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बैकु΄ठपुर छत्तीसगढ़ में पुलिस परिवार संघ फिर आंदोलन की राह पर

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भाजपा सरकार के कार्यकाल में भी पुलिस परिवार संघ ने किया था आंदोलन,कांग्रेस ने विपक्ष में रहते हुए किया था सरकार में आने के बाद मांगो के निराकरण का वादा

  • रवि सिंह-
    बैकु΄ठपुर 11 नवम्बर 2021 (घटती-घटना)। पुलिस परिवार संघ छत्तीसगढ़ में फिर से आंदोलन की राह पर बढ़ चला है, 14 नवम्बर 2021 को पुलिस परिवार संघ के तत्वाधान में पुलिस कर्मियों की मुख्य मांगों के संबंध में ज्ञापन देने की तैयारी पुलिस कर्मियों के परिजन कर रहें हैं वहीं रायपुर पहुंचकर इस ज्ञापन कार्यक्रम को सफल बनाने पुलिस कर्मियों के परिजनों से भी लगातार रायपुर चलने की अपील जारी है। छत्तीसगढ़ पुलिस का बड़ा आंदोलन भाजपा सरकार में देखा गया था, जिसे देखते हुए कांग्रेस ने घोषणा पत्र में पुलिस कर्मियों की मांगों को पूरा करने का वादा किया था, पर वर्तमान सरकार 3 साल में भी पुलिस कर्मी की मांगे पूरी नहीं कर पाई है, जिसे लेकर एक बार फिर पुलिसकर्मी सक्रिय हो गए हैं, पुलिस कर्मियों की मांगों का नेतृत्व उज्जवल दीवान, संतोष कुमार व दीपक दास के द्वारा किया जा रहा है जो सभी पुलिसकर्मियों को उनका हक दिलाने के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं साथ ही पुलिस कर्मियों का सहयोग मांग रहे है पर विभाग के डर से साथ भी नहीं दे पते।
    पुलिस कर्मियों की मांगों को लेकर भाजपा के किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष अनिल जायसवाल ने कहा कि मौजूदा सरकार का ध्यान अपने घोषणा पत्रों पर कम सिर्फ सीएम की कुर्शी बचने पर ज्यादा है घोषणा पत्र के वादे आज तक अधूरे है अब पुरे होगे इस लेकर जनता इंतजार में है, पुलिसकर्मियों की 3 साल में कोई भी मांगे पूरी नहीं हुई है पुलिसकर्मी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन पर भी जा सकते हैं, मैं पुलिस कर्मियों के मांगों का समर्थन करता हूं और मैं चाहता हूं कि मौजूदा सरकार पुलिसकर्मियों को मांगों को तत्काल पूरा करें।
    पुलिस विभाग की तकलीफें जिला बल व सशस्त्र बल की मांगें- 2800 ग्रेड पे के हिसाब से आरक्षकों को वेतन दिया जाए। सभी भत्ते सातवें वेतनमान के हिसाब से दिया जाए। ड्यूटी तीन पालियों में की जाए। साप्ताहिक अवकाश नियमित दिया जाए बंद ना किया जाए। तृतीय श्रेणी पुलिस कर्मचारियों के मकान, शिक्षा व स्वास्थ्य की जिम्मेदारी सरकार, तृतीय श्रेणी पुलिस कर्मचारियों के संघ (यूनियन) का गठन तत्काल किया जाए। अधिकारियों के द्वारा जवानों का शोषण करना बंद किया जाए, वाहन भत्ता दिया जाए। आधुनिक युग के हिसाब से पुलिस रेग्युलेशन में तत्काल बदलाव किया जाए। पुलिस विभाग के सारे पद पदोन्नति परीक्षा के माध्यम से भरे जाएं बड़े पदों पर सीधी भर्ती बंद हो। 8 वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके सभी जवानों को तत्काल पदोन्नत किया जाए, किट पेटी बंद कर जवानों को नगदी रकम दिया जाए। नक्सली / आपराधिक मुठभेड़ या गस्त सर्चिंग के दौरान घायल जवानों को तत्काल पदोन्नती दिया जाए। पुरानी पेंशन प्रक्रिया की बहाली की जाए। रिस्पांस भत्ता समस्त जिला बल / सशस्त्र बल के जवानों को सामान रूप से दिया जाए क्षेत्र एवं स्थान आदि भेद भाव न किया जाए।
    सहायक आरक्षकों के लिए मांगे
    सहायक आरक्षकों को तत्काल आरक्षक पद पर संविलियन किया जाए, जब तक सहायक आरक्षकों का संविलियन नहीं होता सभी सहायक आरक्षकों को आरक्षकों के बराबर समान काम का समान वेतन दिया व सुविधाएं प्रदान की जाए,सहायक आरक्षकों को आरक्षकों के बराबर समस्त भत्ते दिए जाएं,सहायक आरक्षक व उनके परिजनों के शिक्षा व चिकित्सा का सम्पूर्ण खर्च सरकार द्वारा उठाया जाए, समस्त सहायक आरक्षकों को सम्पूर्ण सुविधा आरक्षकों जैसी प्रदान की जाए, शहीद सहायक आरक्षकों को शहीद आरक्षकों के बराबर सुविधाएं प्रदान की जाएं।
    नगर सैनिकों के लिए मांगे
    नगर सैनिकों के लिये भी निम्नानुसार मांगे ज्ञापन में शामिल किया गया है,नगर सैनिको को लेकर किये जा रहे मांगो में ज्ञापन में इस बात का उल्लेख किया गया है कि विधायक पाटन रहते हुए वर्तमान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने लेटर पैड में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह को पत्र लिखकर 2017 में नगर सैनिकों की मांगों का समर्थन किया गया था अब स्वयं मुख्यमंत्री बनने पश्चात वादा निभाएं, सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार नगर सैनिकों को वेतन प्रदान किया जाए, सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के परिपालन तक नगर सैनिकों को पुलिस आरक्षकों के बराबर समान काम का समान वेतन प्रदान किया जाए, नगर सेना के जवानों को शासकीय आवास आबंटित किया जाए, चिकित्सा व शिक्षा का व्यय सरकार वहन करे, शहिद नगर सैनिकों को शहीद आरक्षकों की तरह शहिद का दर्जा प्रदान किया जाए, महिला नगर सैनिकों को 180 दिवस के प्रसूति अवकाश की पात्रता प्रदान कि जाए।
    भाजपा शासनकाल में हुआ था पहला आंदोलन
    पुलिस कर्मियों के परिजनों द्वारा पहला आंदोलन भाजपा शासन काल मे किया गया था, जिसमें कई पुलिस कर्मियों पर कार्यवाही की गाज भी गिरी थी वहीं आंदोलन में सभी पुलिस कर्मियों के परिजनों ने बढ़चढ़कर हिस्सा भी लिया था।
    कांग्रेस ने किया था आंदोलन के दौरान वादा
    पुलिस परिजनों के प्रथम आंदोलन में जो भाजपा शासनकाल में हुआ था के दौरान तत्कालीन प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने पुलीस कर्मियों के परिजनों के आंदोलन को समर्थन दिया था वहीं चुनाव पूर्व जन घोषणा पत्र में पुलिस कर्मियों के।लिए कई वादे भी कांग्रेस ने किए थे, अब जब सरकार कांग्रेस की है और पुलिस कर्मियों के परिजन पुनः आंदोलन की राह पर हैं इससे स्प्ष्ट है कि घोषणा पर अमल नहीं हुआ वहीं तब विपक्ष की भूमिका वाली कांग्रेस सत्ता में काबिज होते ही अपना ही समर्थन भूल गई।

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