Breaking News

रायपुर@ सीएम हेल्पलाइन 1076 में भ्रष्टाचार की जांच की शिकायत 24 घंटे के भीतर ‘संबंधित नहीं’ बताकर हटाई गई जिम्मेदारी

Share

खाद्य सुरक्षा अधिकारी नियुक्ति-पदोन्नति में कथित अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच की मांग करने वाली शिकायत पर कार्रवाई के बजाय बदलती रही स्थिति
राजधानी विशेष
रायपुर,06 अगस्त 2026 (घटती-घटना)।
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 की शुरुआत इस उद्देश्य से की गई थी कि आम नागरिक बिना किसी कार्यालय के चक्कर लगाए घर बैठे अपनी शिकायत शासन तक पहुंचा सकें और उसका समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण हो,सरकार स्वयं समय-समय पर अधिकारियों को प्रशिक्षण देकर यह संदेश देती रही है कि शिकायतों को केवल पोर्टल पर बंद करना उद्देश्य नहीं है,बल्कि शिकायतकर्ता की वास्तविक समस्या का समाधान करना ही मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की मूल भावना है, लेकिन जब इसी व्यवस्था की पारदर्शिता और प्रभावशीलता को परखने के लिए दैनिक घटती-घटना ने एक गंभीर जनहित का मामला मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में दर्ज कराया,तो शिकायत के साथ जो हुआ उसने पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रयोग के तौर पर दर्ज कराई गई शिकायत
दैनिक घटती-घटना ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 की कार्यप्रणाली को समझने और उसकी प्रभावशीलता का परीक्षण करने के उद्देश्य से 3 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पोर्टल पर शिकायत क्रमांक WP 260800133102 दर्ज कराई, शिकायत सफलतापूर्वक स्वीकार की गई और पोर्टल परComplaint Registered Successfully ’का संदेश भी प्रदर्शित हुआ, इसके बाद शिकायत प्रक्रिया में चली गई।
क्या था शिकायत का विषय?
यह कोई व्यक्तिगत विवाद या निजी समस्या नहीं थी,बल्कि खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग में खाद्य सुरक्षा अधिकारी पद पर हुई नियुक्तियों एवं पदोन्नतियों में कथित अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच की मांग थी,शिकायत में आरोप लगाया गया कि विभाग में कई वर्षों से केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित Food Safety and Standards Rules,,2011 के प्रावधानों की अनदेखी करते हुए नियुक्तियां एवं पदोन्नतियां की गईं, शिकायत में यह भी मांग की गई कि वर्ष 2011 से अब तक हुई सभी नियुक्तियों एवं पदोन्नतियों की स्वतंत्र जांच कराई जाए, अधिकारियों की शैक्षणिक पात्रता का सत्यापन कराया जाए तथा स्थापना शाखा की भूमिका की भी जांच हो,शिकायत में यह भी अनुरोध किया गया कि यदि प्रथम दृष्टया अनियमितता प्रतीत होती है तो पूरे मामले की जांच ईओडब्ल्यू,एसीबी अथवा किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए तथा जांच पूरी होने तक प्रस्तावित पदोन्नतियों पर रोक लगाने पर विचार किया जाए।
24 घंटे बाद बदल गई शिकायत की स्थिति-शिकायत 3 अगस्त को दर्ज हुई, उसी दिन उसकी स्थिति‘खुला’ दिखाई गई, इसके बाद शिकायत निराकरण अधिकारी (एल-1) को भेजे जाने की जानकारी पोर्टल पर दर्ज हुई, लेकिन अगले ही दिन यानी 4 अगस्त को शिकायत की स्थिति बदलकर‘संबंधित नहीं’ कर दी गई,पोर्टल पर दर्ज टिप्पणी में लिखा गया शिकायत वर्तमान में संबंधित विभाग/अधिकारी के अधिकार क्षेत्र में नहीं है,इसके बाद दूसरी टिप्पणी दर्ज हुई शिकायत संबंधित विभाग/अधिकारी के अधिकार क्षेत्र में नहीं है, अतः इसे यथोचित उचित प्राधिकारी को पुनः भेजा जा रहा है,लेकिन इसके बाद शिकायतकर्ता को यह जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई कि शिकायत वास्तव में किस विभाग को भेजी गई, किस अधिकारी को हस्तांतरित हुई और आगे उसकी जांच किस स्तर पर होगी।
सबसे बड़ा सवाल—यदि संबंधित नहीं थी तो स्वीकार क्यों की गई?-यह पूरा घटनाक्रम कई महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े करता है यदि शिकायत संबंधित विभाग की नहीं थी तो पोर्टल ने उसे स्वीकार क्यों किया? यदि शिकायत गलत विभाग में चली गई थी तो उसे किस विभाग को भेजा गया? क्या मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में दर्ज जनहित की शिकायतों की जांच केवल तकनीकी आधार पर समाप्त की जा सकती है? क्या शिकायतकर्ता को यह जानने का अधिकार नहीं कि उसकी शिकायत अब किस अधिकारी के पास लंबित है? यदि शिकायत में भ्रष्टाचार, नियमों के उल्लंघन और अपात्र नियुक्तियों जैसे गंभीर आरोप हों तो क्या केवल‘संबंधित नहीं’ लिख देना पर्याप्त जवाब माना जा सकता है?
जनहित से जुड़ा है पूरा मामला-खाद्य सुरक्षा अधिकारी ऐसा पद है जो सीधे जनता के स्वास्थ्य,खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता,मिलावट की रोकथाम और खाद्य सुरक्षा कानूनों के पालन से जुड़ा है,यदि इस पद पर नियुक्ति या पदोन्नति में नियमों का उल्लंघन हुआ है तो उसका प्रभाव केवल विभाग तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि आम जनता के स्वास्थ्य पर भी पड़ेगा,इसी कारण शिकायत में उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच की मांग की गई थी।
सरकार का दावा और हकीकत
दिलचस्प बात यह है कि शिकायत दर्ज होने के ठीक कुछ दिन बाद ही प्रदेशभर के अधिकारियों को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के प्रभावी संचालन और गुणवत्तापूर्ण शिकायत निवारण का प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया कि शिकायत का उद्देश्य केवल पोर्टल पर जवाब देना नहीं है,शिकायतकर्ता की वास्तविक समस्या का समाधान करना अनिवार्य है,आवश्यकता पड़ने पर स्थल निरीक्षण,तथ्यात्मक जांच और दस्तावेज अपलोड किए जाएं,यदि शिकायत संबंधित विभाग की नहीं है तो उसे उचित विभाग को तत्काल स्थानांतरित किया जाए,यानी शासन स्वयं अधिकारियों को गुणवत्तापूर्ण निराकरण का प्रशिक्षण दे रहा है,लेकिन उसी व्यवस्था में दर्ज एक जनहित की शिकायत के साथ जो हुआ,वह अलग कहानी बयान करता है।
क्या मुख्यमंत्री हेल्पलाइन केवल शिकायत दर्ज करने का मंच बनकर रह गई है?
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पोर्टल का उद्देश्य जनता और शासन के बीच विश्वास का पुल बनना है,यदि शिकायत दर्ज होने के बाद बिना स्पष्ट कारण बताए उसे ‘संबंधित नहीं’ कहकर आगे बढ़ा दिया जाए या उसकी स्थिति अस्पष्ट छोड़ दी जाए,तो इससे शिकायतकर्ता का विश्वास प्रभावित होना स्वाभाविक है, विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी शिकायत निवारण प्रणाली की सफलता शिकायतों की संख्या से नहीं,बल्कि उनके पारदर्शी, कारणयुक्त और गुणवत्तापूर्ण निराकरण से मापी जाती है।
अब इन सवालों के जवाब का इंतजार
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या शिकायत वास्तव में किसी सक्षम प्राधिकारी को भेजी गई है? क्या इसकी स्वतंत्र जांच होगी? क्या शिकायतकर्ता को विभाग बदलने और आगे की कार्रवाई की सूचना दी जाएगी? या फिर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में दर्ज यह शिकायत भी ‘संबंधित नहीं’की टिप्पणी के साथ फाइलों में सिमटकर रह जाएगी? यह मामला केवल एक शिकायत का नहीं,बल्कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पोर्टल की विश्वसनीयता,पारदर्शिता और शिकायत निवारण प्रणाली की वास्तविक कार्यप्रणाली की भी परीक्षा बन गया है।


Share

Check Also

सूरजपुर@ मुफ्त सफर नहीं मिला तो निजी सुरक्षा गार्ड ने बीच रास्ते रुकवाई स्कूल बस,चालक पर बंदूक तानकर की मारपीट

Share बाइक से पीछा कर काली मंदिर के पास रोकी बस,छात्र-छात्राओं के सामने की वारदात …

Leave a Reply