- बस रुकते ही भागे महिला-पुरुष…जयनगर पुलिस के हाथ लगा करोड़ों का माल…
- ड्राइवर-हेल्पर हिरासत में…अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क की आशंका
- पुराने हिसाब-किताब और मुखबिरी के एंगल ने मामले को बनाया और रहस्यमय
-संवाददाता-
अम्बिकापुर/जयनगर,04 जून 2026 (घटती-घटना)। गांजा तस्करी के इतिहास में तस्कर लगातार नए-नए तरीके खोजते रहे हैं,कभी ट्रक में सब्जियों के नीचे, कभी पिकअप में फलों के बीच और कभी कारों में गुप्त चैम्बर बनाकर गांजा ले जाया जाता रहा है,लेकिन इस बार जो तरीका सामने आया है,उसने पुलिस और आम लोगों दोनों को हैरान कर दिया है,तस्करों ने कथित तौर पर पूरी की पूरी एक लक्जरी यात्री बस ही बुक कर ली और उसमें महिला,पुरुष और बच्चों को बैठाकर गांजे की बड़ी खेप मध्यप्रदेश के कटनी भेजने निकल पड़े, लेकिन कहते हैं कि अपराध कितना भी शातिर क्यों न हो,कहीं न कहीं कोई न कोई गलती कर ही देता है,इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ और एक सूचना ने पूरे खेल को बिगाड़ दिया,जयनगर थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक लक्जरी बस से लगभग 8 क्विंटल गांजा बरामद किया है,हालांकि बस में सवार अधिकांश लोग पुलिस के पहुंचने से पहले फरार हो गए,लेकिन गांजे की भारी खेप,बस और उससे जुड़े कई सवाल अब पुलिस जांच के केंद्र में हैं।
कालीघाट से शुरू हुई कहानी
जानकारी के अनुसार नीलम बस क्रमांक सीजी-15-ईएच-4301 अंबिकापुर से मध्यप्रदेश के कटनी की ओर रवाना हुई थी,रास्ते में अंबिकापुर-मनेंद्रगढ़ मार्ग स्थित कालीघाट के पास करीब 20 महिला, पुरुष और बच्चे बस में सवार हुए,उनके हाथों में झाड़ू थे,साथ में साडि़यों में बंधी बड़ी-बड़ी गठरियां थीं,पहली नजर में यह किसी ग्रामीण परिवार या समूह की यात्रा जैसी तस्वीर दिखाई दे रही थी,बस में बैठे अन्य लोगों को भी शायद यह अंदाजा नहीं रहा होगा कि इन गठरियों में कपड़े या घरेलू सामान नहीं बल्कि गांजा भरा हुआ है।
एक चालक की नजर ने बदल दी पूरी कहानी
सूत्रों के अनुसार एक वाहन चालक की नजर इन संदिग्ध यात्रियों पर पड़ी,उसे उनके व्यवहार और गठरियों पर संदेह हुआ,बताया जाता है कि उसने डायल-112 और जयनगर पुलिस को सूचना दी कि बस में बड़ी मात्रा में गांजा हो सकता है, सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आ गई, पुलिस ने सिलफिली क्षेत्र में स्थानीय लोगों की मदद लेकर बस को रोकने की योजना बनाई, घटना के बाद बस चालक और हेल्पर को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की गई,अब पुलिस के सामने सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि क्या बस चालक को इस पूरे खेल की जानकारी थी या वह केवल किराये पर बस चलाने का काम कर रहा था,पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि बस की बुकिंग किसने कराई थी,भुगतान किसने किया था और यात्रा की वास्तविक योजना क्या थी।
बस रुकी और शुरू हो गई भगदड़
जैसे ही बस को रोका गया,अंदर बैठे लोगों को शायद समझ में आ गया कि मामला बिगड़ चुका है,प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बस रुकते ही उसमें बैठे महिला-पुरुष और कुछ अन्य लोग तेजी से नीचे उतरे और आसपास के क्षेत्रों में भागने लगे,कुछ लोग खेतों की ओर भागे,कुछ जंगल की दिशा में निकल गए और कुछ ने अंधेरे तथा भीड़ का फायदा उठाकर खुद को बचा लिया,जब तक पुलिस मौके पर पूरी तरह पहुंचती,अधिकांश संदिग्ध लोग फरार हो चुके थे।
गठरियां खुलीं तो निकला गांजे का पहाड़
फरार लोगों की तलाश के साथ पुलिस ने बस की तलाशी शुरू की,जब एक-एक कर गठरियों को खोला गया तो पुलिसकर्मी भी हैरान रह गए। साडि़यों में बंधी लगभग सभी गठरियों में गांजा भरा हुआ था,प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बरामद गांजे की मात्रा लगभग 8 क्विंटल बताई जा रही है, यदि यह मात्रा आधिकारिक जांच में सही पाई जाती है तो यह क्षेत्र की बड़ी गांजा बरामदगी में शामिल हो सकती है,पुलिस ने मौके पर ही गांजा जब्त कर लिया और बस को जयनगर थाना परिसर में खड़ा करा दिया।
चार महीने पुराना मामला बना कार्रवाई की वजह?
घटनास्थल पर मौजूद लोगों और सूत्रों के अनुसार इस गिरोह का नाम पहले भी गांजा तस्करी के मामलों में सामने आ चुका है,बताया जा रहा है कि लगभग चार महीने पहले भी इसी समूह ने अंबिकापुर क्षेत्र से एक पिकअप वाहन बुक कर गांजा मध्यप्रदेश भेजने का प्रयास किया था, उस समय वाहन कटनी क्षेत्र में पकड़ा गया था, जबकि कथित मुख्य आरोपी मौके से फरार हो गए थे, उस मामले में वाहन चालक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था और वह अब तक जेल में है,सूत्रों का दावा है कि उसी चालक के परिजनों ने इस बार पूरे गिरोह की गतिविधियों पर नजर रखी और पुलिस तक सूचना पहुंचाई,हालांकि इस संबंध में पुलिस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
महिलाओं और बच्चों का इस्तेमाल क्यों?
पूरे मामले में एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर महिला और बच्चों को साथ लेकर यात्रा क्यों की जा रही थी? जांच से जुड़े लोगों का मानना है कि यह पुलिस और अन्य एजेंसियों का संदेह कम करने की एक रणनीति हो सकती है, आमतौर पर परिवार के साथ यात्रा कर रहे लोगों पर कम शक किया जाता है, यही कारण है कि तस्कर कई बार महिलाओं और बच्चों को भी साथ रखते हैं ताकि उनका नेटवर्क सामान्य यात्रियों जैसा दिखाई दे।
कटनी क्यों बन रहा है गांजा तस्करी का बड़ा रूट?
सूत्रों के अनुसार बरामद गांजा मध्यप्रदेश के कटनी क्षेत्र तक पहुंचाया जाना था, पिछले कुछ वर्षों में छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्र प्रदेश से निकलने वाली गांजा खेपों के लिए मध्यप्रदेश एक प्रमुख ट्रांजिट और सप्लाई रूट बनकर उभरा है, कटनी, शहडोल, उमरिया, जबलपुर और आसपास के क्षेत्रों में कई बार बड़ी गांजा खेपें पकड़ी जा चुकी हैं, इस कारण पुलिस अब इस पूरे मामले को केवल एक बस तक सीमित नहीं मान रही बल्कि इसके पीछे सक्रिय बड़े नेटवर्क की संभावना भी देख रही है।
अंत में सवाल
– सबसे बड़ा सवालः असली खिलाड़ी कौन?
– आखिर इस पूरी खेप का मालिक कौन है?
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