
पूर्व विधायक गुलाब कमरो का हमला कहा महिला एवं बाल विकास विभाग भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है
निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो मामला पहुंचेगा शासन स्तर तक
-रवि सिंह-
एमसीबी,05 जून 2026(घटती-घटना)। जिले में हाल ही में संपन्न हुई आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका भर्ती प्रक्रिया अब विवादों के घेरे में आ गई है,भर्ती परिणाम सामने आने के बाद कई अभ्यर्थियों ने चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कलेक्टर से शिकायत की है,आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में निर्धारित नियमों और अंक प्रणाली की अनदेखी कर प्रभावशाली लोगों को लाभ पहुंचाया गया,जबकि अधिक अंक प्राप्त करने वाले पात्र अभ्यर्थियों को चयन सूची से बाहर कर दिया गया,मनेंद्रगढ़ विकासखंड के विभिन्न ग्राम पंचायतों से बड़ी संख्या में अभ्यर्थी कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और लिखित शिकायत सौंपकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की,शिकायतकर्ताओं में आरती (चैनपुर), कुसुम कली (सिरौली), मीना सिंह (बुंदेली), सुमित्रा (सिरौली), रामवती (परस गढ़ी) और संजुबाई (शंकरगढ़) सहित अन्य अभ्यर्थी शामिल हैं।
भर्ती प्रक्रिया पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?- शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि अंतिम दावा-आपत्ति सूची जारी होने के बाद भी चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई,उनका कहना है कि जिन अभ्यर्थियों को निर्धारित अंकों और पात्रता के आधार पर चयनित होना चाहिए था, उन्हें बाहर कर दिया गया, जबकि कम अंक प्राप्त करने वाले उम्मीदवारों को चयन सूची में शामिल कर लिया गया,आवेदकों का दावा है कि यदि निर्धारित मापदंडों का सही पालन किया जाता तो चयन सूची का स्वरूप पूरी तरह अलग होता,उनका आरोप है कि नियमों को दरकिनार कर मनमाने तरीके से चयन किया गया है।
पूर्व विधायक गुलाब कमरो से लगाई न्याय की गुहार
भर्ती प्रक्रिया से असंतुष्ट अभ्यर्थियों ने क्षेत्र के पूर्व विधायक गुलाब कमरो से मुलाकात कर अपनी शिकायतें रखीं,अभ्यर्थियों ने उनसे मांग की कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें और प्रशासन पर निष्पक्ष जांच के लिए दबाव बनाएं,शिकायतों को सुनने के बाद पूर्व विधायक ने भी मामले को गंभीर बताते हुए जिला प्रशासन से तत्काल जांच कराने की मांग की।
अंकों की अनदेखी या चयन में खेल?
आवेदकों ने आरोप लगाया है कि कई स्थानों पर मेरिट सूची में अधिक अंक प्राप्त करने वाले उम्मीदवारों को नजरअंदाज कर कम अंक वाले अभ्यर्थियों को नियुक्ति का लाभ दिया गया,उनका कहना है कि चयन प्रक्रिया का मूल आधार अंक और पात्रता होती है,लेकिन यहां कथित रूप से प्रभाव,पहुंच और पक्षपात ने मेरिट को पीछे छोड़ दिया,यदि यह आरोप सही साबित होते हैं तो भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो सकते हैं।
अतिरिक्त अंकों को लेकर भी विवाद
शिकायतकर्ताओं का यह भी आरोप है कि कुछ अभ्यर्थियों को जाति प्रमाण पत्र,गरीबी रेखा सूची,निवास प्रमाण-पत्र और अन्य पात्रता संबंधी दस्तावेजों के आधार पर मिलने वाले अतिरिक्त अंक नहीं दिए गए,उनका कहना है कि नियमों के अनुसार मिलने वाले अंक यदि जोड़े जाते तो चयन सूची का परिणाम अलग होता,इससे कई पात्र उम्मीदवार नियुक्ति पाने से वंचित रह गए, यही कारण है कि अब अभ्यर्थी केवल जांच ही नहीं बल्कि पूरी चयन प्रक्रिया की पुनर्समीक्षा की मांग कर रहे हैं।
अब प्रशासन की परीक्षा
पूरा मामला अब जिला प्रशासन के पाले में है,शिकायतें कलेक्टर तक पहुंच चुकी हैं,जनप्रतिनिधि खुलकर सवाल उठा रहे हैं और प्रभावित अभ्यर्थी जांच की मांग कर रहे हैं,अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन शिकायतों की गहराई से जांच कराएगा? क्या चयन सूची और अंक सूची का पुनः परीक्षण होगा? क्या दोषियों की जवाबदेही तय होगी? या फिर यह मामला भी शिकायतों की लंबी सूची में शामिल होकर फाइलों के बीच दब जाएगा? फिलहाल मनेंद्रगढ़ विकासखंड की आंगनबाड़ी भर्ती को लेकर उठे इस विवाद ने जिले में एक नई बहस छेड़ दी है और सभी की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
महिला एवं बाल विकास विभाग भ्रष्टाचार का बन चुका है अड्डा
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने इस मामले को लेकर महिला एवं बाल विकास विभाग पर तीखा हमला बोला,उन्होंने कहा कि विभाग से लगातार अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आ रही हैं, उनके अनुसार विभाग की योजनाओं और भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता का अभाव दिखाई देता है,कमरो ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री कन्यादान योजना,संविदा भर्ती प्रक्रियाओं और अब आंगनबाड़ी भर्ती को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं, यदि बार-बार शिकायतें सामने आ रही हैं तो यह विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
पुरानी शिकायतों का भी दिया हवाला
पूर्व विधायक ने कहा कि यह पहला मामला नहीं है,इससे पहले भी विभाग से संबंधित कई शिकायतें प्रशासन को दी गई थीं,लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई,उनका कहना है कि जब शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो लोगों का भरोसा कमजोर होता है और व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगने लगते हैं,उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस मामले में निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो वह इस मुद्दे को शासन स्तर तक ले जाएंगे।
भर्ती प्रक्रिया पर फिर उठे भरोसे के सवाल…
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका की भर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार का महत्वपूर्ण माध्यम मानी जाती है,ऐसे में यदि भर्ती प्रक्रिया पर ही सवाल उठने लगें तो इसका सीधा असर व्यवस्था की विश्वसनीयता पर पड़ता है,विशेषज्ञों का मानना है कि भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता केवल प्रशासनिक आवश्यकता नहीं बल्कि सामाजिक विश्वास का भी प्रश्न है, यदि चयन मेरिट के बजाय प्रभाव के आधार पर होने की धारणा बनती है तो इससे व्यवस्था की साख प्रभावित होती है।
अभ्यर्थियों की मांग क्या है?
चयन सूची की पुन : जांच कराई जाए…
मेरिट सूची और अंक सूची का सत्यापन कराया जाए…
दावा-आपत्ति प्रक्रिया की समीक्षा की जाए…
पात्रता संबंधी दस्तावेजों का पुनर्मूल्यांकन किया जाए…
यदि अनियमितता मिले तो चयन प्रक्रिया निरस्त की जाए…
दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाए, अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्हें केवल नौकरी नहीं बल्कि न्याय चाहिए….
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