
जिला पंचायत सीईओ ने दिए जांच के आदेश, खड़गवां में स्व-सहायता समूहों को बांटे गए ऋण की खुलेगी परत-दर-परत फाइल
प्रस्ताव से बैंक खाते तक होगी पड़ताल,समूह की महिलाओं से भी लिया जा सकता है बयान,अब जांच की निष्पक्षता पर टिकी निगाहें…
-राजेन्द्र शर्मा-
खड़गवां,22 अगस्त 2026 (घटती-घटना)। ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से संचालित आजीविका मिशन‘बिहान’में स्व-सहायता समूहों को वितरित किए गए ऋण को लेकर उठे सवालों ने अब प्रशासनिक स्तर पर गंभीर रूप ले लिया है,खबरों और शिकायतों के बाद जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने जांच के निर्देश दिए हैं,आदेश के बाद बिहान योजना से जुड़े अधिकारियों,कर्मचारियों, क्लस्टर स्तर के पदाधिकारियों और मैदानी अमले में हलचल तेज हो गई है। मामला केवल ऋण वितरण के आंकड़ों का नहीं है,असली सवाल यह है कि जिन स्व-सहायता समूहों के नाम पर ऋण स्वीकृत और वितरित दिखाया गया,क्या वास्तव में वही समूह उस राशि के लाभार्थी हैं? क्या समूह की महिला सदस्यों को पूरी राशि की जानकारी थी? क्या बैंक खाते में पहुंची राशि का इस्तेमाल उसी उद्देश्य के लिए हुआ,जिसके लिए ऋण स्वीकृत किया गया था? और सबसे अहम—कहीं ऐसा तो नहीं कि कागजों में ऋण वितरण पूरा दिखा दिया गया हो,जबकि जमीनी स्तर पर तस्वीर कुछ और हो? अब जिला पंचायत सीईओ के जांच आदेश के बाद इन सवालों के जवाब तलाशने की प्रक्रिया शुरू होनी है।
खबर का असर… अब प्रशासन ने खोली जांच की राह
खड़गवां विकासखंड में बिहान योजना के तहत विभिन्न क्लस्टरों,ग्राम संगठनों और स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को बैंक लिंकेज और ऋण जैसी वित्तीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं,योजना का मूल उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ना, छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए पूंजी उपलब्ध कराना और ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाना है, ऐसे में यदि इसी योजना के तहत वितरित ऋण में किसी भी स्तर पर अनियमितता होती है तो उसका सीधा असर उन महिलाओं पर पड़ता है, जिनके नाम पर योजना संचालित की जा रही है, यही कारण है कि जांच के आदेश को महज एक सामान्य विभागीय कार्रवाई मानना पर्याप्त नहीं होगा। यदि जांच को वास्तव में निष्पक्ष और दस्तावेज आधारित तरीके से किया जाता है, तो खड़गवां में बिहान योजना के ऋण वितरण की पूरी प्रक्रिया की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है।कागजों में किसके नाम पर कितना लोन?
जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यही होगा कि अलग-अलग क्लस्टर और ग्राम संगठन के अंतर्गत कितने स्व-सहायता समूहों को ऋण दिया गया और प्रत्येक समूह के नाम पर कितनी राशि स्वीकृत हुई,इसके लिए समूहवार सूची तैयार कर उसका बैंक रिकॉर्ड से मिलान किया जाना जरूरी होगा, जिस समूह के नाम पर ऋण स्वीकृत हुआ,उसके प्रस्ताव से लेकर बैंक खाते में राशि आने तक प्रत्येक चरण की जांच की जा सकती है,जांच में यह भी देखा जा सकता है कि ऋण के लिए समूह की बैठक कब हुई, बैठक में कितनी महिलाएं मौजूद थीं,प्रस्ताव किसने तैयार किया,प्रस्ताव पर किसके हस्ताक्षर हैं और बैंक को भेजे गए दस्तावेजों में समूह की वास्तविक स्थिति क्या थी,अगर इन दस्तावेजों में कहीं अंतर मिलता है तो मामला केवल लापरवाही तक सीमित नहीं रहेगा।
‘क्लस्टर’ और ‘ग्राम संगठन’ की भूमिका भी जांच के दायरे में आए
बिहान योजना में स्व-सहायता समूहों के ऊपर ग्राम संगठन और क्लस्टर स्तर की संरचना महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, ऐसे में जांच केवल अंतिम लाभार्थी समूह तक सीमित रहने के बजाय उस पूरी व्यवस्था की भी पड़ताल कर सकती है,जिसके माध्यम से ऋण प्रस्ताव आगे बढ़ा, किस स्तर पर प्रस्ताव तैयार हुआ? किसने सत्यापन किया? किस अधिकारी या कर्मचारी ने दस्तावेजों की जांच की? बैंक तक प्रस्ताव भेजने की प्रक्रिया क्या रही? ऋण स्वीकृति के बाद निगरानी किसकी जिम्मेदारी थी? यदि किसी समूह की पात्रता के बावजूद ऋण नहीं मिला या अपात्र समूह को लाभ मिला, तो इसकी जिम्मेदारी भी तय की जानी चाहिए।
कहीं ‘कागजों का विकास’तो नहीं हुआ?
बिहान जैसी योजनाओं में सबसे बड़ा खतरा तब पैदा होता है जब योजना की सफलता का मूल्यांकन केवल कागजों पर उपलब्ध आंकड़ों से किया जाए,रजिस्टर में समूह सक्रिय है, बैठकें नियमित हैं, ऋण वितरण पूरा है और राशि का उपयोग भी दर्ज है…कागजों पर सब कुछ व्यवस्थित दिखाई दे सकता है, लेकिन यदि जमीनी स्तर पर समूह की महिलाओं से पूछा जाए और उन्हें अपने नाम पर स्वीकृत ऋण की जानकारी ही न हो,तो पूरा रिकॉर्ड सवालों के घेरे में आ सकता है,इसलिए इस जांच में सिर्फ फाइलों की धूल झाड़ने से काम नहीं चलेगा, फाइल से निकलकर गांव तक पहुंचना होगा।
बैंक रिकॉर्ड सबसे बड़ा आईना साबित हो सकता है…
ऋण वितरण की जांच में बैंक रिकॉर्ड महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, संबंधित समूहों के बैंक खातों में ऋण की राशि कब जमा हुई,कितनी जमा हुई और उसके बाद कितनी राशि निकाली गई—इन सभी बिंदुओं की जांच से वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है,साथ ही यह भी देखा जा सकता है कि ऋण राशि प्राप्त होने के बाद उसका उपयोग किस प्रकार किया गया, यदि योजना के उद्देश्य के विपरीत राशि का उपयोग हुआ है तो उसकी भी पड़ताल आवश्यक होगी,हालांकि बैंकिंग जानकारी की जांच संबंधित नियमों और अधिकृत प्रक्रिया के तहत ही की जानी होगी,लेकिन प्रशासनिक जांच में उपलब्ध वैधानिक दस्तावेजों के आधार पर इसका सत्यापन किया जा सकता है।
महिलाओं के नाम पर चलने वाली योजना में महिलाओं की आवाज सबसे जरूरी-बिहान योजना का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष महिला सशक्तिकरण है,स्व-सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को बचत,बैंकिंग,ऋण और स्वरोजगार से जोड़ने का उद्देश्य रखा गया है, इसलिए इस योजना में किसी भी वित्तीय अनियमितता की जांच करते समय सबसे पहले उन महिलाओं की आवाज सुनी जानी चाहिए,जिनके नाम पर पूरा ढांचा खड़ा किया गया है,यदि महिलाएं कहती हैं कि उन्हें पूरी राशि मिली और उन्होंने उसे योजना के अनुसार इस्तेमाल किया,तो यह जांच के लिए महत्वपूर्ण तथ्य होगा। वहीं यदि महिलाएं अपने नाम पर स्वीकृत ऋण से अनजान मिलती हैं,तो मामला गंभीर हो सकता है।
प्रस्ताव से बैंक खाते तक खंगाली जानी चाहिए पूरी कड़ी
बिहान योजना के ऋण वितरण की वास्तविक जांच के लिए केवल विभागीय रजिस्टर देखना पर्याप्त नहीं होगा,जांच की असली उपयोगिता तभी होगी जब कागजी रिकॉर्ड और बैंक रिकॉर्ड का मिलान कराया जाए,मसलन—समूह का प्रस्ताव ? ग्राम संगठन की अनुशंसा ? ऋण आवेदन ? स्वीकृति ? बैंक से राशि जारी ? समूह के खाते में राशि ? समूह द्वारा राशि का उपयोग इस पूरी कड़ी में कहीं भी अंतर या विसंगति मिलती है तो उसी स्तर पर जिम्मेदारी निर्धारित की जा सकती है,यदि कागजों में किसी समूह को पांच लाख रुपये का ऋण जारी दिखाया गया है,तो जांच में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बैंक खाते में वास्तव में कितनी राशि पहुंची,इसके बाद यह भी देखना होगा कि राशि निकालने या उपयोग करने की प्रक्रिया क्या रही,यही वह बिंदु है जहां कागजी आंकड़ों और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर सामने आ सकता है।
क्या महिलाओं को पता है उनके नाम पर कितना ऋण है?
जांच का सबसे मजबूत तरीका समूह की महिला सदस्यों से सीधे जानकारी लेना हो सकता है,यदि किसी समूह के नाम पर ऋण जारी हुआ है तो समूह की सदस्यों से पूछा जा सकता है कि उन्हें कितनी राशि के ऋण की जानकारी है,बैंक से कितनी राशि मिली? किस काम के लिए मिली? राशि किसने निकाली? समूह की बैठक में इसका निर्णय हुआ था या नहीं? ऋण की किस्त कौन जमा कर रहा है? इन सवालों के जवाब यदि बैंक रिकॉर्ड से मेल खाते हैं तो स्थिति स्पष्ट होगी। लेकिन यदि महिलाओं को ऋण की राशि की जानकारी ही नहीं है या उनके द्वारा बताई गई राशि और बैंक रिकॉर्ड में दर्ज राशि अलग-अलग है, तो मामला गंभीर हो सकता है,इसीलिए इस जांच में महिला हितग्राहियों के बयान सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकते हैं।
जांच सिर्फ ‘रिकॉर्ड सत्यापन’ बनकर न रह जाए…
जिला पंचायत सीईओ के आदेश के बाद अब सबसे बड़ा सवाल जांच की गुणवत्ता को लेकर है,अक्सर सरकारी योजनाओं में जांच के नाम पर वही रिकॉर्ड दोबारा देख लिया जाता है,जिसके आधार पर योजना का संचालन हुआ था। यदि उन्हीं दस्तावेजों को सही मानकर जांच पूरी कर दी गई तो जमीनी हकीकत सामने आना मुश्किल होगा,इस मामले में जांच की विश्वसनीयता तभी बढ़ेगी जब टीम…प्रत्येक संबंधित स्व-सहायता समूह का सत्यापन करे,समूह की महिला सदस्यों से सीधे बातचीत करे,ऋण आवेदन और स्वीकृति दस्तावेजों का मिलान करे,बैंक खाते में वास्तविक राशि पहुंचने की पुष्टि करे,राशि के उपयोग की जानकारी जुटाए,ग्राम संगठन और क्लस्टर स्तर के रिकॉर्ड की जांच करे,संबंधित कर्मचारियों एवं पदाधिकारियों की भूमिका तय करे,शिकायतों में बताए गए विशेष मामलों का स्थल सत्यापन करे,यदि जांच इस स्तर तक जाती है तो केवल खड़गवां ही नहीं,बल्कि बिहान योजना की कार्यप्रणाली को लेकर भी महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
अब सामने आएगा ‘बिहान’ का सच?
खड़गवां में ऋण वितरण को लेकर उठे सवालों ने अब प्रशासन को जांच की मेज तक ला दिया है,जांच आदेश जारी हो चुका है,अब इंतजार उस कार्रवाई का है जो कागज से निकलकर जमीन तक पहुंचती है,जांच टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वह पहले से तैयार रिकॉर्ड पर भरोसा करने के बजाय रिकॉर्ड की स्वतंत्र पुष्टि करे, क्योंकि यदि दस्तावेज सही हैं तो जांच के बाद योजना की विश्वसनीयता और मजबूत होगी,लेकिन यदि दस्तावेजों और जमीनी हकीकत में अंतर मिलता है तो फिर यह पता लगाना जरूरी होगा कि अंतर कैसे पैदा हुआ।
रिपोर्ट पर टिकी नजर,कार्रवाई हुई तो खुलेगा बड़ा खेल…
फिलहाल प्रशासनिक जांच शुरू होने के बाद बिहान योजना से जुड़े लोगों की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिक गई हैं,क्या जांच में केवल कुछ तकनीकी खामियां सामने आएंगी या ऋण वितरण की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं भी मिलेंगी,यह आने वाला समय बताएगा,सबसे महत्वपूर्ण यह होगा कि जांच रिपोर्ट में केवल यह न लिखा जाए कि ‘रिकॉर्ड की जांच की गई और सब कुछ ठीक पाया गया’, बल्कि यदि शिकायतें गंभीर हैं तो यह स्पष्ट किया जाए कि कितने समूहों का सत्यापन हुआ,कितने बैंक खातों की जांच की गई,कितनी महिलाओं से बयान लिए गए और किन दस्तावेजों का मिलान किया गया,क्योंकि बिहान योजना में असली सवाल सिर्फ यह नहीं है कि लोन कितना बांटा गया, असली सवाल यह है कि लोन किसे मिला,कितना मिला, किसके खाते में पहुंचा और उसका लाभ वास्तव में किसे मिला,अब जिला पंचायत सीईओ के जांच आदेश के बाद यही सवाल प्रशासन के सामने हैं,यदि जांच ईमानदारी से इन सवालों के जवाब तलाशती है तो खड़गवां में बिहान योजना के ऋण वितरण की पूरी तस्वीर सामने आ सकती है,और यदि कहीं गड़बड़ी हुई है तो यह भी तय होना चाहिए कि सरकारी योजना की राशि और ग्रामीण महिलाओं के अधिकार से खिलवाड़ के लिए जिम्मेदार कौन है,फिलहाल फाइल खुल चुकी है…अब देखना यह है कि जांच की कलम कितनी दूर तक जाती है।
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur