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बैकुंठपुर/कोरिया@ तालाब से लौट रही महिला पर किये गये जानलेवा हमले में हुई थी मौत,आरोपी को आजीवन कारावास

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विशेष न्यायालय बैकुंठपुर का अहम फैसला,हत्या और टोनही प्रताड़ना मामले में उमेश कुमार केंवट दोषी करार
विशेष न्यायाधीश आशीष पाठक ने सुनाया निर्णय,विशेष लोक अभियोजक महेश कुमार शर्मा की प्रभावी पैरवी
बैकुंठपुर/कोरिया,04 जून 2026 (घटती-घटना)।
अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के विशेष न्यायालय बैकुण्ठपुर ने वर्ष 2022 के एक जघन्य हत्या प्रकरण में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी उमेश कुमार केंवट को दोषी करार दिया है, विशेष न्यायाधीश आशीष पाठक ने विशेष आपराधिक प्रकरण क्रमांक 36/2022, छत्तीसगढ़ राज्य विरुद्ध उमेश कुमार केंवट में 30 मई 2026 को निर्णय सुनाते हुए आरोपी को हत्या और टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम के तहत कठोर दंड से दंडित किया,यह मामला क्षेत्र में लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहा था, करीब चार वर्षों तक चली सुनवाई के बाद न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयान और परिस्थितिजन्य प्रमाणों के आधार पर आरोपी को दोषी पाया।
तालाब से लौट रही महिला पर किया गया जानलेवा हमला
अभियोजन के अनुसार घटना 15 सितंबर 2022 की शाम लगभग 5ः30 बजे की है,मृतिका कलेसिया उर्फ कौशिल्या पण्डो तालाब से स्नान कर बाल्टी और कपड़े लेकर घर वापस लौट रही थी,जब वह राधेश्याम नामक व्यक्ति की मक्का बाड़ी के पास पहुंची,तभी आरोपी उमेश कुमार केंवट वहां पहुंचा,अभियोजन के मुताबिक आरोपी ने पीछे से मृतिका पर धारदार हथियार जरकट्टी से ताबड़तोड़ हमला कर दिया,गंभीर हमले के कारण महिला बाड़ी में गिर पड़ी और घटनास्थल पर ही उसकी मृत्यु हो गई,घटना के बाद क्षेत्र में सनसनी फैल गई और परिजनों ने इसकी सूचना पुलिस को दी।
हत्या,टोनही प्रताड़ना और एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज हुआ मामला
मामले की जांच के बाद थाना पोंड़ी पुलिस ने अपराध क्रमांक 144/2022 दर्ज किया,पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 302, छत्तीसगढ़ टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम की धारा 4 एवं 5 तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 की धारा 3(2) के तहत मामला पंजीबद्ध कर न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया।
अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी
प्रकरण में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक महेश कुमार शर्मा ने पैरवी की,उन्होंने न्यायालय के समक्ष तर्क प्रस्तुत करते हुए कहा कि समाज में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के विरुद्ध बढ़ते अत्याचारों को देखते हुए आरोपी का कृत्य किसी भी स्थिति में क्षम्य नहीं माना जा सकता, उन्होंने न्यायालय को बताया कि संवैधानिक और कानूनी संरक्षण के बावजूद अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग आज भी सामाजिक,आर्थिक और मानसिक उत्पीड़न का सामना कर रहा है, अनेक मामलों में उन्हें नागरिक अधिकारों से वंचित किया जाता है,अपमानित किया जाता है तथा उनके विरुद्ध गंभीर अपराध किए जाते हैं,विशेष लोक अभियोजक ने यह भी तर्क दिया कि शिक्षा और जागरूकता के प्रसार के कारण इन वर्गों के लोग अपने अधिकारों के प्रति सजग हुए हैं,लेकिन कई बार समाज के कुछ वर्ग इसे स्वीकार नहीं कर पाते,जिससे जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न की घटनाएं सामने आती हैं,ऐसे अपराध केवल व्यक्ति विशेष पर हमला नहीं बल्कि उसकी गरिमा, सम्मान और संवैधानिक अधिकारों पर भी प्रहार होते हैं।
न्यायालय ने सुनाई आजीवन कारावास की सजा
दोनों पक्षों की दलीलों,गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद विशेष न्यायाधीश आशीष पाठक ने आरोपी उमेश कुमार केंवट को दोषी करार दिया,न्यायालय ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास तथा 100 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। इसके अतिरिक्त छत्तीसगढ़ टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम की धारा 4 एवं 5 के तहत क्रमशः एक वर्ष और दो वर्ष के कारावास तथा 100-100 रुपये अर्थदंड से भी दंडित किया।
फैसला बना महत्वपूर्ण मिसाल
कानूनी जानकारों का मानना है कि यह फैसला समाज में व्याप्त अंधविश्वास और टोनही जैसी कुप्रथाओं के विरुद्ध एक मजबूत संदेश है,न्यायालय के इस निर्णय से यह स्पष्ट होता है कि किसी भी व्यक्ति को अंधविश्वास,सामाजिक पूर्वाग्रह या जातिगत भेदभाव के आधार पर प्रताडि़त करना अथवा उसके विरुद्ध हिंसक अपराध करना कानून की नजर में गंभीर अपराध है,यह निर्णय न केवल पीडि़त परिवार को न्याय दिलाने वाला माना जा रहा है बल्कि समाज को यह संदेश भी देता है कि कमजोर और वंचित वर्गों के सम्मान,सुरक्षा और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए कानून पूरी मजबूती के साथ खड़ा है।


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