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कोरिया/सोनहत@ रेत पर सख्ती,लेकिन व्यवस्था गायब!

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  • आखिर प्रधानमंत्री आवास बनेंगे कैसे?
  • सोनहत में एक भी वैध रेत खदान नहीं…कार्रवाई तेज…निर्माण कार्यों पर गहराया संकट
  • रेत जब्त…निर्माण ठप्प! कानून तो बना…लेकिन समाधान कहाँ?
  • अवैध उत्खनन पर कार्रवाई जारी,पीएम आवास समेत सरकारी परियोजनाओं पर मंडराया संकट…
  • रेत पर डंडा,गरीब पर मार! प्रधानमंत्री आवास योजना पर खड़ा हुआ बड़ा सवाल
  • वैध रेत उपलब्ध कराए बिना सख्ती से विकास कार्यों पर लग सकता है ब्रेक
  • न रेत खदान,न वैकल्पिक व्यवस्था… फिर कैसे बनेगा गरीब का पक्का घर?

-राजन पाण्डेय-
कोरिया/सोनहत,30 जून (घटती-घटना)।
नौगई घटना के बाद कोरिया जिले में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन के खिलाफ प्रशासन ने जिस तेजी से अभियान छेड़ा है,वह कानून के लिहाज से उचित माना जा सकता है,खनिज विभाग,वन विभाग और पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। शासन ने नए नियम लागू कर जुर्माने और सुरक्षा राशि को कई गुना बढ़ा दिया है, अवैध परिवहन करने वालों पर भारी आर्थिक दंड लगाया जा रहा है और वाहन तक जब्त किए जा रहे हैं,लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन ने कार्रवाई शुरू करने से पहले यह भी सोचा कि पूरे सोनहत विकासखंड में वैध रेत मिलेगी कहाँ से? यदि पूरे क्षेत्र में एक भी अधिकृत रेत खदान संचालित नहीं है,तो प्रधानमंत्री आवास योजना, पंचायत भवन,स्कूल,पुल-पुलिया,आंगनबाड़ी और आम नागरिकों के मकानों का निर्माण आखिर किस रेत से होगा? क्या सरकार केवल कार्रवाई करना चाहती है या समाधान भी देना चाहती है?
रेत रोक दी,लेकिन विकल्प देना भूल गए?
अवैध खनन रोकना सरकार का दायित्व है,लेकिन उससे भी बड़ा दायित्व वैध व्यवस्था उपलब्ध कराना है,आज सोनहत की स्थिति यह है कि प्रशासन एक ओर रेत लेकर चलने वाले वाहनों को पकड़ रहा है,दूसरी ओर पूरे क्षेत्र में ऐसा कोई अधिकृत स्रोत उपलब्ध नहीं है,जहां से आम नागरिक या निर्माण एजेंसियां कानूनी रूप से रेत खरीद सकें,यानी कानून तो लागू कर दिया गया,लेकिन व्यवस्था शून्य छोड़ दी गई, ऐसे में सबसे बड़ा खामियाजा उन गरीब परिवारों को भुगतना पड़ेगा,जो प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अपना पहला पक्का घर बनाने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
क्या प्रधानमंत्री आवास भी अब कागजों में ही बनेंगे?
सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर गरीबों को पक्का मकान देने का दावा करती है,अधिकारियों की बैठकों में निर्माण लक्ष्य तय होते हैं,प्रगति रिपोर्ट भेजी जाती है और समय सीमा का दबाव बनाया जाता है,लेकिन ज़मीनी सच्चाई यह है कि यदि रेत ही उपलब्ध नहीं होगी तो निर्माण कैसे होगा? क्या हितग्राही मिट्टी,पत्थर या कल्पना से मकान बनाएंगे? यदि निर्माण कार्य रुकता है तो क्या प्रशासन इसकी जिम्मेदारी स्वीकार करेगा?
गरीब फंसा,माफिया नहीं…
सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि इस सख्ती का सबसे बड़ा असर उन लोगों पर पड़ रहा है जिनका अवैध कारोबार से कोई संबंध नहीं है,प्रधानमंत्री आवास का हितग्राही, गांव का छोटा किसान, मजदूर या अपना घर बना रहा परिवार अब सबसे अधिक परेशान है, रेत खरीदने के लिए वैध खदान नहीं, दूसरी जगह से लाने पर कार्रवाई का डर, और निर्माण रोक देने पर योजना की समय सीमा का दबाव, यानी हर तरफ से मार केवल आम आदमी पर पड़ रही है।
सरकारी निर्माण भी सवालों के घेरे में…
केवल प्रधानमंत्री आवास ही नहीं,बल्कि पंचायत भवन,स्कूल,पुल-पुलिया, आंगनबाड़ी,सीसी रोड और अन्य सरकारी निर्माण कार्य भी रेत के बिना अधर में लटक सकते हैं,यदि सरकारी विभागों के पास भी वैध रेत उपलब्ध कराने की कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं है,तो विकास कार्यों की गति प्रभावित होना तय माना जा रहा है।
प्रशासन जवाब दे…
पूरे सोनहत में अधिकृत रेत खदान कब शुरू होगी?
तब तक रेत कहां से मिलेगी?
प्रधानमंत्री आवास हितग्राहियों के लिए अलग व्यवस्था क्यों नहीं बनाई गई?
क्या सरकार निर्माण कार्य रोकने की जिम्मेदारी स्वीकार करेगी?
क्या गरीबों को केवल नियमों का पालन करना है या सरकार भी अपनी जिम्मेदारी निभाएगी?

कार्रवाई नहीं, समाधान चाहिए…
अवैध खनन पर कठोर कार्रवाई होनी ही चाहिए,इसमें किसी को आपत्ति नहीं हो सकती,लेकिन यदि सरकार वैध व्यवस्था बनाए बिना केवल प्रतिबंध और दंड का रास्ता अपनाती है,तो इसका सबसे बड़ा नुकसान विकास कार्यों और गरीबों को ही उठाना पड़ेगा,कानून का उद्देश्य व्यवस्था बनाना होता है, व्यवस्था खत्म करना नहीं।
सवाल जो पूरे जिले में गूंज रहा है…
जब पूरे सोनहत में एक भी वैध रेत खदान नहीं है, तो प्रधानमंत्री आवास,सरकारी भवन और गरीबों के मकान आखिर किस रेत से बनेंगे? जब तक प्रशासन इस प्रश्न का ठोस उत्तर नहीं देता और वैध रेत आपूर्ति की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं करता,तब तक रेत पर चल रही कार्रवाई अधूरी ही मानी जाएगी,क्योंकि केवल जब्ती और जुर्माने से विकास नहीं होता,विकास के लिए संसाधनों की वैध उपलब्धता भी उतनी ही आवश्यक है।


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