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अंबिकापुर@आजीवन कारावास प्राप्त दोषी पुलिस की गिरफ्त से निकला,अंबिकापुर में मचा हड़कंप

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  • पुलिस की गिरफ्त से कैसे निकला आजीवन कारावास प्राप्त दोषी? अंबिकापुर की कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल
  • खरसिया नाका ऑपरेशन में चूक या साजिश? पुलिस की पकड़ से निकला दोषी, जांच में कई एंगल
  • झारखंड पुलिस की कार्रवाई के दौरान आजीवन कारावास प्राप्त दोषी के फरार होने का दावा, खरसिया नाका की घटना से उठे कई सवाल
  • धनबाद पुलिस की दबिश के दौरान पुलिस कार्रवाई में बाधा के आरोप, देर रात तक संयुक्त सर्च ऑपरेशन, जांच के बाद ही होगी भूमिका स्पष्ट
  • झारखंड पुलिस की दबिश के दौरान आरोपी के फरार होने की पुष्टि, बाधा पहुंचाने वालों की भूमिका जांच के दायरे में
  • संयुक्त पुलिस कार्रवाई देर रात तक जारी,तकनीकी साक्ष्यों और वीडियो फुटेज की हो रही पड़ताल
  • झारखंड पुलिस ने घटना की पुष्टि की,कथित बाधा डालने वालों की पहचान और भूमिका की जांच शुरू
  • अंबिकापुर में मचा हड़कंप : आजीवन कारावास प्राप्त दोषी पुलिस की गिरफ्त से निकला…
  • पुलिस की गिरफ्त से कैसे निकला आजीवन कारावास प्राप्त दोषी? अंबिकापुर की कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल
  • खरसिया नाका ऑपरेशन में चूक या साजिश? पुलिस की पकड़ से निकला
  • दोषी,जांच में कई एंगल
  • झारखंड पुलिस की कार्रवाई के दौरान आजीवन कारावास प्राप्त दोषी के फरार होने का दावा,खरसिया नाका की घटना से उठे कई सवाल…
  • धनबाद पुलिस की दबिश के दौरान पुलिस कार्रवाई में बाधा के आरोप,देर रात तक संयुक्त सर्च ऑपरेशन,जांच के बाद ही होगी भूमिका स्पष्ट…
  • झारखंड पुलिस की दबिश के दौरान आरोपी के फरार होने की पुष्टि,बाधा पहुंचाने वालों की भूमिका
  • जांच के दायरे में…
  • संयुक्त पुलिस कार्रवाई देर रात तक जारी,तकनीकी साक्ष्यों और वीडियो
  • फुटेज की हो रही पड़ताल…
  • झारखंड पुलिस ने घटना की पुष्टि की, कथित बाधा डालने वालों की पहचान
  • और भूमिका की जांच शुरू…


-संवाददाता-
अंबिकापुर,30 जून 2026 (घटती-घटना)।
झारखंड के धनबाद जिले के चर्चित दोहरे हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा प्राप्त फरार दोषियों की तलाश में अंबिकापुर पहुंची झारखंड पुलिस की कार्रवाई अब पूरे सरगुजा संभाग में चर्चा का विषय बन गई है,खरसिया नाका क्षेत्र में सोमवार शाम हुई कार्रवाई के दौरान एक दोषी के पुलिस की पकड़ से निकल जाने के दावे ने कानून-व्यवस्था,अंतरराज्यीय पुलिस समन्वय तथा पुलिस कार्रवाई में कथित बाधा जैसे कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं,घटना के बाद झारखंड पुलिस और सरगुजा पुलिस की संयुक्त टीमों ने देर रात तक शहर सहित कई संभावित ठिकानों पर दबिश दी। समाचार लिखे जाने तक फरार आरोपी की गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी थी। पूरे मामले की जांच जारी है।
खरसिया नाका में हुई कार्रवाई बनी चर्चा का विषय-पुलिस सूत्रों के अनुसार झारखंड के धनबाद जिले के चर्चित वासेपुर हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा प्राप्त दो फरार दोषियों की तलाश के क्रम में धनबाद पुलिस को सूचना मिली थी कि वे लंबे समय से अंबिकापुर के खरसिया नाका क्षेत्र में रह रहे हैं,इसी सूचना के आधार पर सोमवार शाम करीब साढ़े पांच बजे झारखंड पुलिस की एक टीम खरसिया नाका स्थित एक मस्जिद के पास पहुंची और एक संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लेने की कार्रवाई की,सूत्रों का दावा है कि आरोपी को पुलिस वाहन तक ले जाया गया था,लेकिन इसी दौरान वहां मौजूद खूंखार बस संचालक एवं उसका सहयोगी बैतूल और कुछ लोगों ने पुलिस कार्रवाई का विरोध किया,बैतूल और उसके भाई और भतीजे सब मस्जिद से साथ में निकले…जैसे ही पुलिस ने उसे दबोच कर अपनी गाड़ी में बैठाया बैतूल और उसके परिवार के लोग पुलिस से विवाद करने लगे पुलिस की गाड़ी को घेर लिया,सूत्रों की माने तो आपस में गजब की हाथा पाई चली बैतूल गाड़ी के आगे लेट गया…पुलिस के लोग उस गाड़ी के आगे उठाने गए और इसी का फायदा उठाते हुए बाकी उसके भाई और जुनैद नामक बस संचालक खूंखार हत्यारे अपराधी को भगा दिया,भगाने वाला बस का संचालक बताया जाता है कि वहां से एसयूवी 700 में उड़ीसा भेज दिया गया है जहां पर साबिर खान का एक बेटा और बेटी रहते हैं, हालांकि इस संबंध में पुलिस ने अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और न ही किसी व्यक्ति की भूमिका को लेकर औपचारिक बयान जारी किया गया है,यह भी दावा किया जा रहा है कि आरोपी को जिले से बाहर ले जाया गया, लेकिन इस संबंध में भी पुलिस की ओर से कोई अधिकृत पुष्टि उपलब्ध नहीं है, झारखंड पुलिस का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की जानकारी तत्काल अंबिकापुर पुलिस को दे दी गई है तथा मामले की जांच जारी है,जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपी किस प्रकार फरार हुआ,किन परिस्थितियों में पुलिस कार्रवाई बाधित हुई और यदि किसी व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके विरुद्ध क्या कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
परिवहन व्यवसाय और संभावित संरक्षण के पहलू की भी जांच की मांग-पूरे घटनाक्रम के बाद पुलिस सूत्रों के हवाले से यह चर्चा सामने आई है कि फरार दोषियों के स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों से संपर्क होने की आशंका की भी जांच की जा रही है,सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या किसी व्यक्ति या समूह ने फरार दोषियों को शरण,आर्थिक सहायता अथवा अन्य प्रकार का सहयोग उपलब्ध कराया था,इसी क्रम में परिवहन व्यवसाय से जुड़े कुछ लोगों के नाम भी स्थानीय चर्चाओं में सामने आए हैं,हालांकि पुलिस ने अब तक किसी व्यक्ति की संलिप्तता की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और न ही किसी के विरुद्ध इस संबंध में कोई सार्वजनिक बयान जारी किया है,पुलिस का कहना है कि यदि जांच में किसी व्यक्ति की भूमिका प्रमाणित होती है तो उसके विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी, सूत्रों का यह भी कहना है कि जांच एजेंसियां संबंधित व्यक्तियों की व्यावसायिक गतिविधियों,आर्थिक लेन-देन तथा विभिन्न संस्थानों से जुड़े अनुबंधों की भी जानकारी जुटा सकती हैं,यदि जांच के दौरान इसकी आवश्यकता महसूस होती है, हालांकि इस संबंध में फिलहाल कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट या निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया गया है, घटना के बाद शहर में यह मांग भी उठ रही है कि यदि किसी व्यक्ति द्वारा फरार दोषियों को संरक्षण देने,पुलिस कार्रवाई में बाधा पहुंचाने या अवैध गतिविधियों में सहयोग करने के प्रमाण मिलते हैं, तो आयकर विभाग, जीएसटी विभाग और अन्य सक्षम एजेंसियां भी अपने अधिकार क्षेत्र के अनुसार जांच करें फिलहाल इन सभी पहलुओं की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
सूत्रों का बड़ा आरोप,पुलिस जांच के बाद ही होगी पुष्टि-इस पूरे घटनाक्रम को लेकर पुलिस सूत्रों के हवाले से कई गंभीर दावे भी सामने आ रहे हैं,सूत्रों का आरोप है कि फरार दोषियों के कुछ स्थानीय लोगों से लंबे समय से संपर्क रहे हो सकते हैं और इस नेटवर्क का इस्तेमाल परिवहन व्यवसाय में प्रभाव बनाए रखने के लिए किया जाता रहा,हालांकि इन आरोपों की अभी तक किसी जांच एजेंसी ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, सूत्रों का यह भी दावा है कि परिवहन व्यवसाय से जुड़े कुछ लोगों द्वारा प्रतिस्पर्धियों पर दबाव बनाने,उन्हें धमकाने तथा अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने जैसी शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं,इन दावों के संबंध में भी पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है और न ही किसी न्यायालय ने ऐसे आरोपों को सिद्ध माना है, घटना के बाद अब यह मांग उठ रही है कि यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि किसी व्यक्ति ने फरार दोषियों को संरक्षण दिया, पुलिस कार्रवाई में बाधा पहुंचाई या किसी अवैध गतिविधि में सहयोग किया,तो उसके विरुद्ध निष्पक्ष और कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए,अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि सरगुजा पुलिस इस मामले की जांच किस दिशा में आगे बढ़ाती है और जांच के आधार पर क्या कार्रवाई करती है,पुलिस का आधिकारिक पक्ष और जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही इन आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
सूचना पर अंबिकापुर पहुंची थी धनबाद पुलिस-पुलिस सूत्रों के अनुसार झारखंड के धनबाद जिले के वासेपुर क्षेत्र से जुड़े चर्चित दोहरे हत्याकांड में दोषसिद्ध दो फरार आरोपियों के अंबिकापुर में छिपे होने की सूचना झारखंड पुलिस को मिली थी,इसी सूचना के आधार पर धनबाद पुलिस की एक टीम स्थानीय पुलिस के समन्वय से सोमवार शाम लगभग साढ़े पांच बजे खरसिया नाका क्षेत्र में पहुंची, बताया जाता है कि पुलिस ने एक संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लेकर वाहन तक पहुंचा दिया था,इसी दौरान वहां मौजूद कुछ लोगों द्वारा पुलिस कार्रवाई का विरोध किए जाने की बात सामने आई है।
पुलिस कार्रवाई में बाधा के आरोप,जांच के बाद होगी पुष्टि- घटनास्थल पर मौजूद लोगों के बीच कथित विवाद और हाथापाई के दौरान आरोपी के पुलिस की पकड़ से निकल जाने का दावा किया जा रहा है, स्थानीय स्तर पर कई लोगों के नाम चर्चा में लिए जा रहे हैं तथा यह भी कहा जा रहा है कि आरोपी को जिले से बाहर भेज दिया गया,हालांकि इन सभी दावों की अभी तक पुलिस ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है,पुलिस का कहना है कि उपलब्ध वीडियो फुटेज,प्रत्यक्षदर्शियों के बयान तथा अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है,यदि जांच में किसी व्यक्ति द्वारा पुलिस कार्य में बाधा पहुंचाने या फरार आरोपी की सहायता करने के प्रमाण मिलते हैं,तो उसके विरुद्ध विधि अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
2001 के चर्चित धनबाद दोहरे हत्याकांड से जुड़ने का दावा
पुलिस सूत्रों के अनुसार पूरा मामला 18 अक्टूबर 2001 को धनबाद में हुए चर्चित दोहरे हत्याकांड से जुड़ा हुआ है, उपलब्ध न्यायालयीन अभिलेखों के अनुसार इस मामले में फहीम खान की मां नजमा खातून और उनकी मौसी शहनाज खातून की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी,बताया जाता है कि 20 मार्च 2007 को न्यायालय ने इस मामले में कुछ आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी,सूत्रों का दावा है कि सजा के बाद कुछ दोषी गिरफ्तारी से बचते रहे तथा समय-समय पर उनके छत्तीसगढ़ में रहने की सूचनाएं झारखंड पुलिस को मिलती रहीं। इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी जांच का विषय है।
स्थानीय संपर्कों और संभावित संरक्षण की भी पड़ताल…
पुलिस सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसियां इस पहलू की भी जांच कर रही हैं कि फरार दोषियों को स्थानीय स्तर पर किसी प्रकार का संरक्षण,आर्थिक सहयोग अथवा ठिकाना उपलब्ध कराया गया था या नहीं,सूत्रों के अनुसार संभावित संपर्कों, आर्थिक गतिविधियों,आवागमन तथा परिवहन व्यवसाय से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा सकती है,हालांकि पुलिस ने किसी व्यक्ति या संस्था की संलिप्तता की पुष्टि नहीं की है।
झारखंड पुलिस ने घटना की पुष्टि की…
दैनिक घटती-घटना से बातचीत में झारखंड पुलिस के सब-इंस्पेक्टर श्रीनिवास राव ने पुष्टि की कि कार्रवाई के दौरान आरोपी पुलिस की पकड़ से निकल गया,उन्होंने बताया कि पूरे घटनाक्रम की जानकारी तत्काल अंबिकापुर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी गई है,जब उनसे पूछा गया कि आरोपी को भगाने वाले लोग कौन थे,तो उन्होंने कहा कि वे स्थानीय क्षेत्र के निवासी नहीं हैं,इसलिए किसी व्यक्ति की पहचान नहीं कर सके, उन्होंने कहा कि आगे की कार्रवाई सरगुजा पुलिस के सहयोग से जारी है।
रातभर चला संयुक्त सर्च ऑपरेशन…
घटना के बाद झारखंड और छत्तीसगढ़ पुलिस की संयुक्त टीमों ने कई संभावित ठिकानों पर दबिश दी,पुलिस सूत्रों के अनुसार अनेक लोगों से पूछताछ की गई तथा आरोपी के संभावित संपर्कों की जानकारी जुटाई जा रही है, पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपी को भागने में किसी प्रकार की सहायता मिली थी अथवा नहीं।
पुलिस कार्य में बाधा डालने वालों पर कार्रवाई की मांग…
घटना के बाद शहर में यह मांग भी उठने लगी है कि यदि जांच में यह सिद्ध होता है कि किसी व्यक्ति ने पुलिस की वैध कार्रवाई में बाधा पहुंचाई अथवा दोषसिद्ध आरोपी को फरार होने में मदद की,तो उसके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए,कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर पुलिस कार्य में बाधा डालता है या आरोपी को भगाने में सहयोग करता है,तो उसके विरुद्ध अलग से आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जा सकता है,हालांकि ऐसी कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों पर निर्भर करेगी।
अंतरराज्यीय पुलिस समन्वय पर भी उठे सवाल…
पूरी घटना ने अंतरराज्यीय पुलिस समन्वय की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े किए हैं,यदि किसी दूसरे राज्य की पुलिस न्यायालय के आदेश के पालन में कार्रवाई करने आती है और उसके सामने आरोपी फरार हो जाता है,तो यह स्वाभाविक रूप से सुरक्षा व्यवस्था और समन्वय की समीक्षा का विषय बन जाता है, पुलिस अधिकारियों का मानना है कि ऐसे मामलों में स्थानीय पुलिस के साथ बेहतर समन्वय,पर्याप्त बल और पूर्व सुरक्षा व्यवस्था आवश्यक होती है।
जांच पूरी होने के बाद ही होगी स्थिति स्पष्ट…
फिलहाल पूरे मामले की जांच प्रारंभिक चरण में है, पुलिस उपलब्ध वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान,तकनीकी साक्ष्यों तथा अन्य सूचनाओं के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कडि़यां जोड़ रही है,समाचार लिखे जाने तक न तो झारखंड पुलिस और न ही सरगुजा पुलिस की ओर से विस्तृत प्रेस नोट जारी किया गया था,ऐसे में आरोपी के फरार होने की वास्तविक परिस्थितियां,पुलिस कार्रवाई में कथित बाधा और किसी भी व्यक्ति की संभावित भूमिका का अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।


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