@ कैसे पत्रकारों को मिलेगी सुरक्षा…कैसे समाचार-पत्र रह सकेंगे निष्पक्ष… जब उन्हें सच लिखने पर मिलेगी सजा?
@ दैनिक घटती-घटना के सत्य आधारित समाचारों से खुन्नस हो स्वास्थ्य मंत्री ने बंद करवाया अखबार का शासकीय विज्ञापन…
@ अखबार ने स्वास्थ्य मंत्री के भतीजे और उनके विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी को लेकर चलाई थी खबर…
@ भतीजे हैं प्रभारी डीपीएम सूरजपुर,उन पर भ्रष्टाचार के हैं आरोप,अहर्ता फर्जी होने का है आरोप…
@ विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी का दिव्यांग प्रमाण-पत्र है फर्जी यह है आरोप,फर्जी दिव्यांग प्रमाण-पत्र पर कर रहे हैं काम…


रायपुर/अंबिकापुर,07 जुलाई 2024 (घटती-घटना)। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री ने हाल ही में एक ऐसा बयान दे दिया है जिस बयान को उनके असल व्यवहार से अलग माना जा रहा है और यह माना जा रहा है की वह ऐसा बयान कैसे दे सकते हैं जबकि वह खुद ऐसे मामलों में अलग विचार रखते हैं। मामला सूरजपुर में पत्रकारों से साथ अधिकारी के द्वारा मारपीट की है जिस मामले में स्वास्थ्य मंत्री ने यह बयान दिया है कि पत्रकारों को डरने की जरूरत नहीं है और उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम का जिक्र करते हुए कहा कि विष्णु देव सरकार में पत्रकारों को डरने की जरूरत नहीं है मामले में जांच के बाद दोषी के विरुद्ध कार्यवाही जरूर होगी।
बता दें कि स्वास्थ्य मंत्री शाला प्रवेश उत्सव में शामिल होने मनेंद्रगढ़ पहुंचे थे तब उनसे सूरजपुर की घटना पर पत्रकारों ने सवाल पूछा था और तब उन्होंने यह जवाब दिया। स्वास्थ्य मंत्री ने सूरजपुर की घटना को लेकर यह बयान तो दे दिया कि पत्रकारों को डरने की जरूरत नहींऔर उन्हें पूरा संरक्षण मिलेगा,लेकिन अब उनका यह बयान उनके हालिया व्यवहार के अनुसार झूठा साबित हो रहा है क्योंकि पत्रकारों को सुरक्षा की गारंटी देने से पहले वह खुद यह भूल गए कि इसी विष्णुदेव साय सरकार में स्वास्थ्य विभाग का भ्रष्टाचार, स्वास्थ्य मंत्री के भतीजे प्रभारी डीपीएम सूरजपुर का भ्रष्टाचार और उनकी फर्जी डिग्री का मामला जिसकी शिकायत हुई है,वहीं उनके ही कर्तव्यस्थ अधिकारी जिसका दिव्यांग प्रमाण-पत्र फर्जी है। ऐसा आरोप है के मामलों को उजागर करने पर दैनिक घटती-घटना समाचार-पत्र को कुचलने उसकी निष्पक्षता और उसके प्रकाशन को रोकने वह खुद प्रयास कर रहे हैं और इसके लिए वह प्रदेश के जनसंपर्क कार्यालय के अधिकारी को समाने कर रहे हैं और समाचार-पत्र का शासकीय विज्ञापन बंद करवाकर उसे प्रभावित और उसे डराने की कोशिश कर रहे हैं। दैनिक घटती-घटना के साथ स्वास्थ्य मंत्री का व्यवहार इस बयान जिसमें वह पत्रकारों को सुरक्षा देने की बात कर रहे हैं से बिलकुल उलट है,वहीं इस मामले में विष्णु देव साय सरकार भी मौन है और एक तरह से मामला भ्रष्टाचार और फर्जी प्रमाण-पत्रों के पक्ष में खड़े होने का समझ में आ रहा है।
भाजपा सरकार भ्रष्टाचार के मामले में मौन क्यों साधे है?
प्रदेश में भाजपा की सरकार सुशासन के नाम पर वापसी कर सकी वहीं मोदी गारंटी जिसमे भ्रष्टाचार के विरुद्ध कार्यवाही भी प्रमुख है,के कारण ही वापसी और आसान हुई, प्रदेश की पूर्ववर्ती सरकार में भ्रष्टाचार को भाजपा ने चुनाव में प्रचार का आधार बनाया था,वहीं जिसे जनता ने भी सही माना था और जनता ने परिवर्तन का इरादा कर प्रदेश में भाजपा को सत्ता की बागडोर सौंप दी है,लेकिन अब वही भाजपा की सरकार भ्रष्टाचार के मामले में मौन साधे हुए है। भ्रष्टाचारियों के पक्ष में वह समाचार-पत्रों को भी कुचलने-दबाने के प्रयास में लगी हुई है,जो देखने में सामने आ रहा है वहीं स्वास्थ्य विभाग के मामले में यह ज्यादा स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है जिसमें स्वास्थ्य मंत्री खुद भ्रष्टाचार मामले में मौन नजर आ रहे हैं और कुछ मामलों में वह उसके उजागर किए जाने पर उग्र भी हो रहे हैं। नाराज भी हो रहे हैं क्योंकि मामला उनके भतीजे से जुड़ा है,व उनके विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी से जुड़ा हुआ है। स्वास्थ्य मंत्री के भतीजे के मामले में तो जांच दो विषयों की होनी चाहिए जिसकी शिकायत भी हुई है,मांग भी हुई है जिसमें एक उनकी फर्जी डिग्री का मामला है। वहीं दूसरा उनके नर्सिंग कॉलेज और उनके द्वारा कांग्रेस शासनकाल में कोरिया जिले में प्रभारी डीपीएम रहते हुए किए गए भ्रष्टाचार से जुड़ा हुआ है वहीं स्वास्थ्य मंत्री के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी जो राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं, की नौकरी फर्जी दिव्यांग प्रमाण-पत्र के आधार पर लगी है। यह भी एक आरोप है और जिसकी भी जांच की मांग हुई है और इस मामले में भी स्वास्थ्य मंत्री मौन हैं साथ ही इन विषयों पर निष्पक्षता के साथ साथ ही नियम अनुसार कार्यवाही की मांग करने पर और समाचार प्रकाशित करने पर स्वास्थ्य मंत्री समाचार-पत्र को ही बंद कराने में जुट चुके हैं।
स्वास्थ्य मंत्री सुशासन के नाम पर झूठ बोल रहे हैं…
स्वास्थ्य मंत्री भले ही पत्रकारों को आश्वासन दे रहे हैं कि प्रदेश कि विष्णु देव साय सरकार पत्रकारों को पूरी सुरक्षा देगी लेकिन उनके खुद के व्यवहार और एक समाचार-पत्र के मामले में उनका निर्देश जो उन्होंने जनसंपर्क अधिकारी को दिया है जिसके अंतर्गत समाचार-पत्र का विज्ञापन बाधित किया गया है…कहा जा सकता है कि स्वास्थ्य मंत्री सुशासन के नाम पर झूठ बोल रहे हैं और वह खुद जब पत्रकारों और समाचार-पत्र के विरूद्ध जाकर भ्रष्टाचार के पक्ष में खड़े हैं,तो कैसे वह सुरक्षा का विश्वास दिला सकते हैं। वैसे प्रदेश में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर स्वास्थ्य मंत्री खुलकर समाचार-पत्र के खिलाफ सामने आ चुके हैं वह यह जता चुके हैं कि वह भ्रष्टाचार को लेकर खासकर उनके विभाग उनके भतीजे और उनके विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी के मामले में वह मौन ही रहने वाले हैं कार्यवाही या जांच के विषय में वहीं यदि कोई इस विषय पर तथ्य सामने लायेगा स्वास्थ्य मंत्री प्रभाव का इस्तेमाल करके उस ही नेस्तनाबूत करने में जुट जायेगें और वह भ्रष्टाचार के बचाव में नजर आएंगे।
स्वास्थ्य मामले में अब तक के सबसे असफल मंत्री साबित हुए हैं स्वास्थ्य मंत्री
प्रदेश में स्वास्थ्य मंत्री का कार्यकाल यदि देखा जाए तो स्वास्थ्य मामले में अब तक के सबसे असफल मंत्री साबित हुए हैं स्वास्थ्य मंत्री। प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग का क्या हाल है उनके कार्यकाल में इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके ही पड़ोस के जिले या यह कहें स्वास्थ्य सुविधा मामले में गृह जिले में सिविल सर्जन शासकीय अस्पताल में मरीज से इलाज का शुल्क मांगता पकड़ा गया जिसे मामला उजागर होने पर निलंबित किया गया। बता दें कि यदि प्रदेश में हर जगह का हाल देखा जाए तो ऐसा ही है। नवीन एमसीबी जिले में जहां के खुद स्वास्थ्य मंत्री हैं वहां के सीएमएचओ को लेकर भी आए दिन खबर प्रकाशित होती रहती है कैसे वह निजी नर्सिंग होम में ही व्यस्त रहते हैं,वहीं शासकीय अस्पताल में भी इलाज का वह शुल्क ले लेते हैं,यह बात भी किसी से छिपी नहीं है लेकिन कार्यवाही उनके विरुद्ध भी शून्य है आज तक। स्वास्थ्य मंत्री को ऊर्जावान मानकर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी दी तो जरूर गई थी लेकिन वह उसे निभा पाने में असमर्थ साबित हो रहे हैं जो देखने में सामने आ रहा है,और स्वास्थ्य व्यवस्था दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है।
भ्रष्ट अधिकारियों-कर्मचारियों से जो पूर्व सरकार में भी सक्रिय थे… अब भी सक्रिय हैं…के चंगुल से मुक्त करा पाने में असफल…
स्वास्थ्य मंत्री से जहां उम्मीद थी कि वह प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को दलालों भ्रष्ट अधिकारियों-कर्मचारियों से जो पूर्व सरकार में भी सक्रिय थे…अब भी सक्रिय हैं …के चंगुल से मुक्त कराएंगे। वह जांच उपरांत ऐसे लोगों पर कार्यवाही हो ऐसी अनुशंसा करेंगे लेकिन वह इसके विपरित उन्हीं भ्रष्ट व्यवस्था से जुड़े लोगों के पक्ष में खड़े हो गए हैं और वह अब उनके विरुद्ध हो गए हैं जो भ्रष्टाचारियों के विरुद्ध कार्यवाही की मांग कर रहे हैं। अब स्वास्थ्य मंत्री से तो भ्रष्टाचार मामले में उम्मीद खत्म हो गई है कार्यवाही की। वहीं प्रदेश के मुखिया इस मामले में आगे क्या अपना रूख सामने रखने वाले हैं यह देखने वाली बात होगी।
क्या स्वास्थ्य मंत्री के लिए पूरे प्रदेश के लोगों से ऊपर उनके भतीजे और उनके विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी हैं?
वैसे प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री के लिए पूरे प्रदेश के लोगों से ऊपर उनके भतीजे और उनके विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी हैं जिनके लिए… जिन्हे बचाने के लिए वह किसी का भी मुंह नहीं देखने वाले चाहे वह प्रदेश की जनता हो उनके क्षेत्र की जनता हो या फिर सरकार की छवि की बात क्यों न हो। स्वास्थ्य मंत्री हर हाल में प्रदेश के बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मामले से ऊपर अपने भतीजे को रखने वाले हैं वह विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी को बचाने भी कुछ भी कर गुजरने तैयार हैं भले ही बीच देश के प्रधानमंत्री की ही वह बात झूठी साबित हो जाए जिसमे वह भ्रष्टाचार को मिटाने की बात करते हैं। स्वास्थ्य मंत्री कुल मिलाकर देश के प्रधानमंत्री के भी निर्देशों के विपरीत काम कर रहे हैं और वह पत्रकारों को झूठा आश्वासन दे रहे हैं की उन्हे कोई खतरा नहीं डरने की जरूरत नहीं।



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