दोबारा पकड़ने से पहले मजिस्ट्रेट की मंजूरी जरूरी,सुप्रीम कोर्ट ने तय किए नियम
नई दिल्ली,21 सितम्बर 2026। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करते समय उसे गिरफ्तारी की वजह लिखित में बताना जरूरी है। ऐसा नहीं करने पर गिरफ्तारी गैरकानूनी मानी जाएगी। कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसी गिरफ्तारी के बाद व्यक्ति को रिहा कर दिया जाता है और जांच एजेंसी उसे दोबारा गिरफ्तार करना चाहती है, तो पुलिस सीधे उसे नहीं पकड़ सकती। इसके लिए पहले मजिस्ट्रेट से मंजूरी लेनी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि पहली गिरफ्तारी में नियमों का उल्लंघन करने वाले पुलिस अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच होगी। दोबारा गिरफ्तारी की स्थिति में मामले की आगे की जांच किसी दूसरे अधिकारी को सौंपी जाएगी।
जसरकरनजीत सिंह की गिरफ्तारी
के मामले में कोर्ट ने दिया फैसला
कोर्ट ने ये टिप्पणियां शिरोमणि अकाली दल से जुड़े मुल्लांपुर दाखा विधानसभा क्षेत्र के प्रभारी जसरकरनजीत सिंह की अपील पर कीं। नाबालिग से यौन अपराध के आरोपों से जुड़े मामले में उनकी गिरफ्तारी की वजह लिखित में नहीं बताई गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी को गैरकानूनी माना। सिंह ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश के बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जिसमें स्थानीय अदालत के उनकी गिरफ्तारी को गैरकानूनी बताने और तत्काल रिहाई के आदेश पर रोक लगा दी गई थी।
सुप्रीम कोर्ट बोला… गिरफ्तारी की वजह समझ आने वाली भाषा में लिखित देनी होगी
जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस अतुल चंद्रकुर की बेंच ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 22(1) के तहत आरोपी को गिरफ्तारी की वजह लिखित में और ऐसी भाषा में बतानी होगी,जिसे वह समझ सके। इसकी कॉपी भी उसे जल्द से जल्द देनी होगी। कोर्ट ने कहा कि यह सिर्फ कानूनी प्रक्रिया नहीं,बल्कि व्यक्ति का मौलिक और वैधानिक अधिकार है। इसका उल्लंघन होने पर गिरफ्तारी असंवैधानिक हो जाएगी और आरोपी को तत्काल रिहाई का अधिकार होगा।
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