उगते सूर्य को अर्ध्य देकर व्रतियों ने किया सुख समृद्धि की कामना
-नगर संवाददाता-
अम्बिकापुर 11 नवम्बर 2021 (घटती-घटना) । उदयीमान सूर्य को अर्ध्य देने के साथ ही गुरुवार सुबह सरगुजा में चार दिवसीय छठ महापर्व संपन्न हो गया। इस दौरान छठ घाटों पर आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। शहर के शंकर घाट, घुनघुट्टा डैम सहित आसपास के छठ घाटों पर छठ पूजा करने वालों की भीड़ उमड़ी। सुबह करीब 06 बजकर 41 मिनट पर सूर्योदय होने के साथ ही अर्ध्यदान का क्रम आरंभ हो गया था। इसके बाद व्रती व उनके स्वजनों ने भगवान भास्कर को अर्घ्य देकर खुद के लिए और समाज व देश के हित की कामना की। इससे पहले गुरुवार की अलसुबह से ही श्रद्धालु पास के छठ घाटों पर पहुंचने लगे थे। इन घाटों पर रोशनी की बेहतर व्यवस्था होने से यहां का दृश्य मनोहारी था।महापर्व के तीसरे दिन शाम को व्रती निर्जला रहकर डूबते सूर्य को ‘अर्ध्य’ देते हैं जबकि चौथे दिन उगते सूर्य को ‘अर्ध्य’ देने के साथ इस महापर्व का समापन होता है।
चार दिवसीय छठ पूजा का आज चौथा और आखिरी दिन है। छठ का व्रत 36 घंटे तक निर्जला रखा जाता है। खरना के दिन शाम को गुड़ वाली खीर खाते हैं और फिर 36 घंटे तक निर्जला व्रत रखा जाता है। खरना के दिन ही छठ पूजा की सारी तैयारी की जाती है। कार्तिक शुक्ल षष्ठी के दिन सूर्य को संध्या अर्घ्य देते हैं और छठी मैय्या की पूजा करते हैं। इसके बाद प्रसाद बांटा जाता है।
शहर व आसपास के छठ घाटों पर शाम होते ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचने लगे हैं। अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने से पहले छठी मइया के गीत गूंज रहे हैं। छठ पर्व के आखिरी दिन सुबह से ही घाटों पर पहुंचना शुरू हो गए। इस दौरान कांच ही बांस के बहंगिया बहंगी लचकत जाए…, जल्दी जल्दी उगा हो सुरुज देव भईल अरग के बेर सहित कई छठ गीत व्रतियों ने गाकर भगवान भास्कर को आराधना की। जगहों पर व्रती और उनके परिवार के लोग नदी के किनारे बैठकर उगते सूरज का इंतज़ार करते हैं। सूर्य उगते ही अर्ध्य अर्पित किया गया, इसके बाद व्रतियों ने एक दूसरे को प्रसाद देकर बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया।
सुख-समृद्धि और सौभाग्य का आशीर्वाद
मान्यता है कि शाम के समय भगवान सूर्य अपनी पत्नी प्रत्यूषा के साथ रहते हैं। ऐसे में महिलाएं अपने सुहाग और संतान की मंगलकामना लिए सायंकाल सूर्य की अंतिम किरण प्रत्यूषा को अर्घ्य देकर सुख-समृद्धि और सौभाग्य का आशीर्वाद मांगी।
छठ व्रतियों ने एक दूसरे को लगाया सिंदूर
छठ पर्व के चौथे एवं अंतिम दिन तड़के ही उगते सूरज को अर्ध्य देने के लिए व्रती और उनके परिजन अपने घरों से पूजा सामग्रियों के साथ घाटों पर पहुंचे। प्रसाद से भरे सूप हाथों में लिए व्रतियों ने पूजा अर्चना की। छठ व्रतियों ने एक दूसरे को सिंदूर लगाया। प्रसाद ग्रहण किया और इसी के साथ ही व्रत और उपवास का चार दिनों तक चलने वाला यह पर्व संपन्न हो गया। सुबह घुटने तक पानी में खड़े होकर व्रतधारियों ने सूप, बांस की डलिया में मौसमी फल, गन्ना सहित पूजन सामग्री और गाय के दूध से भगवान सूर्य को अर्ध्य दिया और सुख समृद्धि की कामना की। महापर्व छठ के अवसर पर पूरे जिले में श्रद्धा और उत्साह का माहौल देखने को मिला।
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