जशपुरनगर 19 जून 2022(घटती घटना)। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देशानुसार राज्य में अनुपयोगी एवं ओपन बोरवेल को सुरक्षा की दृष्टिकोण से तत्काल ढकवाने के निर्देश सभी कलेक्टरों को दिए गए हैं। इसी कड़ी में कलेक्टर श्री रितेश कुमार अग्रवाल ने जिले के अनुपयोगी बोरवेल, ग्रेबल पैक बोरवेल सामान्य बोरवेल, नवीन नलकूप खनन, रिंगवेल और ओपन वेल की वजह से होने वाली दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए अनुपयोगी बोरवेल को तत्काल बंद करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
हेल्प लाइन नंबर 9340125207 में संपर्क किया जा सकता है
कलेक्टर ने आम लोगों से अपील करते हुए कहा है कि अनुपयोगी बोरवेल्स को किसी भी स्थिति में खुला न छोड़ा जाए। बोरवेल फेल होने की स्थिति में बोर होल अथवा गड्ढे को तत्काल मिट्टी रेत पत्थर से भरकर सतह को पूर्व की भांति समतल और ठोस किया जाए। उन्होंने अनुपयोगी बोरवेल की वजह से होने वाली दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए उच्चतम न्यायालय द्वारा वर्ष 2009 में रिट पिटिशन क्रमांक 09 के संबंध में पारित आदेश का कठोरतापूर्वक पालन करने को भी कहा है। साथ ही आम लोगों को इसकी सूचना तत्काल जिला प्रशासन के दिए गए निःशुल्क हेल्प नम्बर में भी देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि आम जनता की सहयोग के लिए नम्बर जारी किया गया है। इनमें लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन अभियंता श्री व्ही के उरमालिया 9424150257, जिला नोडल अधिकारी श्री कमल प्रसाद कंवर सहायक अभियंता 9340125207, कलेक्टर कार्यालय और पुलिस अधीक्षक कार्यालय में भी खुले और अनुपयोगी ट्यूबवेल बोरवेल की सूचना दी जा सकती हैै। कलेक्टर ने कहा कि विगत दिवस जांजगीर-चांपा जिले में मालखरौदा विकासखंड के ग्राम पिहरीद में भी एक बालक के बोरवेल में गिरने की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि है कि भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो, इसलिए कोई भी बोर उपयोग हो रहा हो, अनुपयोगी हो चुका हो, निष्प्रयोज्य घोषित हो चुका हो, केसिंग सहित हो अथवा केसिंग निकाला जा चुका हो, किसी भी प्रयोजन के लिये भी हो, शासकीय बोर हो अथवा निजी या किसी भी निकाय संस्था का बोर हो, जिसका उपयोग पेयजल, सिंचाई, वाणिज्यिक या उद्योग के लिए किया जाता हो, सामान्यतः नलकूप खनन के दौरान कई बार भसकने वाले स्ट्रेटा प्राप्त होने से, सब-साइल जल दबाव अधिक होने से, बोल्डर प्राप्त होने से, टूल्स गिरने अथवा टूटने या अन्य कारणों से नलकूप खनन संभव नहीं हो पाता है, फलस्वरूप गड््ढा यथावत छोड़ दिया जाता है। उन्होंने कहा कि कई बार नलकूप खनन के दौरान विभिन्न कारणों से केसिंग डालने के पश्चात भी नलकूप खनन कार्य पूर्ण नहीं हो पाता है एवं केसिंग पाईप निकाल लिया जाता है। उपरोक्त दोनों ही स्थिति में अधूरे कार्य की वजह से निर्मित बोरहोल दुर्घटना का कारण बनता है। अतः ऐसी स्थिति में गड्ढे को मिट्टी, रेत, पत्थर या अन्य उचित सामग्री से भरा जाकर सतह को पूर्व की भाँति किया जाना सुनिश्चित किया जाये यह कार्यवाही कार्य स्थल से मशीन हटाये जाने के पूर्व अनिवार्यतः किया जाये। इसी तरह ग्रेवेल पैक नलकूप विभागीय मानदंडों के अनुसार 25 मीटर से अधिक कॉलेप्सिबल स्ट्रेटा प्राप्त होने पर ही ग्रेवेल पैक नलकूप मान्य किया जाता है। कई बार ग्रेवेल पैक नलकूप खनन के दौरान 25 मीटर से कम कोलेप्सिबल स्ट्रेटा प्राप्त होने के फलस्वरूप उस स्थल पर नलकूप खनन कार्य स्थगित कर अन्य स्थान पर कार्य प्रारंभ कर दिया जाता है। इस प्रक्रिया के फलस्वरूप निर्मित बोरवेल तुलनात्मक रूप से अधिक व्यास के होने के कारण दुर्घटना के कारण बन जाते हैं। अतः ऐसे बोर होल्स को स्थल से मशीन हटाने के पूर्व मिट्टी, रेत, पत्थर या अन्य उचित सामग्री से भरा जाकर सतह को पूर्व की भाँति समतल एवं ठोस किया जाना सुनिश्चित किया जाये।
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