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संपादकीय

लेख@ जलवायु परिवर्तन,सांस के लिए हवा भी नहीं मिलेगी

वर्तमान में पृथ्वी तथा प्राकृतिक संसाधनों के विनाशकारी जलवायु परिवर्तन की गति तथा उसके प्रभाव में गति की तीव्रता तेजी से महसूस की जाती रही है। इसका और कोई कारण ना होकर मानव की अवांछित गतिविधियां ही हैं। जिनमें मूलतः वन का विनिष्टिकरण, जीवाश्म ईंधन का ताबड़तोड़ प्रयोग, नई कृषि नीति तथा पद्धति की तीव्रता से होते हुए उद्योगों की …

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लेख@ सिक्ख और हिन्दुओं का प्रमुख त्योहार वैशाखी

भारत वासियों द्वारा वैसे तो सारा साल कोई ना कोई त्यौहार मनाया ही जाता है जैसे होली, दशहरा, दिवाली आदि! लेकिन इन त्योहारों में से बैसाखी का नाम लिए बिना त्योहारों की लिस्ट अधूरी ही रह जाएगी। यह मुख्य तौर पर हिंदुओं और सिखों द्वारा पंजाब,हरियाणा,दिल्ली, हिमाचल प्रदेश तथा देश के बहुत सारे भागों में जोश और खरोश के साथ …

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लेख@ सिनेमा को नई दिशा देता हरियाणा सिने फाउंडेशन

कोरोना काल के बाद सोशल मीडिया का प्रयोग बहुत तेजी से बढ़ा है। केवलमात्र मनोरंजन के उद्देश्य से शुरू हुआ यह प्रयोग आज एक बहुत बड़ा व्यवसायिक रूप धारण कर चुका है। क्या नेता,क्या अभिनेता, क्या गायक, क्या संगीतकार सब अपने आप को इसकी गिरफ्त से बचा नहीं पाये हैं। दुनिया भर के लोग इसके माध्यम से अपनी छुपी प्रतिभा …

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लेख @दूसरी औरत (लेख)

शब्द बहुत छोटा सा है परंतु किसी की जिंदगी को तहस-नहस करने के लिए पर्याप्त है। माना हर रिश्ते की बुनियाद, भावनाएं ,अहसास, और मनोंदशा पर निर्भर होती है।परंतु इंसान और जानवर के बीच फर्क बनाने के लिए ही कुछ नियम कायदे कानूनों की व्यवस्था की गई है यह व्यवस्था आम नागरिकों के लिए नहीं अपितु उनके लिए की गई …

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लेख@प्राइवेट सिस्टम का खेल:आम आदमी की जेब पर हमला

भारत में शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी अधिकार आज निजी संस्थानों के लिए मुनाफे का जरिया बन चुके हैं। प्राइवेट स्कूल सुविधाओं की आड़ में अभिभावकों से मनमाने शुल्क वसूलते हैं—ड्रेस, किताबें, यूनिफॉर्म, कोचिंग—सब कुछ महँगा और अनिवार्य बना दिया गया है। वहीं, प्राइवेट हॉस्पिटल डर और भ्रम का माहौल बनाकर मरीजों से मोटी रकम वसूलते हैं। सामान्य बीमारी को …

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लेख @भारतीय साहित्य में समकालीन महिलाओं की आवाजें

भारतीय साहित्य में महिलाओं की आवाज विविध आख्यानों में योगदान करती है और सामाजिक मानदंडों को चुनौती देती है। भारत में महिलाओं के लेखन का विकास प्राचीन से समकालीन समय तक फैला हुआ है। यह यात्रा बदलती धारणाओं और महिलाओं के सशक्तिकरण को दर्शाती है।ऐतिहासिक पृष्ठभूमि प्राचीन साहित्य प्राचीन भारत में, महिला कवियों और विद्वानों ने उल्लेखनीय योगदान दिया। वेदों …

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लेख@ कोचिंग इंडस्ट्री की मनमानी:अभिभावकों और छात्रों के भविष्य से खिलवाड़

एलेन कैरियर इंस्टीट्यूटः हिसार प्रकरण पर एक सख्त सवालहिसार स्थित एलेन कैरियर इंस्टीट्यूट पर अभिभावकों ने आरोप लगाए हैं कि संस्थान ने उनके बच्चों का एक शैक्षणिक वर्ष बर्बाद कर दिया और अब जबरन फीस वसूली कर रहा है। यह घटना कोचिंग इंडस्ट्री की अनियंत्रित और मुनाफाखोर प्रवृत्ति को उजागर करती है। देश में कोचिंग संस्थानों पर कोई प्रभावी निगरानी …

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@महात्मा ज्योतिबा फुले जयंती पर विशेष आलेख @

ज्योतिबा फुले आज भी प्रासंगिक हैं क्योंकि…समाज का सुधार सिर्फ भाषणों से,बहस से नहीं होता बल्कि यह घर से शुरू होता है और इसका रास्ता शिक्षा से होकर गुजरता है,साथ ही आंदोलन से भी क्योंकि बिना शिक्षा के मनुष्य पशु समान है लेकिन शिक्षा उसे मानिए जो आपको समाज हित में काम करने के लिए प्रेरित करे,अन्याय के खिलाफ आवाज …

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लेख@ जब देश में वन की आवश्यकता नहीं है तो फिर विभाग की भी आवश्यकता क्यों है?

जब वन ही नहीं रहेगा तो राष्ट्रीय पक्षी व पशु की जरूरत क्या…उन्हें क्यों संरक्षण देने की जरूर व्यर्थ की जरूरत के लिए जंगल का विनाश सरकार की जरूरत?देश का राष्ट्रीय पशु बाघ राष्ट्रीय पक्षी मोर है पर उनके रहने के लिए जंगल कहां है?छत्तीसगढ़ के बाद अब तेलंगाना में 400 एकड़ वन भूमि नष्ट की जा रही है?वन व …

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लेख@ मीडिया,स्त्री और सनसनी:क्या हम न्याय कर पा रहे हैं?

धोखे की खबरें बिकती हैं, लेकिन विश्वास की कहानियाँ दबा दी जाती हैं…क्या हम संतुलन भूल गए हैं?मीडिया में स्ति्रयों की छवि और उससे जुड़ी सनसनीखेज रिपोर्टिंग ने आज गंभीर सवाल पैदा कर दिये है। कुछ घटनाओं में स्ति्रयों द्वारा किए गए अपराधों को मीडिया बढ़ा-चढ़ाकर दिखाता है, जिससे पूरे स्त्री वर्ग की छवि पर नकारात्मक असर पड़ता है। समाज …

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