नई दिल्ली,07 अगस्त 2026। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में शामिल हुए लोकसभा के सांसदों से नाश्ते पर मुलाकात की। इस मुलाकात में शिवसेना (शिंदे) के 7, एनसीपीआई के 20, एनसीपी (अजीत पवार) के 2, उपेंद्र कुशवाहा समेत करीब 45 सांसद शामिल हुए। इस दौरान राजग में शामिल हुए सभी नए सांसदों को प्रधानमंत्री ने संसद में सक्रिय रूप से भाग लेने और स्वास्थ्य सहित कई मुद्दों पर बात की। प्रधानमंत्री ने सभी सांसदों को अपने संसदीय क्षेत्र के विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए सत्ता के प्रभावी इस्तेमाल की सलाह दी। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में किसी भी विकास कार्य के लिए सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से संपर्क करें। प्रधानमंत्री ने प्रत्येक सांसद से व्यक्तिगत रूप से बातचीत कर उनका हालचाल जाना। इस दौरान बातचीत का कुछ हिस्सा मराठी भाषा में भी हुआ। प्रधानमंत्री न केवल मराठी भाषा समझते हैं बल्कि बोलते भी हैं। प्रधानमंत्री ने धाराशिव के सांसद ओमराजे निंबालकर से बातचीत के दौरान उनके योगाभ्यास के बारे में पूछा और स्वास्थ्य एवं दिनचर्या को लेकर चर्चा की। यह बैठक पूरी तरह से संवादात्मक और विकास केंद्रित रही, जिसमें सांसदों को अपने क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाने और जनता से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया। प्रधानमंत्री के साथ ब्रेकफास्ट मीटिंग के बाद सांसद शताब्दी रॉय ने बताया कि प्रधानमंत्री ने सभी सांसदों को सोशल मीडिया पर प्रभावी तरीके से सक्रिय रहने पर जोर दिया। सोशल मीडिया के साथ अपने-अपने क्षेत्रों के विकास पर ध्यान देने और विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने पर ध्यान केन्दि्रत करने को कहा। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने 40 वर्ष से अधिक उम्र के सांसदों को योग करने और साल में एक बार स्वास्थ्य की जांच कराने की सलाह भी दी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने किसानों और युवाओं से मिलने पर जोर दिया ताकि उनकी समस्याओं का समाधान निकाला जा सके। इतिहास प्रधानमंत्री को उन्होंने माचा चाय के बारे में बताया। इस जापानी चाय के बारे में उन्होंने उत्सुकता से सुना। बैठक के बाद सांसदों ने बताया कि प्रधानमंत्री ने उन्हें संसद की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने में सकारात्मक तरीके भाग लेने की सलाह दी। प्रधानमंत्री ने संसद की कार्यवाही बाधित होने पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हंगामे के कारण नए सांसदों को सदन में बोलने का अवसर नहीं मिल पा रहा है, जो उनके साथ अन्याय है।
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