- क्या अभी भी पूर्व डीपीएम ही चला रहे हैं कोरिया जिले का स्वास्थ्य विभाग?
- 2 महिने हो गए अब तक नहीं दिया पूर्व डीपीएम ने नहीं दिया पूरा प्रभार?
- क्या सीएमएचओ की शह पर जारी हैं कोरिया जिले के स्वास्थ्य विभाग में अनियमितताएं?
-रवि सिंह-
कोरिया,05 मई 2024 (घटती-घटना)। कोरिया जिले का स्वास्थ्य विभाग आखिर कब उभरेगा भ्रष्टाचार से यह सवाल इस समय इसलिए उत्पन्न हो रहा है क्योंकि स्वास्थ्य विभाग में भारी अनियमितता की बात सामने आ रही है इसके पीछे की कई वजह चर्चा में है और उसमें से एक है सीएमएचओ का पूर्व डीपीएम की सलाह पर चलना व वर्तमान डीपीएम को पूरा प्रभार ना दिलाना, मंत्री विधायक से लेकर कलेक्टर तक को सारी बातों की है जानकारी फिर भी न जाने क्यों बने हुए हैं सभी अनभिज्ञ? आखिर इसके पीछे की क्या है वजह? वही 5 साल बाद हो रहे स्वास्थ्य विभाग के टेंडर में भी बड़ा भ्रष्टाचार होने की आशंका अभी से ही जताई जा रही है, टेंडर में नहीं किया जा रहा है नियमों का पालन। कोरिया जिले के स्वास्थ्य विभाग पर जिला प्रशासन की मेहरबानी ऐसी है कि भ्रष्टाचार करने सीएमएचओ और पूर्व डीपीएम को जिला प्रशासन ने छूट दे रखी है, अब सीएमएचओ ने मैन्यूअल टेंडर की रणनीति बनाने और पूर्व डीपीएम की आवाजाही किसी को पता न चले इसके लिए सीएमएचओ कार्यालय का सीसीटीवी बंद करा रखा है। वहीं घटती घटना के खबर के बाद कोरिया जिले के दो व्हाट्सअप ग्रुप से पूर्व डीपीएम गुपचुप तरीके से लेफ्ट हो गए, परन्तु अभी भी कोरिया जिले के दो जीमेल एकांउट वो ही हैंडल कर रहे है, सीएमएचओ हर कदम पूर्व डीपीएम से पूछकर ही उठाते है। इसलिए राज्य सरकार से आए दिशा निर्देष पूर्व डीपीएम दोनों ई मेल एकांउट देख कर सीएमएचओ को बताते है। सीएमएचओ की कार्यशैली से विभाग का पूरा स्टाफ समझ गया है, भेष बदलने में मास्टर सीएमएचओ एकदम बहुत ही मीठा बोलकर स्टाफ से गलत काम करवाने की कोशिश करते हैं जिस पर अब स्टाफ तैयार नहीं हो रहे है। क्योकि नियमविरूद्ध काम करवाए जाने की सीएमएचओ की पुलिस से लेकर रायपुर स्वास्थ्य विभाग मंे शिकायत भी हो गयी है।
कोरिया स्वास्थ्य के तत्कालीन डीपीएम आखिर क्या वजह है कि पूरा प्रभार नहीं देना चाहते?
कोरिया के स्वास्थ्य विभाग के तत्कालीन डीपीएम डॉक्टर प्रिंस जायसवाल का तबदला हुए तकरीबन 2 महीने हो चुके हैं तबादले के बाद वह सूरजपुर जिले में पदभार ग्रहण भी कर चुके हैं पर कोरिया जिले का पूरा प्रभार उन्होंने अभी तक नहीं छोड़ा, ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर कौन सा भ्रष्टाचार मचाए हैं की प्रभार देने से उनका पसीना छूट रहा है की कही उनकी पोल ना खुल जाए? ऐसा कौन सा कांड करके बैठे हैं कि उन्हें डर है? कही प्रभार दिया तो मेरी पूरी कुंडली खुल जाएगी और मेरी पूरी जानकारी लोगों के सामने आ जाएगी क्या यही वजह है कि पूरा प्रभाव देने से डॉक्टर प्रिंस जायसवाल घबरा रहे हैं? पर वही इतने बेशर्म जिम्मेदार लोग भी हैं कि डॉक्टर प्रिंस जायसवाल के प्रभार ना देने से उन्हें कोई दिक्कत नहीं हो रही अभी डॉक्टर प्रिंस जायसवाल की जगह कोई और होता तो कार्रवाई हो गई होती पर ऐसा न जाने क्या चल रहा है कि डॉक्टर प्रिंस जायसवाल को लेकर प्रशासनिक व राजनीतिक दोनों संरक्षण दिया जा रहा है?
अभी तक नही सौंपा प्रभार
पूर्व डीपीएम को कोरिया छोड़े 2 माह हो गया वही कोरबा के डीपीएम ने कोरिया जॉइन कर लिया…परंतु अब तक पूरा प्रभार वर्तमान डीपीएम को नही सौंपा गया है। पूर्व डीपीएम सूरजपुर सहित कोरिया जिले का प्रभार एक साथ सम्हाल रहे हैं। पूर्व डीपीएम का मोह कोरिया जिले से नहीं छुटने के पीछे की वजह क्या है यह सभी जानते हैं और वह यह है की उनकी जिला प्रशासन से अच्छी सांठगांठ है और उन्हे छूट है जिले में इसलिए वह यहां मनमानी कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग कोरिया को पूर्व डीपीएम कोरोना काल से खोखला कर रहे हैं और जिले के स्वास्थ्य सुविधा के नाम आने वाले सभी सुविधाओं को वह बंदरबाट कर रहे हैं। एक तरह से वह दीमक की तरह जिले की स्वास्थ्य सुविधा को बर्बाद कर रहे हैं।
पूर्व डीपीएम की आवाजाही पता नहीं चले,सीसीटीवी कराया बंद
दरअसल, सीएमएचओ कार्यालय जिला मुख्यालय बैकुंठपुर से एकदम अलग शहर से बाहर स्थित है, अब इसके चारों ओर उंची उंची दिवार बना दी गई है, ताकि किसी की आवाजाही का दूर से पता नही चल सके, सूत्र बताते है कि घटती घटना लगातार पूर्व डीपीएम और सीएमएचओ के कार्यालय में अपने चेंबर को बंद कर गुपचुप तरीके से काम करने की खबरे लगातार प्रकाषित करता रहा है, वहीं सीएमएचओ ने अब मामले में सारे सीसीटीवी बंद करा दिए है, ताकि छुट्टी के दिन और रात में लगातार पूर्व डीपीएम की आवाजाही की जानकारी किसी को नहीं हो सके।
लिफाफे गुपचुप तरीके के खोलकर देखने की रणनीति
विशेष सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बैकुंठपुर के कंचनपुर स्थित सीएमएचओ कार्यालय जो कि सूनसान जगह पर स्थित है, एक बार एक टेंडर को लेकर ऐसी रणनीति अपनाई गई जिसमें रातो रात टेंडर के लिफाफे खोलकर रेट देख लिए गए और लिफाफों को अच्छे से बंद करके अपने चहेते को टेंडर देने के लिए रेट ओपन कर उसे कम दर चढ़ावा कर टेंडर दे दिया गया। इसके लिए जिसे टेंडर दिया जाना था उसके द्वारा कार्यालय के आसपास थाने तक उसके आदमी खड़े रहे ताकि रात में लिफाफे खोलने के दौरान कोई कार्यालय पहुंच ना पाएं। सीएमएचओ ने यही रणनीति अपनाई है, सूत्र बताते है कि सीएमएचओ और पूर्व डीपीएम मिलकर लगभग 5 करोड़ के टेंडर अपने करीबी दिल्ली की एक पार्टी को दिलवाना चाहते है, स्थानीय व्यापारियो को छोड़ दिल्ली की पार्टी के लिए सीसीटीबी बंद करा रात में चुपचाप लिफाफा खोलकर सबके रेट देखे जाएगें और फिर लिफाफों को बंद कर टेंडर दिवस बड़ी तेजी से लिफाफे खोले जाएंगे ताकि दुबारा चिपके लिफाफों को कोई देख तक नहीं सके। सबके रेट देखकर अपने चहेते को उस रेट से कम रेट डलवा कर उसे टेंडर दिलाए जाने की रणनीति बना ली गई है। ऐसे मे राज्य सरकार को चाहिए कि सीएमएचओ कार्यालय का टेंडर निरस्त कर हर हाल मे ऑनलाइन करने का निर्देष दे ताकि सीएमएचओ और पूर्व डीपीएम के मनसूबों पर पानी फीर सके।
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur