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सूरजपुर @ रेल की पटरी से कलेक्ट्रेट तक गूंजा किसानों का आक्रोश

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जमीन, खाद और हक की लड़ाई में कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन
प्रेमनगर में रेल रोको,सूरजपुर में कलेक्ट्रेट घेराव,
अडाणी को भूमि हस्तांतरण,खाद कटौती,
बिजली दर वृद्धि समेत 21 मांगों पर सरकार को घेरा
-संवाददाता-
सूरजपुर,08 जून 2026(घटती-घटना)।
सोमवार का दिन सूरजपुर जिले में किसानों,ग्रामीणों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए आंदोलन का दिन रहा, एक ओर प्रेमनगर क्षेत्र में हजारों ग्रामीणों ने रेलवे ट्रैक पर बैठकर रेल रोको आंदोलन किया तो दूसरी ओर जिला मुख्यालय सूरजपुर में किसान कांग्रेस ने कलेक्ट्रेट का घेराव कर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा,दोनों आंदोलनों का केंद्र बिंदु एक ही था—जल, जंगल,जमीन और किसानों के अधिकारों की रक्षा,कांग्रेस संगठन और किसान कांग्रेस के नेतृत्व में हुए इन आंदोलनों ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि ग्रामीण अंचलों में भूमि,रोजगार,मुआवजा,खाद,बिजली और सिंचाई जैसी मूलभूत समस्याएं अब राजनीतिक बहस से आगे बढ़कर जन आंदोलन का रूप लेती जा रही हैं।
प्रेमनगर में अडाणी को भूमि हस्तांतरण के विरोध में रेल रोको आंदोलन-
प्रेमनगर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम सलका स्थित एल-सी-10 रेलवे फाटक पर जिला कांग्रेस अध्यक्ष शशि सिंह के नेतृत्व में प्रभावित छह ग्राम पंचायतों—सलका,नमना,रघुनाथपुर,मुड़गांव,नारायणपुर और कठमुड़ा—के हजारों ग्रामीण एकत्रित हुए,ग्रामीणों का आरोप है कि इफको पावर प्लांट के लिए पूर्व में अधिग्रहित की गई भूमि को अब अडाणी समूह को सौंपे जाने की प्रक्रिया चल रही है,इस निर्णय का विरोध करते हुए ग्रामीण रेलवे ट्रैक पर बैठ गए और रेल रोको आंदोलन किया,प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी करते हुए ग्रामीणों ने कहा कि जिन किसानों ने विकास और उद्योग के नाम पर अपनी जमीनें गंवाई थीं,उनकी जमीनें किसी अन्य निजी कंपनी को हस्तांतरित नहीं की जानी चाहिए,ग्रामीणों ने इसे किसानों और आदिवासियों के अधिकारों के साथ अन्याय बताया।
कांग्रेस ने किसानों और ग्रामीणों के मुद्दों को बनाया आंदोलन का आधार
दोनों आंदोलनों में कांग्रेस और किसान कांग्रेस के प्रदेश,जिला एवं ब्लॉक स्तर के नेताओं की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली,प्रेमनगर में जिला कांग्रेस अध्यक्ष शशि सिंह के नेतृत्व में हजारों ग्रामीण शामिल हुए, वहीं सूरजपुर में किसान कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष विमलेश तिवारी, प्रदेश महासचिव जसवंत सिंह,बृजेश मिश्रा,दीपक मानिकपुरी,दिलीप सोनी,जिला किसान कांग्रेस अध्यक्ष सचिंद्र पाठक,कार्यकारी अध्यक्ष लक्ष्मण राजवाड़े सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी मौजूद रहे।
15 दिनों का अल्टीमेटम,नहीं मानी मांगें तो अनिश्चितकालीन आंदोलन
आंदोलन के दौरान तहसीलदार को राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया,ग्रामीणों और कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन को 15 दिनों का समय देते हुए चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो क्षेत्र में अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा,ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में भूमि वापसी, परसा कोल ब्लॉक प्रभावितों को लंबित मुआवजा भुगतान, ग्राम सभाओं को वन कटाई राशि का 30 प्रतिशत हिस्सा,स्थानीय युवाओं को रोजगार,सड़क निर्माण,ओवरब्रिज निर्माण, हैंडपंप स्थापना और लिफ्ट इरिगेशन योजना लागू करना शामिल है।
सूरजपुर कलेक्ट्रेट में किसान कांग्रेस का प्रदर्शन
उधर जिला मुख्यालय सूरजपुर में छत्तीसगढ़ किसान कांग्रेस के प्रदेशव्यापी कार्यक्रम के तहत किसान कांग्रेस ने कलेक्ट्रेट का घेराव कर मुख्यमंत्री के नाम 12 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा,किसान कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि खेती-किसानी पहले ही बढ़ती लागत और प्राकृतिक चुनौतियों से जूझ रही है,ऐसे समय में खाद वितरण में कटौती और नई व्यवस्थाएं किसानों की परेशानी बढ़ा रही हैं,ज्ञापन में प्रति एकड़ खाद कटौती का आदेश वापस लेने,तीन चरणों में खाद वितरण की व्यवस्था समाप्त करने,डीजल-पेट्रोल की सुलभ उपलब्धता सुनिश्चित करने, जरकिन में तेल लेने पर लगी रोक हटाने, बिजली दर वृद्धि वापस लेने तथा किसानों को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने की मांग की गई।
खाद,बिजली और ऋ ण पर सरकार को घेरा
किसान कांग्रेस ने खाद की कालाबाजारी पर तत्काल रोक लगाने और पूरे प्रदेश में एक समान दर लागू करने की मांग उठाई, साथ ही किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋ ण सीमा बढ़ाकर प्रति एकड़ 40 हजार रुपये करने की मांग भी रखी गई, किसानों ने कृषि उपज का भुगतान एकमुश्त करने,कृषि विभाग की योजनाओं में पारदर्शिता लाने तथा लंबित अनुदान राशि का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल की, किसान नेताओं का कहना था कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि किसानों को मिलने वाली सुविधाएं और संसाधन सीमित होते जा रहे हैं, यदि सरकार ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए तो कृषि क्षेत्र में संकट और गहरा सकता है।
सूरजपुर से उठी दोहरी हुंकार
सोमवार को सूरजपुर जिले में हुए ये दोनों आंदोलन केवल राजनीतिक कार्यक्रम नहीं रहे, बल्कि ग्रामीण और किसान समाज की उन समस्याओं को सामने लेकर आए जो लंबे समय से समाधान की प्रतीक्षा कर रही हैं, एक ओर जमीन और विस्थापन का सवाल है,तो दूसरी ओर खाद, बिजली, सिंचाई और कृषि ऋण जैसी बुनियादी जरूरतों का मुद्दा,रेलवे ट्रैक से लेकर कलेक्ट्रेट परिसर तक गूंजे नारों ने साफ संकेत दिया है कि यदि किसानों और ग्रामीणों की मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और व्यापक स्वरूप ले सकता है, फिलहाल सूरजपुर जिले से उठी यह आवाज प्रदेश की राजनीति और प्रशासन दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश बनकर सामने आई है।


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