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खड़गवां@ 246.75 टन खाद घोटाले पर फूटा जनाक्रोश

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4 जून से गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का अनिश्चितकालीन आंदोलन
सिर्फ एक गिरफ्तारी से नहीं थमा विवाद,
सह-आरोपियों की गिरफ्तारी और उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज
-राजेन्द्र शर्मा-
खड़गवां,02 जून 2026(घटती-घटना)।
कोरिया जिले की आदिम जाति सेवा सहकारी समिति जिल्दा में सामने आए 246.75 मीट्रिक टन खाद घोटाले ने अब प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, किसानों के लिए भेजी गई खाद के कथित गबन और अवैध बिक्री के आरोपों के बीच जहां एक ओर पुलिस ने समिति प्रबंधक अखिल चंद्र को गिरफ्तार कर कार्रवाई शुरू की है,वहीं दूसरी ओर इस कार्रवाई को अधूरा बताते हुए गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने मोर्चा खोल दिया है, पार्टी का आरोप है कि इतने बड़े घोटाले को केवल एक व्यक्ति तक सीमित कर जांच को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि मामले में कई अन्य लोगों की भूमिका सामने आ चुकी है, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने एसडीएम बैकुंठपुर को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है,पार्टी नेताओं का कहना है कि खाद घोटाले की जांच केवल औपचारिकता बनकर रह गई है और वास्तविक दोषियों तक कार्रवाई नहीं पहुंच पा रही है,ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि राजनीतिक और प्रभावशाली लोगों के दबाव के कारण जांच प्रभावित हो रही है, जिससे किसानों और आम जनता के बीच आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
पूरे मामले की जड़ में वही सवाल है जो क्षेत्र के किसान लगातार पूछ रहे हैं—किसानों के लिए आई 246.75 मीट्रिक टन खाद आखिर गई कहां? जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और विभिन्न स्तरों पर हुई पूछताछ से यह संकेत मिले हैं कि बड़ी मात्रा में खाद कथित रूप से बिचौलियों के माध्यम से बेची गई, यदि ऐसा हुआ है तो यह केवल विभागीय लापरवाही नहीं बल्कि किसानों के अधिकारों और सरकारी संसाधनों के साथ गंभीर खिलवाड़ माना जाएगा,क्षेत्र के किसानों का कहना है कि खेती के मौसम में उन्हें खाद के लिए समितियों के चक्कर लगाने पड़े, जबकि अब यह आरोप सामने आ रहे हैं कि वही खाद खुले बाजार और बिचौलियों के माध्यम से खपाई जा रही थी, यही कारण है कि मामला अब केवल प्रशासनिक जांच तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि जनभावनाओं से जुड़ा मुद्दा बन गया है।
किसानों के हक की लड़ाई या राजनीतिक संघर्ष?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि खाद घोटाले का मुद्दा अब केवल जांच का विषय नहीं रहा, बल्कि किसानों के अधिकारों और जवाबदेही की मांग का प्रतीक बनता जा रहा है, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी इसे किसानों के हितों की लड़ाई बता रही है, जबकि विपक्षी दल भी मामले पर लगातार सवाल उठा रहे हैं, पार्टी नेताओं का कहना है कि यदि किसानों के लिए भेजी गई खाद का दुरुपयोग हुआ है तो यह सीधे-सीधे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि व्यवस्था पर हमला है, ऐसे मामलों में दोषियों को बचाने की बजाय उदाहरण प्रस्तुत करने वाली कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति किसानों के हिस्से के संसाधनों में हेराफेरी करने का साहस न कर सके।
एक गिरफ्तारी,कई सवाल
समिति प्रबंधक अखिल चंद्र की गिरफ्तारी के बाद उम्मीद थी कि जांच तेजी से आगे बढ़ेगी और पूरे नेटवर्क का खुलासा होगा, लेकिन अब तक केवल एक गिरफ्तारी होने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं,स्थानीय लोगों और राजनीतिक दलों का कहना है कि यदि खाद के भंडारण,परिवहन और बिक्री में बड़े पैमाने पर अनियमितता हुई है तो इसकी जिम्मेदारी केवल एक व्यक्ति पर नहीं डाली जा सकती, ग्रामीणों का आरोप है कि जांच के दौरान कुछ अन्य नाम भी सामने आए हैं,लेकिन उनके खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है। यही वजह है कि लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि कहीं जांच को सीमित करने की कोशिश तो नहीं की जा रही।
4 जून से आंदोलन की चेतावनी
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने प्रशासन को स्पष्ट अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि सभी सह-आरोपियों की गिरफ्तारी, निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित नहीं की गई तो 4 जून 2026 से पोड़ी बचरा में अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा, पार्टी के ब्लॉक अध्यक्ष द्वारा दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि आंदोलन केवल धरने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें रैली, जनसभा और व्यापक जनसंपर्क अभियान भी शामिल होंगे, आंदोलन के दौरान सड़क जाम जैसे कार्यक्रमों की संभावना भी जताई गई है, इससे प्रशासन की चिंता बढ़ गई है क्योंकि आंदोलन का असर क्षेत्र की कानून-व्यवस्था और आवागमन पर पड़ सकता है।
प्रशासन पर बढ़ता दबाव
आंदोलन की घोषणा के बाद प्रशासन पर दबाव लगातार बढ़ रहा है, एक ओर पुलिस जांच जारी है तो दूसरी ओर राजनीतिक संगठनों और ग्रामीणों की ओर से निष्पक्ष कार्रवाई की मांग तेज होती जा रही है,प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह जांच की पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब दे और यह विश्वास दिलाए कि कानून सभी के लिए समान है, यदि 4 जून से पहले जांच में कोई बड़ा कदम नहीं उठाया गया तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। इससे न केवल प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित होगी बल्कि खाद घोटाले को लेकर जनता का आक्रोश भी और बढ़ सकता है।
अब सबकी नजर अगली कार्रवाई पर
246.75 मीट्रिक टन खाद घोटाले ने कोरिया जिले की राजनीति और प्रशासन दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है, किसानों को न्याय मिलेगा या नहीं,पूरे नेटवर्क का खुलासा होगा या नहीं, और जांच वास्तविक दोषियों तक पहुंचेगी या नहीं—ये ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब आने वाले दिनों में प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई तय करेगी,फिलहाल इतना तय है कि खाद घोटाले की आग अब सहकारी समिति की चारदीवारी से निकलकर जनआंदोलन का रूप लेती दिखाई दे रही है,4 जून को प्रस्तावित आंदोलन से पहले प्रशासन क्या कदम उठाता है,इस पर पूरे जिले की नजर टिकी हुई है।


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