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कोरिया@ सड़क बन रही थी विकास की…मौत बनकर पहुंच गया हाथी…

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आधी रात के हमले में दो मजदूरों की दर्दनाक मौत
गहरी नींद में सो रहे श्रमिकों पर लोनर हाथी का हमला, एक की मौके पर मौत, दूसरे ने अस्पताल जाते समय तोड़ा दम
-संवाददाता-
कोरिया,08 जून 2026 (घटती-घटना)।
गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व क्षेत्र में रविवार की आधी रात ऐसा दर्दनाक मंजर सामने आया जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया, जिस सड़क को विकास की नई राह माना जा रहा है, उसी सड़क निर्माण शिविर में काम कर रहे दो मजदूरों की जिंदगी एक बेकाबू लोनर हाथी ने पलभर में छीन ली। दिनभर कड़ी मेहनत के बाद गहरी नींद में सोए मजदूरों को शायद अंदाजा भी नहीं था कि रात उनके लिए आखिरी रात साबित होगी।
कटवार (रामगढ़) से कोटाडोल तक लगभग 46 करोड़ रुपये की लागत से सड़क निर्माण का कार्य चल रहा है, निर्माण स्थल पर दर्जनों मजदूर अस्थायी शिविर में रहकर काम कर रहे थे, रविवार की रात भी मजदूर रोज की तरह भोजन करने के बाद आराम कर रहे थे,चारों ओर सन्नाटा था,लेकिन जंगल की खामोशी में एक ऐसा खतरा छिपा था जिसने कुछ ही देर में पूरे शिविर को चीख-पुकार से भर दिया।
जानकारी के अनुसार कमर्जी परिक्षेत्र के अंतर्गत देवशील के आगे स्थित बस्ती के समीप अचानक एक लोनर हाथी निर्माण शिविर में पहुंच गया, प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हाथी सीधे उस स्थान की ओर बढ़ा जहां मजदूर सो रहे थे,कुछ लोगों को संभलने का मौका मिला, लेकिन दो मजदूर उसकी चपेट में आ गए। हाथी ने उन्हें बुरी तरह कुचल दिया। हमले में ग्राम नगर, जिला कोरिया निवासी 22 वर्षीय गौरव पिता पूरन और 35 वर्षीय अमर सिंह पिता जयकरण गंभीर रूप से घायल हो गए, शिविर में मौजूद अन्य मजदूरों में अफरा-तफरी मच गई। लोग जान बचाने के लिए अंधेरे में इधर-उधर भागने लगे। कुछ मजदूरों ने शोर मचाकर हाथी को भगाने का प्रयास किया,लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
एक ने मौके पर तोड़ा दम,दूसरा अस्पताल पहुंचने से पहले हार गया जिंदगी की जंग
हाथी के हमले में गौरव की घटनास्थल पर ही मौत हो गई,वहीं गंभीर रूप से घायल अमर सिंह को तत्काल उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सोनहत ले जाया गया,वन विभाग की टीम और स्थानीय लोगों ने घायल को बचाने की हर संभव कोशिश की,लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही अमर सिंह ने रास्ते में दम तोड़ दिया, इस तरह एक ही रात में दो परिवारों के घरों के चिराग बुझ गए, सोमवार को दोनों शवों का पोस्टमार्टम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सोनहत में कराया गया और बाद में शव परिजनों को सौंप दिए गए।
वन विभाग ने चलाया रेस्क्यू अभियान
घटना की सूचना मिलते ही गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व और वनमंडल का मैदानी अमला मौके पर पहुंच गया,अधिकारियों के अनुसार वन विभाग की टीम पिछले एक दिन से उक्त लोनर हाथी की लगातार ट्रैकिंग कर रही थी,घटना की रात भी क्षेत्र में हाथी की गतिविधियों पर निगरानी रखी जा रही थी, हमले की जानकारी मिलते ही वन विभाग का दल तत्काल निर्माण शिविर पहुंचा और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया, विभागीय पेट्रोलिंग वाहन के माध्यम से घायल मजदूर को अस्पताल पहुंचाया गया,लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी,वन विभाग ने जनहानि मुआवजा प्रकरण तैयार करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
15 किलोमीटर दूर पहुंचा हाथी,अलर्ट पर वन अमला
घटना के बाद भी हाथी क्षेत्र में विचरण करता रहा,वन विभाग के अनुसार सोमवार को उक्त लोनर हाथी घटनास्थल से लगभग 15 किलोमीटर दूर जनकपुर परिक्षेत्र में देखा गया,वन अधिकारियों का अनुमान है कि हाथी अब मध्यप्रदेश की सीमा की ओर बढ़ सकता है,इसके बावजूद पूरे क्षेत्र में अलर्ट जारी कर दिया गया है और ग्रामीणों को जंगल किनारे जाने तथा रात के समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
परिजनों पर टूटा दुखों का पहाड़
गौरव और अमर सिंह दोनों ही अपने परिवारों के सहारा थे। रोजी-रोटी कमाने के लिए घर से दूर निर्माण कार्य में लगे इन मजदूरों के परिजनों ने कभी नहीं सोचा होगा कि मेहनत-मजदूरी करने गए उनके अपने वापस कभी घर नहीं लौटेंगे,एक ओर जहां परिवारों में मातम पसरा हुआ है,वहीं पूरे क्षेत्र में घटना को लेकर शोक की लहर है।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
यह घटना केवल एक वन्यजीव हमले की घटना नहीं है, बल्कि वन क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा करती है, जिस इलाके में हाथियों की नियमित आवाजाही रहती है, वहां निर्माण कार्य में लगे मजदूरों की सुरक्षा के लिए क्या पर्याप्त इंतजाम किए गए थे? क्या हाथी की गतिविधियों की सूचना मजदूरों तक समय पर पहुंचाई गई थी? क्या रात्रिकालीन सुरक्षा के लिए पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था और निगरानी तंत्र मौजूद था? इन सवालों के जवाब तलाशना अब जरूरी हो गया है क्योंकि जंगलों से लगे इलाकों में सड़क, खदान और अन्य परियोजनाओं में सैकड़ों मजदूर काम करते हैं और उनकी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
तत्काल मुआवजा और सुरक्षा व्यवस्था की मांग
कोरिया जन सहयोग समिति के अध्यक्ष पुष्पेंद्र राजवाड़े ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है,उन्होंने मृतक मजदूरों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए शासन और वन विभाग से दोनों परिवारों को नियमानुसार तत्काल मुआवजा राशि उपलब्ध कराने की मांग की है,उन्होंने कहा कि परिवार के कमाऊ सदस्यों की असमय मृत्यु ने परिजनों को गहरे संकट में डाल दिया है,इसलिए प्रशासन को मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए त्वरित आर्थिक सहायता प्रदान करनी चाहिए,साथ ही वन्यजीव प्रभावित क्षेत्रों में कार्यरत मजदूरों की सुरक्षा के लिए स्थायी और प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व क्षेत्र में यह घटना एक बार फिर उस जटिल चुनौती को सामने लेकर आई है जहां विकास परियोजनाएं और वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास आमने-सामने दिखाई देते हैं,सड़कें बन रही हैं, परियोजनाएं आगे बढ़ रही हैं,लेकिन जंगलों के पुराने रास्तों पर आज भी हाथियों का अधिकार कायम है,दुर्भाग्य यह है कि इस संघर्ष की सबसे बड़ी कीमत अक्सर वे मजदूर चुकाते हैं जो केवल अपने परिवार का पेट पालने के लिए जंगलों के बीच काम करने पहुंचते हैं,रविवार की रात भी ऐसा ही हुआ,जब विकास की राह बनाने निकले दो मजदूर खुद जिंदगी की राह से हमेशा के लिए दूर चले गए।


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