नई दिल्ली,14 जून 2026। देश की आंतरिक सुरक्षा और जनसांख्यिकीय संतुलन को बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने एक बेहद बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश की जनसंख्या संरचना (डेमोग्राफी) में आ रहे अप्रत्याशित बदलावों का गहन अध्ययन करने के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति को सीमा से सटे संवेदनशील जिलों पर विशेष ध्यान केंद्रित करने का सख्त निर्देश दिया है। गृह मंत्री ने समिति के सदस्यों से स्पष्ट रूप से कहा है कि वे देश के सीमावर्ती इलाकों, बड़े महानगरों और प्रमुख औद्योगिक शहरों का जमीनी दौरा करें। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य यह सटीक पता लगाना है कि अवैध प्रवास (इलीगल माइग्रेशन) और अन्य बाहरी कारणों से इन क्षेत्रों की मूल जनसंख्या संरचना में किस तरह के गंभीर बदलाव आ रहे हैं।
अवैध प्रवास और डेमोग्राफी चेंज की समीक्षा के लिए बनी समिति : गृह मंत्रालय ने पिछले महीने देश के भीतर अवैध प्रवासन और अन्य असामान्य कारणों से हो रहे जनसंख्या परिवर्तनों का वैज्ञानिक अध्ययन करने के लिए इस विशेष उच्चस्तरीय समिति का औपचारिक गठन किया था। इस समिति की मुख्य जिम्मेदारी डेमोग्राफी में आ रहे इन बदलावों के पीछे छिपे वास्तविक कारणों की पहचान करना और उनसे प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सरकार को ठोस सुझाव देना है।
सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नाओलेकर को इस महत्वपूर्ण समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। समिति के अन्य प्रतिष्ठित सदस्यों में देश के वर्तमान जनगणना आयुक्त, पूर्व आईएएस अधिकारी दुर्गा शंकर मिश्रा, पूर्व आईपीएस अधिकारी बालाजी श्रीवास्तव और प्रसिद्ध अर्थशास्त्री डॉ. शामिका रवि शामिल हैं, जबकि गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव (विदेशी-1) को सदस्य सचिव की जिम्मेदारी दी गई है।
राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता और सामाजिक संतुलन पर व्यापक विश्लेषण
इस समिति के गठन के समय गृह मंत्री अमित शाह ने रेखांकित किया था कि जनसंख्या संरचना में आ रहा कोई भी असामान्य बदलाव एक बेहद संवेदनशील और गंभीर विषय है। इसका सीधा और गहरा संबंध देश की संप्रभुता, राष्ट्रीय सुरक्षा, कानून-व्यवस्था, सामाजिक ताने-बाने और विशेष रूप से आदिवासी समाज की विशिष्ट पहचान तथा उनके संरक्षण से जुड़ा हुआ है। अमित शाह के विजन के अनुसार, यह समिति न केवल देशभर में हो रहे भौगोलिक जनसंख्या परिवर्तनों का व्यापक अध्ययन करेगी, बल्कि विभिन्न धार्मिक और सामाजिक समुदायों के स्तर पर हो रहे असामान्य तथा अचानक आए जनसांख्यिकीय बदलावों का भी बारीकी से विश्लेषण करेगी। इसके बाद समिति सरकार को एक समयबद्ध कार्ययोजना और उचित समाधान सौंपेगी।
असामान्य बसावट और सीमा पार गतिविधियों की वैज्ञानिक जांच
केंद्र सरकार का मानना है कि विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में हो रहे जनसंख्या असंतुलन का वैज्ञानिक और सांख्यिकीय तरीके से मूल्यांकन किया जाना अत्यंत आवश्यक है। इसके तहत देश में होने वाले अवैध प्रवास, सीमा पार से होने वाली संदिग्ध गतिविधियां, स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर और अन्य महत्वपूर्ण सामाजिक व पर्यावरणीय कारकों की गहराई से जांच की जाएगी। यह उच्चस्तरीय समिति इस बात का भी विशेष रूप से पता लगाएगी कि देश के किन हिस्सों में किसी सुनियोजित प्रवासन (प्लांड माइग्रेशन) या असामान्य बसावट के कारण स्थानीय डेमोग्राफी बदल रही है। समिति उन विशिष्ट पॉकेट्स का विशेष रूप से अध्ययन करेगी, जहां जनसंख्या वृद्धि दर सामान्य राष्ट्रीय रुझानों से काफी अलग और चौंकाने वाली दिखाई देती है।
अवैध प्रवासियों की पहचान और समयबद्ध निर्वासन के लिए स्थायी व्यवस्था
इस पूरे अध्ययन का एक मुख्य व्यावहारिक उद्देश्य देश की कानूनी व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाना है। समिति भारत में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों और प्रवासियों की पूरी तरह से कानूनी, निष्पक्ष और पारदर्शी पहचान करने के तरीकों पर काम करेगी। इसके साथ ही, उन्हें हिरासत में लेने और एक निश्चित समय सीमा के भीतर उनके गृह देश वापस भेजने (निर्वासन) की जटिल प्रशासनिक प्रक्रिया को अधिक सुगम, त्वरित और प्रभावी बनाने के लिए एक मजबूत स्थायी व्यवस्था तैयार करने की सिफारिशें भी केंद्र सरकार को सौंपेगी ताकि देश की आंतरिक सुरक्षा अभेद्य बनी रहे।
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