
एक बहुत बड़ा और सुंदर जंगल था। जंगल का राजा शेर बहुत ही समझदार और होशियार था। जंगल में कोई भी समस्या आती, वह किसी न किसी तरह उसका हल निकाल ही लेता। वह जंगल के सभी प्राणियों को खूब खुश रखता था। जगल के सभी प्राणी हिलमिल कर रहते थे। क्योंकि जंगल के राजा शेर को लड़ाई-झगड़ा पसंद नहीं था। अगर किसी में लड़ाई-झगड़ा होता तो वह तुरंत समझौता करा देता था। राजा शेर की जंगल की इतनी अच्छी व्यवस्था लुच्चे सियार को जरा भी पसंद नहीं थी। क्योंकि सियार हमेशा दूसरों के बीच झगड़ा करा कर मनोरंजन करने के साथ अपना काम निकलता था। यही उसका स्वभाव था। वह कोई न कोई ऐसा काम करता था, जिससे जंगल में अव्यवस्था फैल जाती थी। जब वह सफल नहीं हो पाता,निराश हो जाता।
एक दिन सियार जा रहा था तभी रास्ते में रीछ मिल गया। सियार ने पूछा, कैसे हो रीछ भाई? दयालु राजा शेर के राज में सभी मजे में ही होंगे न। रीछ ने कहा।
यह सुन कर सियार ने जीभ के नीचे दांत दबा कर झूठमूठ हंसते हुए कहा, सही बात है रीछ भाई।
सियार ने रीछ को परेशान करने का विचार बना लिया और चुपके से रीछ के घर में घुस कर घर में रखा सारा शहद चुरा लिया। इसके बाद दबे पांव बंदर के घर में घुस कर वह सारा शहद रख दिया और तमाशा देखने के लिए रीछ के घर के सामने बैठ गया। थोड़ी देर बाद शहद ढ़ूंढ़ते हुए रीछ घर के बाहर आया तो सियार ने पूछा, क्या ढ़ूंढ़ रहे हो रीछ भाई? रीछ ने अपना शहद गायब होने की बात की तो सियार ने कहा, वह शहद तुम्हारी थी? मैंने तो अभी थोड़ी देर पहले बंदर को शहद ले जाते हुए देखा था।
रीछ को गुस्सा तो आया, दयालु राजा से इतनी छोटी बात कहने से उन्हें दुख होगा,यह सोच कर वह अपना गुस्सा पी गया। इसके बाद कुछ कहे बगैर अपने घर में चला गया। सियार को झगड़ा करा कर मजा लेना था, पर यहां तो सब शांति से निपट गया।
दूसरी ओर बंदर ने अपने घर में शहद देखा तो वह हैरान रह गया। उसकी समझ में नहीं आया कि उसके घर में शहद कहां से आया। उसने सोचा कि रीछ को शहद बहुत पसंद है। यह शहद उसे दे आऊं। वह रीछ के घर जा कर बोला,रीछ भाई क्या कर रहे हो? यह देखो, तुम्हारे लिए शहद लेकर आया हूं। पता नहीं कौन यह शहद मेरे घर रख गया है? पर शहद आप को बहुत अच्छा लगता है, इसलिए आप के लिए ले आया हूं। बंदर की बात सुन कर रीछ समझ गया कि यह सब सियार की चाल है। परंतु झगड़ा न हो, इसलिए उसने कुछ नहीं कहा। कुछ दिन बीत गए। सियार को यह शांति अच्छी नही लग रही थी। उसने फिर किसी को परेशान करने का विचार किया। इस बार उसने बंदर को परेशान का मन बनाया। उसने देखा कि रीछ बंदर के घर कुछ लेने गया है। वह चुपचाप बंदर के घर के बाहर जा कर खड़ा हो गया और कान लगा कर सुनने लगा कि अंदर दोनों क्या बातें कर रहे हैं। उसने सुना कि दोनों के बीच किसी जादुई पत्थर को लेकर बात हो रही है।
उन दोनों की बात सुन कर सियार के कान खड़े हो गए। वह सोचने लगा कि यह जादुई पत्थर क्या है? वह फिर कान लगा कर बातें सुनने लगा। रीछ को दो चमकते पत्थर दे कर बंदर ने कहा, यह लो जादुई पत्थर,पर ध्यान रखना दूसरा कुछ न जल जाए।
उन पत्थरों के बारे में जानने के लिए सियार रीछ के पीछे-पीछे चल पड़ा। उसने देखा कि रीछ उन दोनों पत्थरों को रगड़ कर आग जला रहा है। सियार की समझ में आ गया कि बंदर ने जो जंगल की अच्छी तरह देखभाल की थी, उसके बदले में राजा ने उसे इनाम में दिया था। यह वही जादुई पत्थर है। जिससे आग प्रकट की जा सकती है। जंगल में जिस किसी को आग की जरूरत पड़ती है,यह पत्थर ले जा कर आग जलाता है। बंदर सभी की मदद करता था। कुछ दिनों बाद सियार ने फिर कोई तरकीब सोची। एक दिन बंदर और रीछ के बीच किसी छोटी सी बात को ले कर मनमुटाव हो गया। सियार ने दोनों की बातें सुन ली थीं। इसके बाद सियार दोनों के बीच लड़ाई कराने की योजना बनाने लगा।
एक दिन सियार ने बंदर के घर में घुस कर वह जादुई पत्थर चोरी कर लिया। इसके बाद मौका मिलते ही सियार ने रीछ के घर में आग लगा दी। आग लगा कर सियार ने वह जादुई पत्थर फिर से बंदर के घर में रख दिया। अपने दोस्त का घर अचानक जलता देख कर बंदर पानी लाने के लिए नदी की ओर भागा। रीछ ने उसे भागते देखा तो अपने घर की ओर भागा। घर आ कर देखा तो उसका घर जल रहा था। रीछ को लगा कि यह आग निश्चित बंदर ने ही लगाई है। सभी प्राणियों ने मिल कर रीछ के जल रहे घर पर पानी डाल कर आग बुझाई। इसके बाद रीछ ने सभी का आभार माना। मौका मिलते ही सियार रीछ के कान भरने लगा, तुम्हें पता है,यह किस की कारस्तानी है? मैंने अपनी आंखों से बंदर को आग लगाते देखा है। रीछ गुस्से में लालपीला हो गया। उसने उसी गुस्से में बंदर से कहा, मैं तो तुम्हें अपना सच्चा दोस्त मानता था और तुम ने मेरे ही घर में आग लगा दी? बंदर ने रीछ को समझाने की बहुत कोशिश की, पर रीछ ने उसकी बात पर विश्वास नहीं किया। दोनों के बीच अनबन हो गई। यह देख कर सियार खुश हो गया। उसकी युक्ति कामयाब हो गई थी। तभी जंगल का राजा शेर वहां आ गया। शेर को देख कर सियार डर गया। उसने वहां से भागने की कोशिश की, पर शेर ने उसे पकड़ कर कहा,कहां भाग रहा है? तू ने जो किया है, मुझे सब पता है। तू ने सोचा था कि क्या तेरे काले कामों का मुझे पता नहीं चलेगा। चल,अब तू खुद ही सब बता दे, वरना…यह कह कर शेर गरजा तो सियार थरथर कांपने लगा। उसने स्वीकार कर लिया कि यह आग उसी ने लगाई थी। सच्चाई जान कर सभी प्राणियों को सियार पर बहुत गुस्सा आया। शेर ने कहा, अपने सस्ते मनोरंजन के लिए किसी का घर जला दिया जाता है क्या? तुम्हारे इस गंभीर अपराध के लिए तुम्हें एक साल की जेल की सजा दी जाती है।
रीछ और बंदर ने राजा शेर का आभार माना। उन्होंने पूछा कि उन्हें सियार के दुस्साहस का कैसे पता चला?
शेर ने कहा,मैं जंगल का राजा हूं। तुम सब की रक्षा करना मेरा फर्ज है। मेरे जासूस जंगल के कोनेकोने में हैं। इसलिए मुझे पलपल की जानकारी मिलती रहती है।
इतना कह कर राजा शेर ने रीछ को समझाया,दोस्त पर हमेशा भरोसा रखना चाहिए। कान का कच्चा नहीं होना चाहिए। दूसरों की बातों में आकर दोस्ती नहीं तोड़नी चाहिए।
राजा शेर का आभार मान कर रीछ ने बंदर से माफी मांगते हुए कहा, अब मैं कभी अपने सच्चे दोस्त पर अविश्वास नहीं करूंगा।
इसके बाद दोनों दोस्त मिल कर नया घर बनाने लगे। जंगल के अन्य प्राणियों ने भी रीछ का नया घर बनाने में मदद की। इस तरह जंगल में फिर से सुख और शांति आ गई।
वीरेंद्र बहादुर सिंह
नोएडा उत्तरप्रदेश
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