-ओंकार पाण्डेय-
सूरजपुर 06 जुलाई 2022(घटती-घटना)। स्वच्छ भारत मिशन को लेकर शासन द्वारा किए जा रहे प्रयास जिले में केवल कागजों में ही सफल होते नजर आ रहे हैं। विभागीय उच्च अधिकारियों द्वारा मैदानी स्तर पर उचित रूप से निगरानी न किए जाने से ग्रामीण क्षेत्रों में उक्त योजना पूरी तरह दम तोड़ती नजर आ रही है। ऐसी स्थिति में अंदाज लगाया जा सकता है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशा कितनी हद तक मैदानी स्तर पर कारगर होगी। गौरतलब है कि शासन के निर्देशानुसार जिले भर के सभी ग्राम पंचायतों में स्वच्छ भारत मिशन के तहत लाखों रुपए की लागत से एसएलआरएम सेंटर का निर्माण कार्य कराया गया है लेकिन विभागीय अधिकारियों की सतत मॉनिटरिंग के अभाव में उक्त योजना पूरी तरह दम तोड़ती नजर आ रही है। मजे की बात यह है कि स्वच्छता अभियान को लेकर देश-भर में विशेष पहल किए जा रहे हैं और प्रतिवर्ष रैंकिंग कर बेहतर कार्य करने वालों को सम्मानित किया जा रहा है लेकिन जिले में उक्त अभियान को केवल कागजों में ही सफल बताकर विभागीय अधिकारी अपनी पीठ थपथपा रहे हैं। जिससे अधिकांश गांवों में मैदानी स्तर पर आमजन को उक्त योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। अधिकांश पंचायतों के एसएलआरएम सेंटर के सामग्रियों को चोरों ने पार कर दिया है, जिस वजह से सेंटर का लाभ नहीं मिल पा रहा है। लोग तो यहां तक आरोप लगा रहे हैं कि विभागीय अधिकारी उक्त योजना के क्रियान्वयन को सफल बनाने में उचित कदम उठाते हुए निगरानी नहीं की जा रही है। ज्ञात हो कि सूरजपुर ब्लाक अंतर्गत ग्राम पंचायत शिवनन्दनपुर, जयनगर व कुंजनगर में लाखों रुपए की लागत से तैयार किए गए एसएलआरएम सेंटर देख-रेख के अभाव व उपयोग न होने से खंडहर हो गया है। ऐसी स्थिति में जिले के अधिकांश पंचायतों में उक्त योजना के तहत के कचरा संग्रहन कार्य भी केवल कागजों में ही पूर्ण रूप से सफल होता दिख रहा है।
इस संबंध में जिला पंचायत अध्यक्ष राज कुमारी मरावी में कहा की अगर ऐसी स्थिति है तो जिला प्रशासन को ध्यान देनी चाहिए सम्मान्य सभा में भी इस मामले को रखा जाएगा।
जिला पंचायत सीईओ लीना कोसम से संपर्क कर उनका पक्ष जानने की कोशिश किया गया पर उन्होंने मोबाईल रिसीव नहीं किया जिससे उनका पक्ष ज्ञात नही हो सका
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