बंटवारे में नहीं मिला हिस्सा,भसुर पर अधिकार से वंचित करने का आरोप,निष्पक्ष जांच की मांग
सोनू कश्यप
प्रतापपुर,30 जून 2026 (घटती-घटना)। पति की मृत्यु के बाद चार बच्चों की परवरिश के लिए संघर्ष कर रही प्रतापपुर विकासखंड के ग्राम सेमराकला निवासी विधवा महिला ने अब अपनी पैतृक संपत्ति में अधिकार के लिए जिला प्रशासन का दरवाजा खटखटाया है। महिला ने कलेक्टर सूरजपुर को आवेदन देकर अपनी और बच्चों की वैधानिक हिस्सेदारी दिलाने की मांग की है। महिला ने आवेदन में मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराकर पैतृक भूमि का विधि अनुसार बंटवारा कराया जाए, ताकि उसे और उसके बच्चों को उनका अधिकार मिल सके।
2015 में पति की मौत के बाद बढ़ी जिम्मेदारियां
आवेदन के अनुसार ग्राम सेमराकला निवासी बाबी मानीकपुरी के पति स्वर्गीय अकालू मानीकपुरी का वर्ष 2015 में निधन हो गया था। पति के निधन के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी महिला के कंधों पर आ गई।
वर्तमान में महिला मजदूरी कर अपने चार बच्चों का पालन-पोषण कर रही है। महिला का कहना है कि यदि उसे पति के हिस्से की पैतृक भूमि मिल जाती है तो वह खेती कर अपने परिवार का बेहतर भविष्य बना सकती है।
बंटवारे में अधिकार नहीं मिलने का आरोप
महिला ने आरोप लगाया है कि पैतृक संपत्ति के बंटवारे के दौरान उसे और उसके बच्चों को उनका वैधानिक हिस्सा नहीं दिया गया। उसने अपने भसुर परसोत्तम मानीकपुरी पर आरोप लगाया है कि उसकी जानकारी और सहमति के बिना भूमि पर कब्जा कर उसे अधिकार से दूर रखा गया।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
गांव से तहसील तक लगाई गुहार,नहीं निकला समाधान
पीडि़ता का कहना है कि उसने पहले परिवार और गांव स्तर पर आपसी सहमति से विवाद सुलझाने का प्रयास किया, लेकिन बात नहीं बनी। इसके बाद उसने राजस्व विभाग और तहसील स्तर पर भी आवेदन दिए, लेकिन अब तक कोई अंतिम समाधान नहीं निकल सका।
महिला का आरोप है कि जमीन का दावा छोड़ने के लिए उस पर दबाव बनाया जा रहा है, जिससे वह मानसिक और आर्थिक परेशानियों से गुजर रही है।
कलेक्टर से रखी ये मांगें
महिला ने जिला प्रशासन से मांग की है कि—
- मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
- पैतृक भूमि का सीमांकन कर कानूनी प्रक्रिया के अनुसार बंटवारा कराया जाए।
- प्रकरण के निराकरण तक भूमि की बिक्री, हस्तांतरण या अन्य लेन-देन पर रोक लगाई जाए।
- उसे और उसके बच्चों को कानून के अनुसार अधिकार दिलाया जाए।
अब प्रशासन की कार्रवाई पर नजर
विधवा महिला की शिकायत के बाद अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। राजस्व जांच और दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि भूमि विवाद में वास्तविक स्थिति क्या है और किसका कितना अधिकार बनता है। यह मामला एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में पैतृक संपत्ति के बंटवारे, महिलाओं के अधिकार और राजस्व विवादों के समय पर समाधान की जरूरत को सामने लाता है।
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