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अम्बिकापुर@सात साल बाद फिर खुला पंकज बेक कस्टोडियल डेथ केस,कोर्ट ने उठाए जांच पर सवाल….

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एसपी की निगरानी में दोबारा होगी विवेचना,निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो सीबीआई जांच का विकल्प भी खुला


-संवाददाता-
अम्बिकापुर,30 जून 2026 (घटती-घटना)। सात साल पुराने बहुचर्चित पंकज बेक कस्टोडियल डेथ मामले में न्यायालय के नए आदेश के बाद एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश ने मामले की पुनः विवेचना के निर्देश देते हुए जांच को पुलिस अधीक्षक के प्रत्यक्ष पर्यवेक्षण में कराने कहा है। अदालत ने साफ किया है कि यदि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे नहीं बढ़ती या किसी स्तर पर प्रभाव की स्थिति बनती है तो मामले को सीबीआई को सौंपने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। न्यायालय के आदेश की प्रतिलिपि पुलिस महानिदेशक और आईजी सरगुजा को भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं। इस आदेश के बाद अब सवाल उठने लगे हैं कि आखिर सात साल पुराने इस मामले में किन बिंदुओं की दोबारा जांच होगी और किन तथ्यों पर फिर से फोकस किया जाएगा।
हिरासत से मौत तक की कहानी पर उठते रहे सवाल : मामला 21 जुलाई 2019 का है। चोरी के एक मामले में पूछताछ के लिए कोतवाली पुलिस ने पंकज बेक को हिरासत में लिया था। पुलिस के अनुसार उसे पुलिस कंट्रोल रूम में रखा गया था। अगले दिन उसकी मौत की खबर सामने आई। उसका शव शहर के एक निजी अस्पताल परिसर में फांसी के फंदे पर मिला था। पुलिस का उस समय दावा था कि पंकज हिरासत से निकल गया था और बाद में उसने आत्महत्या कर ली। वहीं न्यायिक जांच में मौत का कारण एंटी मॉर्टम हैंगिंग बताया गया था। लेकिन मृतक के परिजनों ने पुलिस की इस कहानी पर सवाल खड़े किए थे। परिवार का आरोप था कि हिरासत के दौरान पंकज के साथ मारपीट और प्रताड़ना की गई, जिसके बाद उसकी मौत हुई। इन्हीं आरोपों के चलते मामला लंबे समय तक सुर्खियों में रहा।
निलंबन,जांच और कानूनी प्रक्रिया के बीच अटका रहा मामला : घटना के बाद तत्कालीन कोतवाली थाना प्रभारी विनीत दुबे सहित पुलिसकर्मी प्रियेश जॉन, मनीष यादव, दीनदयाल सिंह और लक्ष्मण राम को निलंबित किया गया था। इसके बाद विभागीय जांच, आपराधिक विवेचना और न्यायिक प्रक्रियाएं चलती रहीं, लेकिन मामला किसी अंतिम निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सका। अब न्यायालय के आदेश ने इस पूरे प्रकरण को फिर से केंद्र में ला दिया है। अदालत के निर्देश से यह संकेत मिला है कि जांच में अब तक सामने आए सभी पहलुओं की नए सिरे से समीक्षा की जाएगी।
परिवार को फिर जगी न्याय की उम्मीद
मृतक पक्ष के अधिवक्ता राजवर्धन सिंह ने न्यायालय के आदेश को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि लंबे इंतजार के बाद परिवार को निष्पक्ष जांच की उम्मीद जगी है। उनका कहना है कि पुनः विवेचना से घटना से जुड़े सभी पहलुओं की सच्चाई सामने आ सकेगी। अब देखने वाली बात होगी कि नई जांच में कौन-कौन से तथ्य सामने आते हैं और पुलिस की विवेचना किस दिशा में आगे बढ़ती है। सात साल पुराने इस मामले में अदालत के आदेश के बाद एक बार फिर न्याय की उम्मीद और जांच की पारदर्शिता को लेकर बहस शुरू हो गई है।


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