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सूरजपुर@ जेल,बर्खास्तगी और फिर 7.7 एकड़ जमीन! आखिर कहां से आई बढ़ती संपत्ति,कौन करेगा निष्पक्ष जांच?

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  • एफआईआर से संयुक्त भूमि तकः सहकारिता तंत्र पर उठे नए सवाल,क्या होगी निष्पक्ष जांच?
  • धान शॉर्टेज,एफआईआर, बर्खास्तगी और फिर नई संपत्तियां…आखिर जवाबदेह कौन?
  • सोनपुर से 7.7 एकड़ जमीन तकः दस्तावेज़ों ने उठाए कई सवाल,जांच की मांग तेज…
  • सेवा समाप्ति के बाद बढ़ती संपत्तियों पर सवाल,क्या सहकारिता तंत्र देगा जवाब?
  • भैयाथान सहकारिता का दूसरा अध्यायः एफआईआर,बर्खास्तगी और फिर संयुक्त भूमि रिकॉर्ड
  • धान खरीदी से जमीन तक : क्या पूरे मामले की होगी स्वतंत्र जांच?
  • एफआईआर के बाद जमीन,गाड़ी और पुनर्बहाली की चर्चाएं…सूरजपुर सहकारिता पर फिर उठे सवाल…
  • सोनपुर,शिवप्रसादनगर और भैयाथान शाखा से जुड़े मामलों में दस्तावेज़ों के साथ उठे कई नए सवाल, अब निष्पक्ष जांच की मांग तेज

ओंकार पाण्डेय
सूरजपुर,07 अगस्त 2026 (घटती-घटना)।
भाग-1 में हमने पशुपालन ऋण वितरण, एफआईआर,सेवा समाप्ति और न्यायालयीन कार्यवाही का क्रम सामने रखा था,अब भाग-2 में सवाल उन घटनाओं पर है जो उसके बाद सामने आईं,राजस्व रिकॉर्ड,सोशल मीडिया पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध तस्वीरें,धान खरीदी में सामने आए विवाद और विभागीय कार्रवाई के बाद भी लगातार उठते सवाल यह संकेत देते हैं कि पूरा मामला केवल एक कर्मचारी तक सीमित नहीं है,यदि इन सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच हो,तभी यह स्पष्ट हो सकेगा कि सहकारिता तंत्र में वास्तव में क्या हुआ और क्या नहीं। सूरजपुर जिले की सहकारिता व्यवस्था से जुड़े विवाद अब अलग-अलग घटनाएं नहीं रह गए हैं,उपलब्ध दस्तावेज़ यह दर्शाते हैं कि विभागीय कार्रवाई,एफआईआर और न्यायालयीन प्रक्रिया हुई,वहीं राजस्व रिकॉर्ड और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध अन्य अभिलेखों के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर नए प्रश्न उठे हैं,इन प्रश्नों के उत्तर केवल निष्पक्ष,पारदर्शी और व्यापक जांच से ही मिल सकते हैं।
साधना कुशवाहा प्रकरण के बाद नया सवाल-संयुक्त नाम से भूमि उपलब्ध राजस्व रिकॉर्ड में हदीश मोहम्मद और साधना कुशवाहा के नाम से संयुक्त कृषि भूमि दर्ज दिखाई देती है,रिकॉर्ड में अनेक खसरा नंबर और कुल लगभग 7.7 एकड़ (करीब 3.13 हेक्टेयर) भूमि का उल्लेख है,भूमि रिकॉर्ड अपने-आप में केवल स्वामित्व का रिकॉर्ड है,इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि भूमि किस वर्ष खरीदी गई,किस कीमत पर खरीदी गई या धन का स्रोत क्या था,लेकिन यह भी तथ्य है कि इससे पहले पशुपालन ऋण प्रकरण में एफआईआर, न्यायालयीन कार्यवाही और विभागीय सेवा समाप्ति जैसे घटनाक्रम हो चुके थे,ऐसे में स्थानीय स्तर पर यह मांग उठ रही है कि यदि किसी प्रकार का संदेह है तो सक्षम एजेंसियां भूमि खरीद के वित्तीय स्रोत की जांच करें।
अप्रैल 2024 में नई Hyundai Creta की डिलीवरी-उपलब्ध सोशल मीडिया पोस्ट में अप्रैल 2024 की एक तस्वीर दिखाई देती है, जिसमें साधना कुशवाहा Hyundai शोरूम में नई Hyundai Creta की डिलीवरी लेते हुए दिखाई देती हैं,यह फोटो केवल वाहन की डिलीवरी का सार्वजनिक रिकॉर्ड दर्शाती है, इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि वाहन किस आय या किस स्रोत से खरीदा गया,लेकिन स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठाया जा रहा है कि यदि संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध पहले से गंभीर विभागीय और आपराधिक कार्रवाई हुई थी,तो क्या बाद में उनकी संपत्तियों और आय के स्रोत की कभी जांच हुई? यदि हुई,तो उसका परिणाम क्या रहा? यदि नहीं हुई, तो क्यों नहीं?
’व्हाइट कार्ड एंट्री’ का रहस्य-स्थानीय स्तर पर सबसे अधिक चर्चा जिस विषय की होती रही है,वह कथित‘व्हाइट कार्ड एंट्री’ है, दस्तावेज़ों के अनुसार सेवा समाप्ति का आदेश जारी हुआ था,इसके बाद यदि किसी रूप में कार्य से दोबारा जुड़ाव हुआ,तो उसका वैधानिक आधार क्या था? क्या पुनर्नियुक्ति हुई? क्या अनुबंध पर कार्य हुआ? क्या किसी अधिकारी ने विशेष अनुमति दी? क्या समिति के रिकॉर्ड में उसका उल्लेख है? इन सवालों पर अभी तक स्पष्ट सार्वजनिक दस्तावेज़ सामने नहीं आए हैं।
क्या जांच केवल कर्मचारियों तक सीमित रही?-सहकारिता व्यवस्था में ऋण स्वीकृति,धान खरीदी,स्टॉक सत्यापन,निरीक्षण और भुगतान जैसी प्रक्रियाएं कई स्तरों पर होती हैं। ऐसे में यदि किसी मामले में गंभीर अनियमितताओं की जांच हुई,तो यह प्रश्न भी उठता है कि क्या केवल कर्मचारी स्तर पर कार्रवाई पर्याप्त थी? क्या पर्यवेक्षण और निरीक्षण करने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी समीक्षा हुई? क्या प्रशासनिक जवाबदेही तय की गई? इन प्रश्नों का उत्तर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
स्थानीय स्तर पर किन अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठते रहे?- स्थानीय चर्चाओं और कुछ विभागीय सूत्रों के अनुसार उस समय के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठते रहे,इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध दस्तावेज़ों से नहीं होती और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है,ऐसी स्थिति में किसी निष्कर्ष पर पहुँचना उचित नहीं होगा। लेकिन यदि लगातार ऐसे प्रश्न उठ रहे हैं, तो विभाग के लिए पारदर्शिता के साथ स्थिति स्पष्ट करना आवश्यक है।
धान शॉर्टेज के बाद क्या बदली जांच की दिशा?
वर्ष 2025 की धान खरीदी के दौरान भैयाथान शाखा के अंतर्गत संचालित कई समितियों में धान के स्टॉक को लेकर शिकायतें सामने आईं,स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए गए कि कुछ केंद्रों में रिकॉर्ड के अनुसार धान अधिक था जबकि मौके पर स्टॉक कम मिला,इसके बाद तहसीलदार, एसडीएम और सहकारिता विभाग के अधिकारियों की संयुक्त जांच टीमों ने निरीक्षण किया,स्थानीय लोगों और कुछ विभागीय सूत्रों का दावा है कि प्रारंभिक जांच में जिन केंद्रों पर कमी दर्ज हुई,बाद की जांच में वही कमी पूरी दिखाई गई,इन दावों की पुष्टि किसी सार्वजनिक अंतिम जांच रिपोर्ट से नहीं होती, इसलिए इन्हें आरोप और जनचर्चा के रूप में ही देखा जाना चाहिए,यदि जांच रिपोर्टों में वास्तव में विरोधाभास है,तो उनका सार्वजनिक परीक्षण होना चाहिए।
निलंबन हुआ,अब पुनर्बहाली की चर्चाएं
धान खरीदी सत्र के दौरान कुछ समिति प्रबंधकों और केंद्र प्रभारियों के विरुद्ध निलंबन जैसी कार्रवाई हुई,अब स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि आगामी धान खरीदी सत्र से पहले उनमें से कुछ को पुनः कार्य पर लेने की तैयारी की जा रही है,यदि ऐसा कोई आदेश जारी होता है,तो सबसे बड़ा प्रश्न यह होगा कि क्या संबंधित व्यक्तियों को विभागीय जांच में क्लीन चिट मिली? क्या पूर्व जांच रिपोर्ट निरस्त की गई? या फिर किसी अन्य आधार पर पुनर्बहाली का निर्णय लिया गया? इन प्रश्नों का उत्तर केवल विभागीय आदेश ही दे सकता है।
क्यों जरूरी है स्वतंत्र जांच?
इस पूरे घटनाक्रम में अब कई परतें हैं पशुपालन ऋण वितरण,एफआईआर, न्यायालयीन कार्यवाही,सेवा समाप्ति,धान शॉर्टेज,विरोधाभासी जांच की चर्चाएं, संयुक्त भूमि रिकॉर्ड, वाहन की सार्वजनिक डिलीवरी, पुनर्बहाली की चर्चाएं,इन सभी को अलग-अलग देखने से पूरी तस्वीर स्पष्ट नहीं होती। यदि किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा समग्र जांच की जाए,तभी यह स्पष्ट हो सकेगा कि क्या सभी प्रक्रियाएं नियमों के अनुरूप थीं या कहीं कोई चूक हुई।
आज भी कई प्रश्न अनुत्तरित हैं…
क्या पशुपालन ऋण प्रकरण में शासन को हुई कथित आर्थिक क्षति की पूरी वसूली हुई?
क्या धान शॉर्टेज से जुड़े सभी मामलों में अंतिम कार्रवाई पूरी हो गई?
क्या सेवा समाप्ति के बाद कथित पुनर्बहाली का कोई वैध आदेश है?
क्या भूमि और वाहन खरीद के वित्तीय स्रोत की किसी एजेंसी ने जांच की?
क्या सभी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएंगी?
क्या जिम्मेदारी केवल कर्मचारियों तक सीमित रही या पर्यवेक्षण करने वाले अधिकारियों की भी जवाबदेही तय हुई?


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