भूपेश सरकार की घुरूआ और गोठान योजना चढ़ी भ्रष्टाचार की भेंट
किसानों को रासायनिक खाद लेने पर कंपोस्ट खाद लेने की बाध्यता
-ओंकार पांडेय-
सूरजपुर 23 जून 2022 (घटती-घटना)। वर्तमान राज्य सरकार की ध्येय योजना नरवा, गरवा, घुरुआ और बारी अधिकारियों और कर्मचारियों के भ्रस्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है और राजनीतिक पार्टी को आगामी चुनावों में इसका नुकसान भी उठाना पड़ सकता है. किसानों को सहकारी समितियों में निहायत ही घटिया दरजे की कंपोस्ट खाद दी जा रही है. किसानों का आरोप है कि ये कंपोस्ट नहीं बल्कि रेत और मुरूम को पैक कर वर्मी कंपोस्ट खाद की जगह पर दिया जा रहा है. किसान इस रेत और मुरूम का क्या करेगा? इस सम्बन्ध में रामपुर सहकारी समिति क्षेत्र के किसानों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए बताया कि समिति द्वारा किसानों के हितों की अनदेखी की जा रही है. रासायनिक खाद लेने जब वे सहकारी समिति में पहुंचे तो उन्हें रासायनिक खाद के साथ कथित तौर पर गोठान में निर्मित बर्मी कंपोस्ट खाद लेने की बाध्यता को बताया गया. किसानों के द्वारा कंपोस्ट खाद के पैक को खोला गया तो वह निरा रेत और मुरूम की पैकिंग निकली. किसानों का आरोप है कि समिति द्वारा मुनाफा कमाने और नाम कमाने के लिए इस रेत और मुरूम की पैकिंग करा किसानों को लेने को बाध्य किया जा रहा है.
चपदा समिति की है ये खाद – किसानों ने बताया कि चपदा गोठान से ये बर्मी कंपोस्ट खाद रामपुर समिति में आया है. इस गोठान की ही जांच की जानी चाहिए.
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