भवन हटाने के राज्य शासन और नगर निगम के आदेश निरस्त,वर्षों से ध्वस्तीकरण की आशंका में रह रहे थे परिवार
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,22 अगस्त 2026 (घटती-घटना)। शहर के खरसिया रोड स्थित कुंडला वसुंधरा सिटी के 110 भवन स्वामियों को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। वर्षों से मकान हटाए जाने की आशंका के बीच रह रहे परिवारों की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य शासन के 4 जुलाई 2012 और नगर पालिक निगम अंबिकापुर के 7 दिसंबर 2016 के आदेश को निरस्त कर दिया है। 20 अगस्त को दिए फैसले के बाद प्रभावित परिवारों ने राहत की सांस ली है। मामला रिट याचिका क्रमांक 2856/2017,कृष्णानंद सिंह एवं अन्य विरुद्ध छत्तीसगढ़ शासन एवं अन्य से संबंधित है। याचिकाकर्ताओं ने दोनों प्रशासनिक आदेशों को चुनौती दी थी। शनिवार को होटल मयूरा में आयोजित प्रेस वार्ता में याचिकाकर्ता कृष्णानंद सिंह और अधिवक्ता संतोष सिंह ने फैसले की जानकारी दी। याचिकाकर्ताओं के अनुसार भवन निर्माण की मूल स्वीकृति के बाद 1 फरवरी 2011 को नवीन अनुमति के लिए आवेदन किया गया था। इसके बाद नगर निगम ने 3 अगस्त 2011 को लंबित आवेदन और निर्माण की स्थिति को देखते हुए पूर्णता के चरण में पहुंच चुके भवनों को निर्माण पूरा करने की अनुमति दी थी। करीब 140 भवनों के पूर्णता प्रमाण-पत्र से संबंधित कार्रवाई भी निगम के रिकॉर्ड में मौजूद थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि इन तथ्यों पर समुचित विचार किए बिना भवन हटाने की कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।
प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन
याचिकाकर्ता कृष्णानंद सिंह के अनुसार हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद पाया कि प्रशासनिक अधिकारियों ने उपलब्ध महत्वपूर्ण तथ्यों पर उचित विचार नहीं किया। प्रभावित लोगों को अपना पक्ष रखने के लिए प्रभावी सुनवाई का पर्याप्त अवसर भी नहीं दिया गया। इसी आधार पर न्यायालय ने राज्य शासन के 2012 के आदेश को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन से प्रभावित माना। इस आदेश के आधार पर नगर निगम द्वारा 7 दिसंबर 2016 को जारी भवन हटाने का आदेश भी हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया।
पार्षद की भूमिका
पर भी उठाए सवाल
प्रेस वार्ता में याचिकाकर्ताओं ने पार्षद आलोक दुबे की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार वर्ष 2015 में आलोक दुबे ने रिट याचिका दायर कर वर्ष 2012 के भवन हटाने संबंधी आदेश का पालन कराने की मांग की थी। इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई आगे बढ़ी और 7 दिसंबर 2016 को 110 भवन स्वामियों के खिलाफ निर्माण हटाने का आदेश जारी हुआ।
2012 से चला आ
रहा था विवाद
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि यह मामला केवल प्रशासनिक आदेशों की कानूनी लड़ाई नहीं था, बल्कि 110 परिवारों के आशियाने से जुड़ा था। वर्ष 2012 से चल रहे विवाद के कारण परिवारों पर लगातार मकान हटाए जाने की आशंका बनी हुई थी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रभावित परिवारों ने इसे वर्षों की लड़ाई के बाद मिली बड़ी न्यायिक राहत बताया है।
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