उगहे सूरज देव भेल भिनसरवा अरघ के रे बेरवा हो पूजन के रे बेरवा हो…
छठ घाटों पर उमड़ा जन सैलाब,सूर्य देव को प्रणाम करने उठे करोड़ो हांथ
- रवि सिंह-
बैकु΄ठपुर 11 नवम्बर 2021 (घटती-घटना)। कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचक जाए, होहिएँ बलम से सहईया, बहंगी लचकत जाए। छठ पूजा गीतों से गुंजा पूरा क्षेत्र,सूर्य उपासना का महापर्व छठ चार दिवसीय कठिन विधि विधान के पालन पश्चात आज उदीयमान सूर्य देव को अर्ध्य अर्पित कर सम्पन्न किया गया। चार दिवसीय छठ पूजा के लिए क्षेत्र में कई जगह सार्वजनिक नदी तालाबों में लोगों ने एक साथ सूर्य देव के अस्तांचल गामी व उदीयमान रूप को अर्ध्य अर्पित कर सुख समृद्धि व बेहतर स्वास्थ्य की कामना की। कोरिया जिले में भी छठ पर्व बड़े उत्साह से मनाया गया, कटकोना, पटना, पाण्डवपारा, क्षेत्र में छठ व्रती महिला पुरुषों ने गुरुवार को भोर के ठंडे पानी में खड़े होकर सूर्य देव की अराधना की और उदीमान सुर्य देव को जल व दुध से अर्ध्य देकर छठ घाट में प्रसाद वितरण के बाद अपना 36 घंटे को निर्जला उपवास समाप्त किया। घाट से घर जाने के बाद व्रतियों ने नियमानुसार पारन कर अपना उपवास समाप्त किया इसी के साथ यह महापर्व भी समाप्त हुआ।
छठ पूजा को लेकर घाटों की चहल पहल भी समाप्त हो गई। कटकोना के एसईसीएल, गोबरी जलाशय, पटना झुमरपारा तलाब में बने घाट पर व्रतधारी महिला व श्रद्धालुओ की बडी संख्या में भीड इकट्ठा हुई, व्रती महिलाओं सहित पुरुषों ने बुधवार को डुबते हुए सुर्य देव को व गुरुवार को उगते हुए सुर्यदेव को ठंडे पानी में खडे होकर सुर्योपासना करते हुए व पुत्र, पुत्री की दीर्घायु साथ ही बेहतर स्वास्थ्य की कामना,परिवार की मंगल कामना करते हुए हाथ में फलो से सजा सुप व दौरा लेकर सुर्यदेव को जल व दूध से अर्ध्य दिया।
रूनकी-झुनुकी बेटियों के करती है मां अर्ध्यदान
नारी सक्तिकरण का संदेश देता है लोक आस्था का माहपर्व छठ बेटा-बेटियों में कोई अंतर नहीं मानती है मातायें। लोक आस्था का महापर्व छठ सिर्फ पुत्र कामना के लिये ही नहीं बल्कि बेटियों के लिये भी किया जाता है। छठ के गीत में व्रती रूनकी-झुनुकी बेटियां, पंड़ा-पंडित्वा, दामाद हे छठि मईया के गीत गाते भगवान सूर्य से पुत्री की कामना करती है। छठ एक ऐसा व्रत है जहां सारे मिथक टूटते है पुरुष प्रधान समाज में जहां बेटे का कद ऊंचा माना गया है, वहां छठ व्रत इन मिथकों को तोड़ नारी सक्तिकरण का संदेश देता है। क्षेत्र में कई ऐसे छठ व्रती है जो सिर्फ अपनी बेटियों के लिये वर्षों से छठ व्रत करते आ रही है। व्रतीयों मानना है कि भगवान ने जो दिया है वही हमारे लिये सबकुछ है। बेटे-बेटियों में कोई अंतर नहीं है बस अंतर है सोच में।
किया गया दीपदान
इस मौके पर महिलाओं ने दीपदान भी किया। पानी की लहरों पर हिलोर लेते दीपक और टिमटिमाती रोशनी ने तालाबों को रंगीन बना दिया था। छठ पर्व पर ऐसा लग रहा था मानों पूर्वाचंल क्षेत्र यहां उतर आया हो। पूजा के दौरान सूपे में परंपरागत पकवान प्रसाद के रूप में रखा ही गया था साथ ही मौसमी फलों के साथ गन्ने को अनिवार्य रूप से पूजा में शामिल किया गया था। व्रति महिलाओं के सूपों पर चढ़ाया गया प्रसाद- छठ महापर्व में छट घाट पर सभी व्रती महिलाओं के सुप पर श्रद्धालुओं ने फल चढ़ा सूर्य देव की उपासना की और आर्शीवाद लेकर पुत्र एवं परिवार की मंगलकामना की।
पूजा के लिये घाट पड़ा छोटा
छठ¸ पर्व करने वालों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है यही वजह है कि पटना के झूमरपारा तालाब में बने छठ¸ घाट छोटा पड़ जा रहा है इस बार श्रद्धालुओं की संख्या इतनी अधिक थी कि खड़े होने की जगह नहीं थी। यहां तक कि व्रती महिलाओं के सुप-दौरा से ही सीढ़ी भर गया था यहां तक कि अर्ध्य देने के लिये व्रती महिलाओं तक परिवारजनों को दिक्कत का सामना करना पड़ा।
जिले में सभी जगह मना छठ महापर्व
कोरिया जिले में शहर से लेकर गांव तक छठ पर्व की धूम रही, चिरिमिरी, बैकुंठपुर, मनेंद्रगढ़, चरचा, खड़गवां, नागपुर, नई लेदरी, खोंगापानी, झगराखांड, भरतपुर में भी मनाया गया छठ महापर्व।
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