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बैकुंठपुर@ नर्सिंग कॉलेज या फिर एक और गलत स्थल चयन,युवा नेता राजीव गुप्ता ने उठाए ऐसे सवाल,जिन पर बहस होना जरूरी

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महाविद्यालय कैंपस में एसपी ऑफिस,रेस्ट हाउस में नालंदा परिसर, अब 12 किलोमीटर दूर नर्सिंग कॉलेज?
भूमिपूजन के बाद बैकुंठपुर में छिड़ी नई बहस, विकास कार्य पर नहीं बल्कि स्थान चयन पर उठ रहे सवाल
-रवि सिंह-
बैकुंठपुर, 05 जून 2026 (घटती-घटना)।
किसी भी जिले के लिए नर्सिंग कॉलेज का निर्माण केवल एक भवन निर्माण परियोजना नहीं होता, बल्कि यह भविष्य की स्वास्थ्य व्यवस्था,चिकित्सा शिक्षा और स्थानीय युवाओं के रोजगार से जुड़ा एक महत्वपूर्ण संस्थान होता है,यही कारण है कि बैकुंठपुर में प्रस्तावित नर्सिंग कॉलेज और छात्रावास का भूमिपूजन होने के बाद जहां एक ओर लोग इस परियोजना का स्वागत कर रहे हैं,वहीं दूसरी ओर इसके लिए चुनी गई भूमि को लेकर गंभीर सवाल भी उठने लगे हैं, इन सवालों को सबसे प्रमुखता से कांग्रेस के युवा नेता राजीव गुप्ता ने उठाया है,उन्होंने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट लिखकर न केवल नर्सिंग कॉलेज के प्रस्तावित स्थल पर आपत्ति दर्ज की है,बल्कि जिले में पिछले वर्षों में लिए गए कई प्रशासनिक और राजनीतिक फैसलों को भी इस बहस से जोड़ दिया है,उनकी पोस्ट अब केवल सोशल मीडिया की चर्चा नहीं रह गई है, बल्कि बैकुंठपुर और आसपास के क्षेत्रों में जनचर्चा का विषय बन चुकी है।
विकास पर नहीं,स्थान चयन पर सवाल
राजीव गुप्ता ने स्पष्ट किया है कि उनका विरोध नर्सिंग कॉलेज निर्माण का नहीं है,उनका कहना है कि जिले को नर्सिंग कॉलेज मिलना एक बड़ी उपलब्धि है और इसका स्वागत किया जाना चाहिए,लेकिन उनका सवाल यह है कि आखिर ऐसा महत्वपूर्ण संस्थान ऐसी जगह क्यों बनाया जा रहा है,जहां पहुंचना ही कठिन हो, जहां से जिला अस्पताल लगभग 12 किलोमीटर दूर हो और जहां छात्राओं की सुरक्षा तथा आवागमन को लेकर गंभीर चिंताएं मौजूद हों,उनका तर्क है कि यदि नर्सिंग कॉलेज का मुख्य उद्देश्य चिकित्सा शिक्षा देना और छात्रों को अस्पताल आधारित प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है,तो उसका जिला अस्पताल के आसपास होना ज्यादा व्यावहारिक और उपयोगी होगा।
अब प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर टिकी निगाहें…
नर्सिंग कॉलेज जिले के लिए एक महत्वपूर्ण सौगात है और अधिकांश लोग इसके निर्माण के पक्ष में हैं, लेकिन अब बहस इस बात पर केंद्रित हो चुकी है कि क्या चयनित भूमि वास्तव में सबसे उपयुक्त भूमि है? यदि प्रशासन के पास इसके पक्ष में मजबूत तकनीकी,भौगोलिक और शैक्षणिक तर्क हैं तो उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए,वहीं यदि बेहतर विकल्प मौजूद हैं तो उन पर भी विचार किया जाना चाहिए, फिलहाल बैकुंठपुर में एक ही सवाल गूंज रहा है क्या नर्सिंग कॉलेज भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया जा रहा है, या फिर आने वाले वर्षों में यह भी उन संस्थानों की सूची में शामिल हो जाएगा जिनके बारे में लोग कहते हैं इमारत तो बन गई,लेकिन जगह गलत चुन ली गई?
जूनापारा-सरड़ी की जमीन पर उठे सवाल
राजीव गुप्ता के अनुसार प्रस्तावित नर्सिंग कॉलेज का स्थल शिवपुर से लगे जूनापारा-सरड़ी क्षेत्र में स्थित है, उन्होंने दावा किया है कि यह स्थान आबादी से दूर, अपेक्षाकृत सुनसान और सुविधाओं से वंचित है,उन्होंने सवाल उठाया कि जिस संस्थान में बड़ी संख्या में छात्राएं अध्ययन करेंगी, उनके लिए सुरक्षित और सुगम पहुंच वाला स्थान अधिक उपयुक्त होना चाहिए, उन्होंने यह भी कहा कि जिस जगह का चयन किया गया है,वहां अभी तक बुनियादी सुविधाओं का पर्याप्त विकास नहीं हुआ है, ऐसे में आने वाले वर्षों में कॉलेज संचालन को लेकर भी व्यावहारिक चुनौतियां सामने आ सकती हैं।
50 साल पुराने खेल मैदान पर संकट
विवाद का सबसे संवेदनशील पहलू खेल मैदान को लेकर सामने आया है,ग्रामीणों का दावा है कि जिस भूमि का चयन नर्सिंग कॉलेज निर्माण के लिए किया गया है,वहां पिछले लगभग 50 वर्षों से खेल गतिविधियां संचालित होती रही हैं,आसपास के गांवों के युवाओं और खिलाडि़यों के लिए यही प्रमुख खेल मैदान है,स्थानीय खिलाडि़यों का कहना है कि वर्तमान समय में युवाओं को खेलों से जोड़ने की आवश्यकता है। ऐसे समय में यदि क्षेत्र का एकमात्र बड़ा मैदान समाप्त हो जाता है तो इसका सीधा असर ग्रामीण खेल संस्कृति पर पड़ेगा, ग्रामीणों ने मांग की है कि नर्सिंग कॉलेज के लिए किसी अन्य उपयुक्त भूमि का चयन किया जाए और खेल मैदान को सुरक्षित रखा जाए।
पीछे मरघट,सामने कॉलेज—भावनात्मक और सामाजिक सवाल
राजीव गुप्ता की पोस्ट का एक हिस्सा स्थानीय लोगों के बीच विशेष चर्चा का विषय बना हुआ है,उन्होंने उल्लेख किया कि प्रस्तावित स्थल के पीछे श्मशान भूमि स्थित है,हालांकि तकनीकी दृष्टि से यह निर्माण में बाधा नहीं हो सकती,लेकिन स्थानीय लोगों की भावनाओं और सामाजिक दृष्टिकोण से इसे लेकर आपत्तियां सामने आ रही हैं,ग्रामीणों का कहना है कि इतने बड़े शैक्षणिक संस्थान के लिए और भी बेहतर विकल्प उपलब्ध हो सकते हैं।
खेल मैदान बचाने की मांग…
विवाद का दूसरा बड़ा पहलू खेल मैदान को लेकर सामने आया है,स्थानीय ग्रामीणों का दावा है कि जिस भूमि का चयन किया गया है,वह पिछले कई दशकों से क्षेत्र के युवाओं का प्रमुख खेल मैदान रहा है,राजू गुप्ता ने अपनी पोस्ट में लिखा कि मोबाइल और सोशल मीडिया के इस दौर में जहां युवाओं को खेलों की ओर प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है,वहां यदि क्षेत्र का एकमात्र बड़ा खेल मैदान समाप्त हो जाता है तो इसका सीधा असर खेल गतिविधियों पर पड़ेगा, ग्रामीणों का भी कहना है कि यदि नर्सिंग कॉलेज बनाना है तो किसी वैकल्पिक भूमि का चयन किया जाए,ताकि खेल मैदान भी सुरक्षित रहे और कॉलेज भी बन सके।
जिला अस्पताल से दूरी क्यों चिंता का विषय है?
नर्सिंग शिक्षा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा अस्पतालों में व्यावहारिक प्रशिक्षण होता है, विशेषज्ञों का मानना है कि नर्सिंग छात्रों को नियमित रूप से अस्पतालों में मरीजों की देखभाल, चिकित्सा प्रक्रियाओं और आपातकालीन परिस्थितियों का प्रशिक्षण लेना पड़ता है, राजू गुप्ता का कहना है कि यदि कॉलेज जिला अस्पताल से 12 किलोमीटर दूर होगा तो छात्रों को प्रतिदिन लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी, इससे समय,संसाधन और सुरक्षा से जुड़ी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं,उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि किसी आपातकालीन स्थिति में यदि नर्सिंग छात्राओं की आवश्यकता पड़े तो इतनी दूरी एक बड़ी बाधा बन सकती है।
पुराने फैसलों का जिक्र क्यों?
अपनी पोस्ट में राजीव गुप्ता ने केवल नर्सिंग कॉलेज की बात नहीं की,उन्होंने जिले में पूर्व में लिए गए कुछ फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि बैकुंठपुर पहले भी गलत स्थल चयन की कीमत चुका चुका है,उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि महाविद्यालय परिसर में एसपी कार्यालय स्थापित किया गया,रेस्ट हाउस परिसर में नालंदा परिसर बनाया गया और फायर ब्रिगेड स्टेशन शहर से काफी दूर स्थापित किया गया,उनका आरोप है कि इन फैसलों को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं और अब नर्सिंग कॉलेज उसी श्रृंखला की अगली कड़ी बनता दिखाई दे रहा है।
क्या यह विकास है या प्रतिष्ठा का प्रश्न?
राजीव गुप्ता ने अपने पोस्ट में एक बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी की है,उन्होंने कहा कि यदि चयनित भूमि वास्तव में उपयुक्त नहीं है तो इसे किसी की प्रतिष्ठा का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए,उनका कहना है कि विकास परियोजनाओं का उद्देश्य जनता को सुविधा देना होता है, न कि किसी निर्णय को हर हाल में सही साबित करना,उन्होंने जनप्रतिनिधियों,अधिकारियों और पत्रकारों से अपील की है कि वे स्वयं स्थल का निरीक्षण करें और निष्पक्ष रूप से तय करें कि यह स्थान वास्तव में नर्सिंग कॉलेज के लिए उपयुक्त है या नहीं।
सवाल विपक्ष से भी…
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मुद्दा केवल नर्सिंग कॉलेज का नहीं बल्कि स्थानीय विकास मॉडल का प्रश्न बनता जा रहा है,दिलचस्प बात यह है कि जिन सवालों को संगठित विपक्ष को उठाना चाहिए था,वे सवाल एक युवा नेता ने सोशल मीडिया के माध्यम से उठा दिए, अब यह देखना होगा कि कांग्रेस संगठन, स्थानीय जनप्रतिनिधि और प्रशासन इस बहस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।


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