Breaking News

अम्बिकापुर @ आदिवासी डॉक्टर दंपती ने लगाया 65 लाख की कथित वित्तीय धोखाधड़ी,जातिगत अपमान और धमकी का आरोप

Share

  • शिकायत में 50 लाख रुपये और हर माह 5 लाख रुपये की कथित मांग का सनसनीखेज दावा…ऑडियो सीडी संलग्न करने की बात,आईजी और आजाक थाने से एफआईआर की मांग
  • केयर हॉस्पिटल विवाद ने पकड़ा तूल : डॉक्टर दंपती का आरोप…पहले भरोसा जीता,फिर अस्पताल के वित्तीय हिसाब-किताब में कथित गड़बड़ी,विरोध किया तो जातिसूचक गालियां और धमकी

-संवाददाता-
अम्बिकापुर,22 अगस्त 2026 (घटती-घटना)।
शहर के चौपड़ापारा स्थित केयर हॉस्पिटल से जुड़ा विवाद अब गंभीर आरोपों के साथ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच गया है। अनुसूचित जनजाति वर्ग से आने वाली डॉक्टर डॉ. दीपिका टोप्पो ने पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज तथा आजाक थाना अंबिकापुर में शिकायत आवेदन देकर दो व्यक्तियों के खिलाफ कथित तौर पर 65 लाख रुपये की वित्तीय धोखाधड़ी,जातिगत अपमान,अभद्र गाली-गलौज,मोबाइल छीनकर पटकने,गोली मारने की धमकी तथा अस्पताल संचालित करने के एवज में कथित रूप से 50 लाख रुपये और प्रतिमाह 5 लाख रुपये की मांग किए जाने के आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ता ने मामले में अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम सहित अन्य उपयुक्त धाराओं के तहत प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है। शिकायत के साथ कथित बातचीत की ऑडियो सीडी भी संलग्न किए जाने का उल्लेख किया गया है। हालांकि,आवेदन में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और पुलिस जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट होगी। समाचार में नामित व्यक्तियों का पक्ष भी सामने आना बाकी है।
दो साल पहले अस्पताल पहुंचे, फार्मासिस्ट बताकर काम करने का आरोप
डॉ. दीपिका टोप्पो द्वारा दिए गए आवेदन के अनुसार,करीब दो वर्ष पूर्व अनावेदक क्रमांक-1 सुशील कुमार राय,निवासी हॉलीक्रॉस रोड अंबिकापुर,केयर हॉस्पिटल चौपड़ापारा में आया था। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सुशील कुमार राय ने स्वयं को फार्मासिस्ट बताते हुए अस्पताल में कार्य करना शुरू किया और धीरे-धीरे अस्पताल के वित्तीय लेखा-जोखा सहित अन्य कार्यों में भी विश्वास हासिल कर लिया। डॉक्टर दंपती का आरोप है कि इसी दौरान अस्पताल के खाते और वित्तीय दस्तावेजों से संबंधित कामकाज उसके भरोसे में आने लगा। बाद में अस्पताल के वित्तीय लेन-देन की जांच करने पर कथित रूप से करीब 65 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता/धोखाधड़ी का पता चलने का दावा शिकायत में किया गया है।
3 जुलाई को दस्तावेज और पासबुक मांगी तो विवाद का आरोप
शिकायत के अनुसार,जब 3 जुलाई 2026 को डॉ. दीपिका टोप्पो ने अस्पताल प्रबंधन से संबंधित दस्तावेज,पासबुक तथा अन्य आवश्यक रिकॉर्ड सुशील कुमार राय से मांगे, तब कथित रूप से विवाद की स्थिति निर्मित हुई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि सुशील कुमार राय ने यह जानते हुए कि वह अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिला हैं,कथित रूप से ऊंची आवाज में जातिसूचक एवं अत्यंत अभद्र भाषा का प्रयोग किया। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि उन्हें कथित रूप से ‘आदिवासी’ कहकर अपमानित किया गया तथा यह कहा गया कि वे अस्पताल के हिसाब-किताब के बारे में पूछने वाली कौन होती हैं। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि अस्पताल चलाने में अपनी ताकत और प्रभाव का हवाला देते हुए डॉक्टर दंपती को अस्पताल नहीं चलाने देने और मजदूरी-खेती करने की बात कही गई।
कोतवाली से लौटते समय कथित जातिगत अपमान और धमकी का आरोप : शिकायत में एक और गंभीर घटना का उल्लेख किया गया है। डॉ. दीपिका टोप्पो के अनुसार,उनके पति डॉ. अशोक टोप्पो दो दिन पूर्व कोतवाली से वापस लौट रहे थे, तभी अनावेदक क्रमांक-2 नवीन द्विवेदी,निवासी नमनाकला कृष्णनगर कॉलोनी,ने कथित रूप से उन्हें जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया। शिकायत में आरोप है कि नवीन द्विवेदी ने कथित तौर पर कहा कि वे उनके खिलाफ कुछ नहीं कर सकते और यदि उन्हें अंबिकापुर में अस्पताल चलाना है तो 50 लाख रुपये देने होंगे तथा प्रतिमाह 5 लाख रुपये देने पड़ेंगे। यह भी आरोप लगाया गया है कि उनके बैंकॉक दौरे से संबंधित कथित अश्लील वीडियो बनाए जाने और उसे मीडिया में डालकर बदनाम करने की धमकी दी गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस कथित धमकी के माध्यम से उन्हें मानसिक रूप से तोड़ने का प्रयास किया गया। इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
4 अगस्त की कथित फोन बातचीत का ऑडियो भी देने का दावा : शिकायत में सुशील कुमार राय पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आवेदन के अनुसार,4 अगस्त 2026 को सुशील कुमार राय ने केयर हॉस्पिटल के कर्मचारी प्रकाश दास के मोबाइल फोन पर कथित रूप से फोन किया और डॉ. दीपिका टोप्पो के संबंध में अत्यंत अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए कथित रूप से गोली मारने की धमकी दी। शिकायतकर्ता ने इस बातचीत की ऑडियो सीडी संलग्न किए जाने की बात कही है। अब पुलिस के सामने यह जांच करना महत्वपूर्ण होगा कि कथित ऑडियो वास्तविक है या नहीं, आवाज किसकी है,बातचीत कब और किस नंबर से हुई तथा उसमें कही गई बातों का वास्तविक संदर्भ क्या था।
जातिगत अपमान का आरोप भी कम गंभीर नहीं : मामले का दूसरा और संवेदनशील पहलू कथित जातिगत अपमान है। यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि डॉक्टर दंपती को उनकी अनुसूचित जनजाति की पहचान के आधार पर सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया,जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल हुआ या धमकी दी गई, तो मामला गंभीर आपराधिक धाराओं के तहत जांच का विषय बन सकता है। लेकिन यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते तो निष्पक्ष जांच के बाद पुलिस को यह बात भी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करनी चाहिए। क्योंकि कानून में शिकायतकर्ता को न्याय मिलना जरूरी है, लेकिन शिकायत में नामित व्यक्ति के साथ भी निष्पक्षता उतनी ही जरूरी है।
पुलिस प्रशासन के सामने अब कई सीधे सवाल
इस शिकायत के बाद पुलिस प्रशासन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।
क्या शिकायत पर एफआईआर दर्ज होगी?
क्या कथित 65 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता की जांच होगी?
क्या अस्पताल के बैंक खातों और वित्तीय दस्तावेजों की जांच की जाएगी?
क्या 3 जुलाई की कथित घटना में मौजूद स्टाफ और मरीजों के बयान लिए जाएंगे?
क्या 4 अगस्त की कथित फोन बातचीत वाली ऑडियो सीडी की तकनीकी जांच होगी?
क्या कॉल डिटेल और मोबाइल नंबर की जांच की जाएगी?
क्या कथित 50 लाख रुपये और प्रतिमाह 5 लाख रुपये की मांग की स्वतंत्र जांच होगी?
क्या डॉक्टर दंपती को कथित धमकियों के संबंध में सुरक्षा प्रदान की जाएगी?
और सबसे महत्वपूर्ण—यदि पहले पुलिस अधिकारियों को शिकायत दी गई थी तो अब तक उस पर क्या कार्रवाई हुई?

आईजी तक पहुंचा मामला, अब कार्रवाई की बारी
डॉ. दीपिका टोप्पो ने अपने आवेदन की प्रतियां पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज अंबिकापुर और विशेष थाना प्रभारी आजाक थाना अंबिकापुर को भेजते हुए आरोपित व्यक्तियों के विरुद्ध अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम तथा अन्य समुचित धाराओं में प्रथम सूचना दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है। अब देखना होगा कि शिकायत उच्च पुलिस अधिकारियों तक पहुंचने के बाद मामले में क्या कार्रवाई होती है। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप गंभीर और प्रथम दृष्टया जांच योग्य हैं तो निष्पक्ष जांच शुरू होना स्वाभाविक अपेक्षा है। दूसरी ओर,नामित व्यक्तियों को भी अपना पक्ष रखने और जांच में अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए।
व्यंग्य का सवाल : कानून की किताब में ‘पहुंच’ नाम की कोई धारा है क्या?
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे दिलचस्प और चिंताजनक पहलू शिकायत में बार-बार सामने आया ‘पहुंच और पावर’ का जिक्र है। यदि वास्तव में कोई व्यक्ति अपनी राजनीतिक, प्रशासनिक या सामाजिक पहुंच के नाम पर किसी शिकायतकर्ता को पुलिस में जाने से रोक सकता है, तो फिर कानून-व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है।
और यदि ऐसा कुछ नहीं है, तो फिर पुलिस को जांच करने में डर किस बात का?
65 लाख का हिसाब चाहिए—जांच करिए।
जातिगत गाली का आरोप है—जांच करिए।
गोली मारने की धमकी का आरोप है—जांच करिए।
50 लाख और मासिक 5 लाख की कथित मांग है—जांच करिए।
ऑडियो सीडी है—फोरेंसिक जांच करिए।
आरोप गलत हैं—यह भी जांच से साबित कर दीजिए।

लेकिन हर सवाल का जवाब अगर सिर्फ ‘देख रहे हैं’ में मिलता रहा,तो जनता यही पूछेगी कि पुलिस शिकायत देख रही है या शिकायतकर्ता का इंतजार देख रही है?
अब माजरा क्या है—शोषण,आर्थिक विवाद या प्रभाव का खेल?
फिलहाल इस पूरे मामले में तीन बड़े संभावित पहलू सामने आते हैं—
पहला,अस्पताल में कथित वित्तीय अनियमितता का विवाद।
दूसरा,कथित जातिगत अपमान और धमकी।
तीसरा,कथित अवैध वसूली और दबाव।

इनमें से कौन-सा आरोप सही है और कौन-सा गलत,यह पुलिस जांच से ही सामने आएगा। लेकिन इतना जरूर है कि एक डॉक्टर दंपती द्वारा पुलिस महानिरीक्षक तक पहुंचकर लगाए गए इतने गंभीर आरोपों को महज ‘आपसी विवाद’ कहकर नजरअंदाज करना उचित नहीं होगा। मामला अगर झूठा है तो जांच करके झूठ सामने लाइए। मामला अगर सच्चा है तो दोषियों पर कार्रवाई कीजिए। क्योंकि कानून का काम न किसी को बचाना है, न किसी को फंसाना। कानून का काम सिर्फ सच तक पहुंचना है। अब देखना यह है कि अंबिकापुर पुलिस इस मामले में सच तक पहुंचती है या मामला भी उन फाइलों की तरह दबकर रह जाता है,जिन पर धूल तो बहुत जमती है, लेकिन कार्रवाई की तारीख कभी नहीं आती।
अस्पताल में स्टाफ और मरीजों के सामने अपमानित करने का आरोप
शिकायत में डॉ. दीपिका टोप्पो ने आरोप लगाया है कि कथित गाली-गलौज और अपमानजनक व्यवहार अस्पताल परिसर में ही हुआ,जहां स्टाफ और कुछ मरीज भी मौजूद थे। उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान उनका मोबाइल फोन भी छीनकर फर्श पर पटक दिया गया। डॉक्टर दंपती के अनुसार,इस घटना के बाद वे मानसिक रूप से परेशान और भयभीत हो गए। आवेदन में कहा गया है कि कथित रूप से दोनों अनावेदक अपनी पहुंच और प्रभाव का हवाला देकर लगातार डराते-धमकाते रहे।
‘क्या करें’ की स्थिति में पहुंचा परिवार,फिर पुलिस से शिकायत का दावा
आवेदन के अनुसार, कथित घटना के बाद डॉ. दीपिका टोप्पो ने अपने पति डॉ. अशोक टोप्पो और उनके पिता श्री एस.एल. टोप्पो के साथ मामले को लेकर चर्चा की। शिकायत में कहा गया है कि परिवार कथित धमकियों और विवाद के कारण भयभीत था और उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि क्या कदम उठाया जाए। बाद में हिम्मत जुटाकर डॉक्टर दंपती तथा परिवार की ओर से सिटी कोतवाली, पुलिस अधीक्षक कार्यालय और आजाक थाने में शिकायत आवेदन दिए जाने का दावा किया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इन शिकायतों के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
डेढ़ महीने से भय और अपमान में जीने का दावा
डॉ. दीपिका टोप्पो ने शिकायत में कहा है कि पिछले करीब एक से डेढ़ महीने से उनका परिवार कथित धमकियों,अपमान और मानसिक तनाव के बीच जीवन गुजार रहा है। आवेदन में यहां तक कहा गया है कि शिकायत करने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है कि अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों का सम्मान नहीं है और उनके लिए परिस्थितियां बेहद कठिन हैं। यह टिप्पणी मामले की गंभीरता के साथ-साथ शिकायतकर्ता के मानसिक तनाव को भी दर्शाती है।
‘ऊंची पहुंच और पावर’ का दावा—शिकायत में लगाए गए गंभीर आरोप
डॉक्टर दंपती ने शिकायत में दोनों अनावेदकों को कथित रूप से प्रभावशाली बताते हुए आरोप लगाया है कि वे अपनी ऊंची पहुंच और पावर का हवाला देकर उन्हें डराते रहे। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि अनावेदक क्रमांक-2 कई अस्पतालों से जुड़े पदों का हवाला देकर अस्पताल संचालकों के साथ कथित रूप से दबावपूर्ण व्यवहार करता है और अस्पताल संचालकों को मजदूर जैसा समझने का आरोप लगाया है। इन आरोपों की पुष्टि भी जांच के बाद ही संभव होगी।
सबसे बड़ा सवाल : 65 लाख का हिसाब कहां है?
इस पूरे विवाद का एक अहम हिस्सा कथित 65 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता है। यदि वास्तव में अस्पताल के खाते से बिना अनुमति इतनी बड़ी रकम निकाली गई है तो बैंक स्टेटमेंट,चेक,ऑनलाइन ट्रांजेक्शन,पासबुक, अकाउंटिंग रिकॉर्ड,बिल-वाउचर और डिजिटल ट्रांजेक्शन की जांच से सच्चाई सामने आ सकती है। और यदि 65 लाख रुपये की कथित वित्तीय गड़बड़ी का आरोप ही गलत है तो वह भी जांच में स्पष्ट हो सकता है। ऐसे में सवाल यह नहीं कि आरोप किसने लगाया और किसके खिलाफ लगाया। असली सवाल है—पैसा कहां गया? किस खाते में गया? किसके निर्देश पर गया? और किसने निकाला?


Share

Check Also

सूरजपुर@ कलेक्टर रेना जमील के मार्गदर्शन में दूर-दराज के मरीजों को मिल रही निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधा

Share विश्रामपुर रेलवे स्टेशन पर 16 अगस्त से 5 सितंबर तक लाइफलाइन एक्सप्रेस का शिविर,विशेषज्ञ …

Leave a Reply