सांपों के प्रति समर्पण की सांस्कृतिक परंपरा है नाग पंचमी श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी को प्रतिवर्ष देशभर में नाग पंचमी का त्योहार मनाया जाता है, जो इस वर्ष 29 जुलाई को मनाया जा रहा है। हालांकि कुछ राज्यों में चैत्र तथा भाद्रपद शुक्ल पंचमी के दिन भी ‘नाग पंचमी’ मनाई जाती है। ज्योतिष के अनुसार पंचमी तिथि …
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लेख@ मोदीजी की लोकप्रियता नहीं है कम
17 सितम्बर 25 के दिन का प्रधान मंत्री मोदीजी का मीडिया में खुब खबर चल रही है कि वो 75 साल के हो जायेंगे और क़ोई और होगा इधर ऐ भी चर्चा में है उपराष्ट्रपति किसी दबाब में इस्तीफा दिए हैं और इसमें प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदीजी को भी घसीटा जा रहा और बहुत से यू टुबर ने इतना गन्दा …
Read More »लेख@ क्या मंत्री-विधायकों के पास इतना समय है…कि वह व्यस्ततम समय के बीच अन्य कार्यों के लिए समय निकाल सकते हैं?
काम करने वालों के पास समय का अभाव है,जो नौकरी करते हैं वह भी अपने घर के कार्यों के लिए समय निकाल नहीं पाते हैं क्योंकि शरीर में जो ऊर्जा बनती है वह भी ऊर्जा खत्म होती है और खत्म ऊर्जा के साथ शायद ही कोई अन्य काम हो पाए,जब नौकरी पेशे या व्यापार से जुड़े हुए लोग मूल काम …
Read More »लेख@क्या मंत्री विधायकों के पास इतना समय है की वह व्यस्ततम समय के बीच अन्य कार्यों के लिए समय निकाल सकते हैं?
लेख BY रवि सिंह:- काम करने वालों के पास समय का आभाव है, जो नौकरी करते हैं वह भी अपने घर के कार्यों के लिए समय निकाल नहीं पाते हैं क्योंकि शरीर में जो ऊर्जा बनती है वह भी ऊर्जा खत्म होती है और खत्म ऊर्जा के साथ शायद ही कोई अन्य काम हो पाए, जब नौकरी पेशे या व्यापार …
Read More »लेख@ कथावाचक श्री अनिरुध्दाचार्य के बयान पर राजनीतिक ड्रामा क्यों?
आज के कलयुग में सच बोलना और लिखना दोनों गुनाह हो गया है। श्री अनिरुध्दाचार्य जी ने मथुरा में कथा कहने के दौरान देश के भविष्य के बारे में चिंता करते हुए समसामयिक घटना पर एक टिप्पणी की। जिसे लेकर अवसरवादी व उनके विरोधियों को एक मौका मिल गया है,आचार्य जी के बातों को तोड़-मरोड़कर उस पर उंगली उठाने का।आचार्य …
Read More »लेख@ भारत डॉक्टरों और नर्सों का निर्यात कर रहा है जबकि देश को उनकी भी जरूरत है
देशों में स्वास्थ्य कार्यबल की मांग और आपूर्ति एक कठिन समस्या है,अधिकांश देशों में पर्याप्त संख्या में डॉक्टरों और नर्सों की कमी है और 2030 तक 18 मिलियन स्वास्थ्य श्रमिकों की अनुमानित वैश्विक कमी है। स्वास्थ्य कार्यकर्ता देशों में प्रवास करते हैं, प्रवाह आमतौर पर ग्लोबल साउथ के देशों से उत्तर में रहने वालों के लिए होता है। जिन देशों …
Read More »लेख@ आखिर कब समझेंगे हम प्रकृति की मूक भाषा?
पेड़-पौधों की अनेक प्रजातियों के अलावा बिगड़ते पर्यावरणीय संतुलन और मौसम चक्र में आते बदलाव के कारण जीव-जंतुओं की अनेक प्रजातियों के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। इन प्रजातियों के लुप्त होने का सीधा असर समस्त मानव सभ्यता पर पड़ना अवश्वम्भावी है। प्रदूषित हो रहे पर्यावरण के आज जो भयावह खतरे हमारे सामने आ रहे हैं,उनसे शायद …
Read More »लेख @ गिरती छतें…गिरती ज़मीर…
झालावाड़ हादसा और हमारी व्यवस्था की नींव में छुपी मौतराजस्थान के झालावाड़ जिले में एक सरकारी स्कूल की छत गिर गई। और उसके नीचे दबकर कुछ मासूम टाबर वो बच्चे जिनकी आँखों में सपने थे, जिनकी किताबों में भविष्य था हमेशा के लिए ख़ामोश हो गए। किसी ने कहा, ये एक हादसा था। मगर जिन लोगों की जिंदगियाँ मिट्टी में …
Read More »लेख@ सावन की प्रकृति का त्योहार है तीज
तीज श्रावण शुक्ल पक्ष तृतीया को मनाई जाती है। इसलिए यह श्रावणी तीज के नाम से भी जानी जाती है। सौंदर्य,प्रेम के उत्सव और आस्था के इस व्रत का महिलाओं के लिए बड़ा महत्व है, विशेष रूप से नव विवाहिताओं के लिए। यह त्योहार मुख्य रूप से उत्तर भारत (राजस्थान,मध्य प्रदेश, उत्तर पदेश, बिहार और झारखंड) में धूमधाम से मनाया …
Read More »कहानी@ लुच्चा सियार
एक बहुत बड़ा और सुंदर जंगल था। जंगल का राजा शेर बहुत ही समझदार और होशियार था। जंगल में कोई भी समस्या आती, वह किसी न किसी तरह उसका हल निकाल ही लेता। वह जंगल के सभी प्राणियों को खूब खुश रखता था। जगल के सभी प्राणी हिलमिल कर रहते थे। क्योंकि जंगल के राजा शेर को लड़ाई-झगड़ा पसंद नहीं …
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