो अपने भतीजे की भी फर्जी डिग्री मामले में उसके भ्रष्टाचार मामले में उसके साथ खड़े हैं उसे कोरिया से भी बड़ा जिला देकर उसका मनोबल भ्रष्टाचार के लिए बढ़ा चुके हैं। अन्य कोई और उसकी मदद नहीं करेगा यह वह जानकर ही स्वास्थ्य मंत्री से जा चिपका है।
क्या वित्तमंत्री अपनी छवि साफ सुथरी वाली इस मामले में भी बरकरार रख पाएंगे?
वैसे अब प्रदेश के सबसे साफ सुथरे छवि के मंत्री के रूप में अपनी छवि जनता के बीच ले जाने वाले वित्तमंत्री के पास दिव्यांग संघ आवेदन प्रस्तुत किया है और फर्जी दिव्यांग अधिकारी कर्मचारियों पर वह कार्यवाही की मांग कर रहा है अब ऐसे में देखना है की क्या वित्तमंत्री अपनी छवि साफ सुथरी वाली इस मामले में भी बरकरार रख पाएंगे क्या वह फर्जी डिग्री और फर्जी दिव्यांग प्रमाण-पत्रों के आधार पर नौकरी करने वालों को नौकरी से बाहर निकालकर जेल के सलाखों के पीछे भेज पाएंगे?
मोदी की गारंटी के नाम से आई छत्तीसगढ़ सरकार भ्रष्टाचार में ही डूबती जा रही है?
वैसे छत्तीसगढ़ प्रदेश में भाजपा की इस बार की सरकार कई बड़े वादों के साथ वापसी कर सकी है जिसमे भ्रष्टाचार को भी मिटाना उसका वादा है या जिसे उन्होंने मोदी की गारंटी का नाम दिया है लेकिन जैसे जैसे सरकार का कार्यकाल आगे बढ़ रहा है यह देखने को मिल रहा है की सरकार भ्रष्टाचार में ही डूबती जा रही है। स्वास्थ्य विभाग में तो केवल भ्रष्टाचार का ही बोलबाला है वह स्वास्थ्य मंत्री के भतीजे का मामला हो या उनके ओएसडी का मामला हो जिसमे एक फर्जी डिग्री वाला संविदा अधिकारी है और भ्रष्टाचार मचाता फिर रहा है वहीं एक फर्जी दिव्यांग बनकर बड़ा अधिकारी है और स्वास्थ्य मंत्री का खास है। यदि देखा जाए तो प्रदेश में भाजपा की नई सरकार की किरकिरी केवल स्वास्थ्य मंत्री के कारण ही हो रही है। स्वास्थ्य मंत्री की मनमानी और उनकी स्वास्थ्य विभाग में नियुक्ति जो महत्वपूर्ण पदों पर व्यवस्था के तहत की गई है वह यह साबित करता है की किस तरह चुन चुन कर भ्रष्टाचारियों को पद दिया गया जो मरीजों के हक का जितना लूट सके वह उतने ही बड़े पद पर स्वास्थ्य मंत्री की कृपा से बैठा है।उनका खुद का भतीजा तो बिचौलिया भी बन चुका है अब वह किसे किस पद रखना है क्या लेना देना है वह खुद तय करने लगा है।
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