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सूरजपुर@ शिवनंदनपुर में भाजपा का अध्यक्ष,कांग्रेस का परिषद पर कब्जा,जनता ने दिया संतुलित जनादेश

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  • रितेश जायसवाल बने पहले अध्यक्ष…15 वार्डों में कांग्रेस ने मारी बाजी
  • शिवनंदनपुर में कमल खिला,लेकिन परिषद में कांग्रेस का पलड़ा भारी
  • अध्यक्ष पद भाजपा की झोली में,वार्डों में कांग्रेस की बढ़त,रोचक बने राजनीतिक समीकरण
  • पहले नगर पंचायत चुनाव में भाजपा को ताज,कांग्रेस को ताकत
  • रितेश जायसवाल ने 364 वोटों से जीता अध्यक्ष पद,पार्षद चुनाव में कांग्रेस आगे निकली
  • शिवनंदनपुर का फैसला,नेतृत्व भाजपा को,निगरानी कांग्रेस के हाथ
  • पहले चुनाव में जनता ने साधा संतुलन,भाजपा को अध्यक्ष और कांग्रेस को परिषद की बढ़त
  • शिवनंदनपुर में भाजपा का अध्यक्ष,कांग्रेस का परिषद पर दबदबा
  • रितेश जायसवाल बने पहले अध्यक्ष,364 वोटों से जीते…
  • 15 वार्डों में कांग्रेस 8 और भाजपा 7 सीटों पर विजयी

-ओंकार पाण्डेय-
सूरजपुर,04 जून 2026 (घटती-घटना)।
नवगठित शिवनंदनपुर नगर पंचायत के प्रथम चुनाव का परिणाम सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। चुनाव परिणाम ने एक दिलचस्प तस्वीर पेश की है, जहां अध्यक्ष पद पर भाजपा ने शानदार जीत दर्ज कर नगर पंचायत की कमान अपने हाथों में ले ली है, वहीं पार्षद चुनाव में कांग्रेस ने बढ़त हासिल कर परिषद के भीतर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा दी है। इस प्रकार शिवनंदनपुर की जनता ने ऐसा जनादेश दिया है, जिसमें सत्ता और संतुलन दोनों का संदेश छिपा हुआ दिखाई देता है। नगर पंचायत गठन के बाद पहली बार हुए इस चुनाव को भाजपा और कांग्रेस दोनों ने प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया था, मतदान से पहले जिस तरह राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदले, आरोप-प्रत्यारोप हुए और बड़े नेताओं ने क्षेत्र में सक्रियता दिखाई, उससे स्पष्ट था कि यह चुनाव केवल नगर पंचायत का चुनाव नहीं बल्कि क्षेत्रीय राजनीतिक प्रभाव का परीक्षण भी था।
वार्डवार चुनाव परिणाम

वार्ड क्रमांकविजेता प्रत्याशीदलप्राप्त मतनिकटतम प्रतिद्वंदीप्राप्त मत
1श्याम साहूभाजपा205राजेंद्र प्रसाद यादव95
2प्रमिला साहूभाजपा122आंचल यादव79
3अंशुल गोयलकांग्रेस141राजेश जैन73
4मंजू खेमचंद गोयलभाजपा126विनेश्वरी शांडिल्य92
5विमला सिंहकांग्रेस121अनिता सिंह67
6बृजेंद्र सिंहकांग्रेस118सुरेश कुमार बखला49
7अंजलि राजवाड़ेभाजपा138शमा परवीन119
8हर्ष दनौदियाकांग्रेस122अमित मित्तल83
9संतोष जायसवालकांग्रेस113तारकेश्वर पटेल106
10वर्षा जायसवालभाजपा121रमेश कुमार सिंह70
11चंदन सिंहकांग्रेस80कुंदन विश्वकर्मा66
12मनी बग्गाभाजपा127दीपक सोनी56
13अहमद वाहिदकांग्रेस191राजू पाटले157
14दीपमाला सोनीकांग्रेस173आकांक्षा गुप्ता141
15प्रशांत अग्रवालभाजपा167सन्नी अग्रवाल120


अध्यक्ष पद पर भाजपा की बड़ी जीत– अध्यक्ष पद के लिए भाजपा ने युवा चेहरा रितेश जायसवाल को मैदान में उतारा था, जबकि कांग्रेस ने संजय सोनी पर भरोसा जताया था, चुनाव प्रचार के दौरान दोनों प्रत्याशियों ने घर-घर संपर्क अभियान चलाया और दोनों दलों के वरिष्ठ नेताओं ने भी पूरी ताकत झोंक दी, मतगणना पूरी होने के बाद भाजपा प्रत्याशी रितेश जायसवाल ने कांग्रेस प्रत्याशी संजय सोनी को 364 मतों के अंतर से पराजित कर जीत दर्ज की, यह जीत भाजपा के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि नवगठित नगर पंचायत का पहला अध्यक्ष बनने का गौरव अब भाजपा के खाते में चला गया है, परिणाम घोषित होते ही भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह की लहर दौड़ गई, नगर पंचायत क्षेत्र में मिठाइयां बांटी गईं, फूल-मालाओं से स्वागत किया गया और समर्थकों ने जीत का जश्न मनाया।
परिषद में कांग्रेस की बढ़त- अध्यक्ष पद पर भाजपा की जीत के बावजूद वार्ड स्तर पर कांग्रेस ने बेहतर प्रदर्शन किया, 15 वार्डों में हुए चुनाव में कांग्रेस के 8 प्रत्याशी विजयी रहे, जबकि भाजपा को 7 सीटों पर सफलता मिली, यानी अध्यक्ष भाजपा का होगा, लेकिन परिषद में कांग्रेस की संख्या अधिक रहेगी, यही कारण है कि चुनाव परिणाम को राजनीतिक विश्लेषक ‘मिश्रित जनादेश’ की संज्ञा दे रहे हैं, इस परिणाम के बाद नगर पंचायत में भविष्य की राजनीति और परिषद की बैठकों को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है, परिषद में संख्या बल कांग्रेस के पास है जबकि अध्यक्ष पद भाजपा के पास है, ऐसे में कई निर्णयों में दोनों दलों के बीच समन्वय और राजनीतिक समझदारी की परीक्षा होगी।
चुनाव से पहले खूब गरमाया था माहौल- शिवनंदनपुर चुनाव केवल विकास और स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं रहा, मतदान से कुछ दिन पहले राजनीतिक वातावरण तब गरमा गया जब कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष के विरुद्ध दर्ज आर्म्स एक्ट के मामले को लेकर कांग्रेस नेताओं ने बिश्रामपुर थाने के सामने प्रदर्शन किया, इस प्रदर्शन में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष, पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व उपमुख्यमंत्री और कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए, मामला राजनीतिक रंग पकड़ता गया और प्रशासन पर दबाव बढ़ा, बाद में डीएसपी स्तर की जांच कराने तथा जांच पूरी होने तक गिरफ्तारी नहीं किए जाने के आश्वासन के बाद विवाद शांत हुआ। इस पूरे घटनाक्रम ने चुनाव को और अधिक चर्चित बना दिया।
85 प्रतिशत से अधिक मतदान ने बढ़ाई थी उत्सुकता- 1 जून को हुए मतदान में मतदाताओं ने रिकॉर्ड उत्साह दिखाया था, कुल 85 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज हुआ था, इतनी बड़ी भागीदारी ने पहले ही संकेत दे दिया था कि जनता इस चुनाव को लेकर गंभीर है, महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने बढ़-चढ़कर मतदान किया था, मतदान प्रतिशत ने यह स्पष्ट कर दिया था कि जनता नगर पंचायत के भविष्य को लेकर सजग है और विकास के मुद्दों पर अपनी भागीदारी दर्ज कराना चाहती है।
कांग्रेस को वार्डों में बढ़त क्यों मिली?– राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस ने वार्ड स्तर पर स्थानीय समीकरणों का बेहतर लाभ उठाया, कई वार्डों में कांग्रेस प्रत्याशियों की व्यक्तिगत पकड़ और स्थानीय नेटवर्क मजबूत दिखाई दिया, वहीं भाजपा अध्यक्ष पद के चुनाव में संगठनात्मक रूप से अधिक प्रभावी नजर आई,यही कारण रहा कि अध्यक्ष पद भाजपा जीत गई,लेकिन वार्ड स्तर पर कांग्रेस ने बढ़त बना ली।
भाजपा के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह जीत?- भाजपा के लिए यह जीत केवल एक नगर पंचायत जीतने का मामला नहीं है,नवगठित नगर पंचायत का पहला अध्यक्ष भाजपा के खाते में जाना राजनीतिक दृष्टि से बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल के वर्षों में स्थानीय निकाय चुनावों को भविष्य के विधानसभा और लोकसभा चुनावों के संकेतक के रूप में देखा जाने लगा है।
कांग्रेस भी खुद को हारने वाला नहीं मान रही- हालांकि अध्यक्ष पद कांग्रेस के हाथ से निकल गया,लेकिन पार्टी वार्डों में मिली बढ़त को अपनी उपलब्धि के रूप में देख रही है, कांग्रेस नेताओं का कहना है कि परिषद में उनकी संख्या अधिक है और विकास कार्यों तथा जनहित के मुद्दों पर उनकी भूमिका निर्णायक रहेगी।
अब शुरू होगी विकास की असली परीक्षा- चुनाव खत्म हो चुके हैं। नारे,भाषण और प्रचार अभियान अब इतिहास का हिस्सा बन चुके हैं, अब जनता की नजर केवल विकास पर है, शिवनंदनपुर को नगर पंचायत का दर्जा मिलने के बाद लोगों की अपेक्षाएं बढ़ गई हैं,सड़क, नाली, पेयजल,स्ट्रीट लाइट,स्वच्छता,बाजार व्यवस्था और शहरी सुविधाओं को लेकर लोगों को नई उम्मीदें हैं, अब अध्यक्ष भाजपा का है और परिषद में कांग्रेस का बहुमत है, ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि दोनों दल विकास के मुद्दों पर सहयोग करते हैं या राजनीतिक खींचतान नगर पंचायत के कामकाज को प्रभावित करती है।
जनता ने दिया संतुलित संदेश- शिवनंदनपुर के पहले चुनाव ने यह साबित कर दिया कि मतदाता अब केवल दल नहीं बल्कि स्थानीय समीकरणों और उम्मीदवारों को भी ध्यान में रखकर मतदान कर रहे हैं, जनता ने भाजपा को अध्यक्ष पद देकर नेतृत्व सौंपा है, वहीं कांग्रेस को परिषद में मजबूत उपस्थिति देकर संतुलन भी कायम रखा है, अब यह जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि वे इस जनादेश का सम्मान करें और नवगठित शिवनंदनपुर नगर पंचायत को विकास, पारदर्शिता और बेहतर नागरिक सुविधाओं की दिशा में आगे बढ़ाएं, फिलहाल इतना तय है कि शिवनंदनपुर नगर पंचायत का पहला चुनाव केवल चुनाव नहीं था,बल्कि क्षेत्र की नई राजनीतिक दिशा तय करने वाला जनादेश साबित हुआ है।


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