नई दिल्ली,07 अगस्त 2026। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यूपीआई ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) लागू किए जाने को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर भविष्य में मर्चेंट डिस्काउंट रेट व्यवस्था लागू होती है तो इसका सीधा असर केवल व्यापारियों यानी मर्चेंट्स पर पड़ेगा। आम यूपीआई यूजर्स से किसी भी तरह का शुल्क वसूलने की कोई योजना नहीं है। वित्त मंत्री ने कहा कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए बैंकों और फिनटेक कंपनियों को लगातार इंफ्रास्ट्रक्चर,सुरक्षा और नई तकनीक पर निवेश करना पड़ता है। मर्चेंट डिस्काउंट रेट से मिलने वाला सहयोग डिजिटल पेमेंट सिस्टम को और बेहतर बनाने में मदद कर सकता है, जिसका फायदा अंततः सभी यूपीआई उपयोगकर्ताओं को मिलेगा। निर्मला सीतारमण ने बताया कि यूपीआई पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू करने को लेकर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। इस विषय पर फैसला यूपीआई और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी की सिफारिशों के आधार पर किया जाएगा।उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया तभी आगे बढ़ सकती है, जब संसद में टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 को मंजूरी मिलती है। इस प्रस्तावित विधेयक में पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम एक्ट, 2007 की धारा 10्र में संशोधन करने की बात कही गई है। यूपीआई पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट को लेकर राजनीतिक बहस तब तेज हुई जब कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए थे। उन्होंने दावा किया था कि नया विधेयक यूपीआई ट्रांजैक्शन को बिना शुल्क रखने वाली कानूनी व्यवस्था को कमजोर कर सकता है।जयराम रमेश ने कहा था कि अगर यह बदलाव लागू होता है तो भविष्य में सभी तरह के यूपीआई भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट लगाने का रास्ता खुल सकता है। उन्होंने आशंका जताई थी कि इसका अंतिम बोझ आम ग्राहकों पर पड़ सकता है और लोगों को यूपीआई इस्तेमाल करने के लिए शुल्क देना पड़ सकता है। निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस के इन दावों को गलत और भ्रामक बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे महत्वपूर्ण आर्थिक मुद्दों पर संसद में तथ्यों के आधार पर चर्चा होनी चाहिए, न कि ऐसी बातें फैलानी चाहिए जिनसे लोगों के बीच भ्रम पैदा हो।वित्त मंत्री ने दोहराया कि फिलहाल ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है,जिसके तहत आम यूपीआई ग्राहकों से किसी भी प्रकार का चार्ज लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार डिजिटल भुगतान को आम लोगों के लिए आसान और सुलभ बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। यूपीआई पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू करने को लेकर चर्चा भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा के बयान के बाद शुरू हुई थी। उन्होंने कहा था कि डिजिटल भुगतान प्रणाली को संचालित करने में एक निश्चित लागत आती है और किसी न किसी माध्यम से इस लागत को पूरा करना पड़ता है।हालांकि, आरबीआई गवर्नर ने यह स्पष्ट नहीं किया था कि इस लागत का भार किस पर डाला जाएगा।
उनके बयान के बाद डिजिटल भुगतान व्यवस्था की आर्थिक स्थिरता और मर्चेंट डिस्काउंट रेट को लेकर बहस तेज हो गई थी।
सरकार का लक्ष्य डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देना
भारत में यूपीआई डिजिटल भुगतान का सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है। करोड़ों लोग रोजाना छोटे-बड़े लेनदेन के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। सरकार लगातार डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने और इसे सुरक्षित बनाने की दिशा में काम कर रही है।फिलहाल वित्त मंत्री के बयान से यह साफ हो गया है कि आम यूजर्स पर यूपीआई शुल्क लगाने का कोई तत्काल फैसला नहीं हुआ है। आने वाले समय में मर्चेंट डिस्काउंट रेट को लेकर अंतिम निर्णय संबंधित समितियों की सिफारिश और संसद की प्रक्रिया के बाद ही लिया जाएगा।
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