-ओंकार पाण्डेय-
सूरजपुर , 04 जुलाई 2022(घटती-घटना)। जर्जर भवनों में स्कूल संचालित न करने का फरमान तो जारी कर दिया पर वैकल्पिक व्यवस्था करना भूल जाने से कई सरकारी स्कूल बंद कर दिए जाने से बच्चों का भविष्य अंधकारमय होने को है।जिला शिक्षा अधिकारी ने जिले के तमाम बीईओ,प्रधान पाठकों को पत्र जारी कर कहा है कि जो भी स्कूल जर्जर भवनों में संचालित है वहाँ वैकल्पिक व्यवस्था न होने स्कूलों का संचालन बंद करें अन्यथा किसी तरह के हादसे के लिए वे स्वयं जिम्मेदार होंगे।डीईओ ने फरमान तो जारी कर दिया पर वैकल्पिक व्यवस्था कैसे कहां से करना है इसका कोई मार्गदर्शन नही दिया गया है।जिससे जिले में कई स्कूलों का संचालन बंद कर दिया गया है।ऐसा ही एक मामला रामानुजनगर ब्लॉक के परशुरामपुर के पंडोपारा के प्राथमिक शाला का सामने आया है।जहां बेहद जर्जर भवन में स्कूल का संचालन हो रहा था जिसे 30 जून से बंद कर दिया गया है।यहां कोई वैकल्पिक व्यवस्था न होने से स्कूल कब से शुरू होगा इसे लेकर संशय बना हुआ है साथ ही बच्चों का भविष्य भी अंधकारमय हो गया है।दूसरी ओर यह भी स्थिति है कि भवन की वैकल्पिक व्यवस्था हो भी जाये तो किराया देने में आनाकानी की जाती है ऐसा मामला ओड़गी ब्लाक में सामने आ चुका है जहाँ मकान मालिक ने किराया न देने से भवन खाली करा लिया तो स्कूल पेड़ के नीचे लगाना पड़ रहा है।ऐसे में जिले में शिक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे जैसी स्थिति है और यह हालत प्रदेश के शिक्षा मंत्री के गृह जिले का हाल है.।.
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