- वरिष्ठता सूची जारी होते ही शुरू हुआ ‘गणित’, पुलिस महकमे में चर्चाओं का बाजार गर्म
- 370 प्रधान आरक्षक,करीब 60 पद, 15 वेटिंग… और हर कोई अपने नंबर का हिसाब लगाने में जुटा
- सरगुजा रेंज में एएसआई पदोन्नति सूची जारी,370 में से 201 प्रधान आरक्षक योग्य,169 अयोग्य घोषित
- जशपुर में सबसे अधिक 46,जबकि सूरजपुर में 44 कर्मचारी अयोग्य,सीमित पदों के बीच पदोन्नति की दौड़ तेज
- स्थानांतरण से बचने वाले कर्मचारियों की भी चर्चा,पदोन्नति सूची ने बढ़ाई हलचल
- अंतिम फैसला नियमों का होगा,लेकिन विभागीय गलियारों में संभावनाओं पर खूब हो रही चर्चा
-संवाददाता-
अंबिकापुर/एमसीबी 18 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। सरगुजा रेंज में प्रधान आरक्षक से सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) पदोन्नति के लिए वर्ष 2026 की संयुक्त वरिष्ठता सह उपयुक्तता सूची जारी होने के बाद पुलिस महकमे का माहौल अचानक बदल गया है, वर्दी पर लगने वाला एक स्टार हमेशा से सम्मान,जिम्मेदारी और अधिकार का प्रतीक माना जाता रहा है,यही वजह है कि सूची जारी होते ही पूरे रेंज में चर्चा का विषय अब अपराध नियंत्रण नहीं,बल्कि पदोन्नति का गणित बन गया है,चाय की मेज से लेकर थाना परिसर तक एक ही सवाल तैर रहा है इस बार स्टार किसके कंधे पर चमकेगा? सूत्रों के अनुसार सूची में लगभग 370 प्रधान आरक्षकों के नाम हैं, जबकि वर्तमान रिक्तियों के आधार पर करीब 60 पदोन्नतियां और लगभग 15 कर्मचारियों को प्रतीक्षा सूची में स्थान मिलने की संभावना बताई जा रही है, ऐसे में स्वाभाविक है कि सूची में पीछे मौजूद कर्मचारियों की नजरें अब केवल अपने क्रमांक पर नहीं, बल्कि पूरी सूची पर टिकी हुई हैं।
बता दे की सरगुजा रेंज में प्रधान आरक्षक से सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) पदोन्नति के लिए वर्ष 2026 की संयुक्त वरिष्ठता सह उपयुक्तता सूची जारी होने के साथ ही पूरे पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है,सूची में कुल 370 प्रधान आरक्षकों को शामिल किया गया है, इनमें 201 को योग्य तथा 169 को विभिन्न कारणों से अयोग्य घोषित किया गया है, सूची में सेवा अभिलेख, सेवा मूल्यांकन,अनुशासनात्मक रिकॉर्ड और अन्य विभागीय मापदंडों के आधार पर पात्रता का उल्लेख किया गया है,विभागीय स्तर पर चर्चा है कि रिक्त पद सीमित होने के कारण इस बार प्रतिस्पर्धा पहले की तुलना में अधिक है,इसी वजह से वरिष्ठता सूची जारी होने के बाद कई कर्मचारी अपने संभावित क्रम,उपलब्ध रिक्तियों और पदोन्नति की संभावना का लगातार आकलन कर रहे हैं।
वरिष्ठता सूची नहीं,मानो गणित की किताब बन गई हो
विभागीय सूत्र बताते हैं कि वरिष्ठता सूची जारी होने के बाद कई कर्मचारी केवल अपना क्रम देखकर शांत हो गए, लेकिन कुछ लोग पूरी सूची का पन्ना-दर-पन्ना अध्ययन कर रहे हैं,कौन से कर्मचारी सेवानिवृत्ति के करीब हैं,कौन पदोन्नति लेकर दूसरे जिले नहीं जाना चाहता,किसके व्यक्तिगत कारण हैं और यदि कोई पदोन्नति स्वीकार नहीं करता तो अगला क्रम किसका बनेगा—ऐसी चर्चाएं महकमे में लगातार सुनाई दे रही हैं, एक प्रधान आरक्षक ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर बताया कि सूची जारी होने के बाद कई कर्मचारियों ने अपने संभावित अवसरों का स्वयं आकलन शुरू कर दिया है, यह असामान्य नहीं है,क्योंकि हर पदोन्नति सूची के साथ ऐसी गणनाएं होती हैं, कंधे पर स्टार लगाना है जिसके लिए दिमाग भी चाहिए,षड्यंत्र भी चाहिए,पहुंच भी चाहिए और जो संभव हो सकता है वह भी करेंगे,कुछ इसी दिशा में बढ़ रहा हैं, सुपर कॉप प्रधान आरक्षक जिनका नाम 105 नंबर पर है,वह सीधे 60 के अंदर आना चाहता है या फिर 75 के अंदर उन्होंने जो दिमाग लगाया है,वह अच्छे-अच्छे लोग शायद ना लगा पाए,बता दें कि प्रधान आरक्षक से एएसाआई में पदोन्नति होने के लिए सूची तैयार हो गई है, जिसमें 370 लोग शामिल है और 60 लोगों का चयन होना है 15 वेटिंग में जा सकते हैं, या टोटल 75 का चयन होंगा,सुपर कॉप प्रधान आरक्षक 105 नंबर पर है इसलिए उसका नाम इस बार की पदोन्नति सूची में नहीं आ सकता क्योंकि सूची में 45 अंक नीचे हैं,पर वह 45 अंकों का उछाल चाह रहे हैं इसीलिए वह संभाग में जितने भी प्रधान आरक्षक है जो सेवानिवृत होने वाले हैं जो जिला छोड़कर स्थानांतरण के दडर से प्रमोशन नहीं लेना चाहते हैं उनके घर जा जाकर आवेदन लिखवा रहा है।
योग्य से अधिक चर्चा अयोग्य कर्मचारियों की
जारी सूची में बड़ी संख्या में ऐसे प्रधान आरक्षक भी हैं जिन्हें विभिन्न कारणों से पदोन्नति के लिए अयोग्य माना गया है,दस्तावेज़ के अनुसार किसी कर्मचारी को सेवा अभिलेख में निर्धारित अंक प्राप्त नहीं होने,पिछले पांच वर्षों में बड़ी सजा मिलने,सेवा मूल्यांकन में कम अंक,सजा एवं इनाम का अनुपात प्रतिकूल होने अथवा अन्य विभागीय कारणों के चलते अपात्र घोषित किया गया है। कई प्रविष्टियों में अयोग्यता का कारण स्पष्ट रूप से अंकित किया गया है।
जशपुर में सबसे अधिक अयोग्य
आंकड़ों के अनुसार जशपुर जिले में 77 कर्मचारियों में से 46 अयोग्य घोषित किए गए हैं,जो पूरी रेंज में सर्वाधिक है, इसके बाद सूरजपुर में 44 और सरगुजा में 37 कर्मचारी अयोग्य पाए गए। वहीं पीटीएस मैनपाट के सभी छह कर्मचारी योग्य घोषित हुए हैं।
नियम क्या कहते हैं?
पुलिस विभाग के जानकारों के अनुसार केवल वरिष्ठता ही पदोन्नति का आधार नहीं होती,सेवा अभिलेख, वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन,अनुशासनात्मक रिकॉर्ड,दंड-पुण्य का विवरण तथा विभागीय नियमों के अनुसार उपयुक्तता का परीक्षण भी किया जाता है,यदि कोई कर्मचारी स्वेच्छा से पदोन्नति स्वीकार नहीं करता है या नियमानुसार उसका नाम विचार से बाहर हो जाता है,तभी क्रम के अनुसार अगले पात्र कर्मचारी पर विचार किया जाता है,इसलिए किसी भी प्रकार की चर्चा या अटकल से अधिक महत्व विभागीय प्रक्रिया और सक्षम अधिकारियों के निर्णय का होता है।
सूची ने बढ़ाई उत्सुकता
सूची जारी होने के बाद जहां योग्य घोषित कर्मचारियों में उत्साह है,वहीं कुछ कर्मचारी अपने सेवा अभिलेखों का पुनर्मूल्यांकन कराने या आवश्यक अभ्यावेदन देने की तैयारी में हैं। दूसरी ओर पुलिस महकमे में पदोन्नति के संभावित समीकरणों को लेकर चर्चाओं का दौर लगातार जारी है,कई कर्मचारियों का मानना है कि अंतिम सूची जारी होने तक अनेक तरह की संभावनाएं बनती और बदलती रहती हैं,इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
आखिरकार फैसला नियमों का ही होगा…
पुलिस महकमे में चर्चाएं, अनुमान और संभावनाएं अपनी जगह हैं, लेकिन अंतिम पदोन्नति सूची विभागीय नियमों, वरिष्ठता, उपयुक्तता और उपलब्ध रिक्तियों के आधार पर ही तय होगी, वरिष्ठता सूची ने जरूर पूरे रेंज में हलचल पैदा कर दी है, लेकिन कंधे पर स्टार आखिर किसके चमकेंगे, इसका जवाब केवल अंतिम आदेश आने के बाद ही मिलेगा, फिलहाल इतना तय है कि सरगुजा रेंज में इस समय सबसे अधिक चर्चा किसी बड़े अपराध की नहीं, बल्कि ‘एक स्टार’ की है—और यह चर्चा तब तक जारी रहने वाली है, जब तक अंतिम पदोन्नति आदेश जारी नहीं हो जाता।
अब अंतिम आदेश का इंतजार…
फिलहाल संयुक्त वरिष्ठता सह उपयुक्तता सूची जारी होने के बाद पदोन्नति प्रक्रिया का पहला चरण पूरा माना जा रहा है, अब अंतिम निर्णय विभागीय पदोन्नति समिति की अनुशंसा, उपलब्ध रिक्त पदों तथा सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के बाद जारी होने वाले पदोन्नति आदेश से होगा, ऐसे में पूरे सरगुजा रेंज के पुलिस महकमे की निगाहें अब अंतिम सूची और पदोन्नति आदेश पर टिकी हुई हैं।
स्थानांतरण भी बना बड़ा कारण
पुलिस विभाग में पदोन्नति का मतलब कई बार नया जिला भी होता है, लंबे समय से एक जिले में कार्यरत कुछ कर्मचारी पारिवारिक,सामाजिक या अन्य कारणों से स्थानांतरण नहीं चाहते। ऐसे में विभाग के भीतर यह चर्चा रहती है कि कुछ कर्मचारी पदोन्नति लेने के बजाय वर्तमान पद पर ही बने रहना पसंद करते हैं,सूत्रों का कहना है कि वरिष्ठता सूची जारी होने के बाद ऐसे कर्मचारियों की संख्या और उनके संभावित निर्णयों को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं, हालांकि कौन कर्मचारी पदोन्नति लेगा और कौन नहीं, इसका निर्णय पूरी तरह व्यक्तिगत और विभागीय प्रक्रिया के अधीन होता है।
महकमे में चर्चाओं का दौर
विभागीय गलियारों में इन दिनों सबसे अधिक चर्चा इसी बात की है कि वरिष्ठता सूची में ऊपर मौजूद कुछ कर्मचारी यदि किसी कारणवश पदोन्नति स्वीकार नहीं करते हैं,तो क्रमशः नीचे के पात्र कर्मचारियों को अवसर मिल सकता है, इसी संभावना को लेकर तरह-तरह के अनुमान लगाए जा रहे हैं,हालांकि इन चर्चाओं की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अंतिम निर्णय केवल नियमों,उपलब्ध रिक्तियों और विभागीय पदोन्नति समिति की संस्तुति के आधार पर ही लिया जाता है।
एक स्टार का आकर्षण क्यों इतना बड़ा?
पुलिस सेवा में एएसआई पद पर पदोन्नति केवल वेतन वृद्धि का विषय नहीं होती, इसके साथ जिम्मेदारियां बढ़ती हैं, निर्णय लेने की भूमिका मजबूत होती है और सेवा अभिलेख में भी इसका महत्वपूर्ण स्थान होता है,यही कारण है कि हर प्रधान आरक्षक अपने करियर में इस पड़ाव तक पहुंचना चाहता है,सेवानिवृत्ति से पहले यदि किसी कर्मचारी के कंधे पर एक स्टार लग जाता है तो इसे उसके लंबे सेवाकाल की बड़ी उपलब्धि माना जाता है,यही वजह है कि पदोन्नति सूची जारी होने के बाद महकमे में उत्सुकता चरम पर रहती है।
रिक्त पद सीमित…प्रतिस्पर्धा ज्यादा…
सूत्रों के अनुसार एएसआई के रिक्त पद सीमित हैं,ऐसे में सूची में योग्य घोषित होना पदोन्नति की पहली शर्त है,लेकिन अंतिम चयन रिक्त पदों,वरिष्ठता क्रम,विभागीय पदोन्नति समिति की अनुशंसा और सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के बाद ही होगा,इस कारण योग्य सूची में शामिल कर्मचारियों के बीच भी प्रतिस्पर्धा बनी हुई है।
अयोग्यता के कारणों पर भी उठ रहे सवाल
सूची जारी होने के बाद कई कर्मचारी अपने सेवा अभिलेख और सेवा मूल्यांकन की समीक्षा करने में जुट गए हैं,जिन कर्मचारियों को सेवा अभिलेख में कम अंक,सेवा मूल्यांकन में कमी अथवा दंड संबंधी कारणों से अयोग्य घोषित किया गया है, उनके बीच भी विभागीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है, कुछ कर्मचारी विभागीय नियमों के तहत उपलब्ध वैधानिक उपायों पर भी विचार कर रहे हैं।
जिलेवार तस्वीर- जारी सूची के विश्लेषण से सामने आया कि सातों जिलों एवं इकाइयों की स्थिति अलग-अलग है, सबसे अधिक कर्मचारी सूरजपुर और जशपुर से सूची में शामिल हैं, जबकि पीटीएस मैनपाट से सबसे कम कर्मचारी सूची में हैं।सरगुजा रेंज एएसआई पदोन्नति सूची (2026) – जिलेवार स्थिति
| जिला | कुल | योग्य | अयोग्य |
| सरगुजा | 76 | 39 | 37 |
| सूरजपुर | 99 | 55 | 44 |
| बलरामपुर | 56 | 42 | 14 |
| कोरिया | 25 | 13 | 12 |
| जशपुर | 77 | 31 | 46 |
| एमसीबी | 31 | 15 | 16 |
| पीटीएस मैनपाट | 6 | 6 | 0 |
| कुल | 370 | 201 | 169 |
एक नजर में…
कुल प्रधान आरक्षकः 370
पदोन्नति के लिए योग्यः 201
अयोग्य घोषितः 169
सबसे अधिक योग्यः सूरजपुर (55)
सबसे अधिक अयोग्यः जशपुर (46)
पीटीएस मैनपाटः सभी 6 कर्मचारी योग्य घोषित हुए।
इंडेक्स
370 प्रधान आरक्षकों की संयुक्त वरिष्ठता सह उपयुक्तता सूची जारी।
201 कर्मचारी पदोन्नति के लिए योग्य, 169 अयोग्य घोषित।
जशपुर में सबसे अधिक 46, जबकि सूरजपुर में 44 कर्मचारी अयोग्य पाए गए।
सेवा अभिलेख, सेवा मूल्यांकन, बड़ी सजा, सजा-इनाम तथा निर्धारित अंक नहीं मिलने जैसे कारणों से कई कर्मचारी अयोग्य घोषित किए गए।
अब अंतिम फैसला विभागीय पदोन्नति समिति एवं रिक्त पदों के आधार पर होगा।
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