- नहर की जमीन पर अवैध कब्जा,अदालत के आदेश भी बेअसर-कोरिया में प्रशासनिक भूमिका पर सवाल
- हाई कोर्ट तक पहुंचा नहर अतिक्रमण मामला : आदेश जारी,लेकिन कार्रवाई अब भी अधूरी
- कोरिया में न्याय बनाम राजनीति : नहर की भूमि पर कब्जा और तीन साल से चल रही कानूनी लड़ाई

-रवि सिंह-
कोरिया,19 मार्च 2026 (घटती-घटना)। कोरिया जिले में नहर की शासकीय भूमि पर हुए अवैध अतिक्रमण का मामला पिछले तीन वर्षों से न्यायालय,प्रशासन और राजनीति के बीच उलझा हुआ है,स्थिति इतनी जटिल हो चुकी है कि माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर के आदेशों के बावजूद अब तक अतिक्रमण नहीं हटाया जा सका है,इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और राजनीतिक संरक्षण को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं,यह मामला केवल एक अवैध निर्माण का नहीं,बल्कि उस व्यवस्था का उदाहरण बन गया है जिसमें अदालत के आदेश,प्रशासनिक कार्रवाई और राजनीतिक प्रभाव आपस में टकराते नजर आ रहे हैं।
अवमानना याचिका
जब अदालत के आदेश के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई तो शिकायतकर्ता ने अवमानना याचिका दाखिल की,न्यायालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तहसीलदार को नोटिस जारी किया और जवाब प्रस्तुत करने के लिए कहा, इस मामले की अगली सुनवाई मार्च 2026 के दूसरे सप्ताह में प्रस्तावित है।
नया मोड़ और जारी हुआ एनओसी
इस पूरे विवाद के बीच एक नया मोड़ तब आया जब जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता द्वारा कथित रूप से अतिक्रमणकर्ताओं को अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया,यह कदम इसलिए भी विवादित माना जा रहा है क्योंकि विभाग पहले ही इस निर्माण को नहर की भूमि पर अवैध बता चुका था।
न्याय की तलाश जारी
तीन साल से चल रही इस लंबी प्रक्रिया ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या राजनीतिक प्रभाव और प्रशासनिक हस्तक्षेप के कारण न्याय की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है,फिलहाल इस मामले में सभी की नजरें मार्च 2026 में होने वाली हाई कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं, अब देखना यह होगा कि अदालत के अगले आदेश के बाद प्रशासन अतिक्रमण हटाने की दिशा में ठोस कदम उठाता है या फिर यह मामला आगे भी इसी तरह विवाद और कानूनी प्रक्रिया में उलझा रहता है।
एसडीएम ने भी माना अवैध कब्जा
तहसीलदार के आदेश के खिलाफ अतिक्रमणकर्ता ने एसडीएम बैकुंठपुर के समक्ष अपील दायर की,मामले की सुनवाई के बाद 7 अक्टूबर 2024 को एसडीएम ने अपने आदेश में कहा कि यह शासकीय भूमि पर अवैध अतिक्रमण का स्पष्ट मामला है,उन्होंने तहसीलदार के आदेश को सही ठहराते हुए अतिक्रमण हटाने का आदेश बरकरार रखा।
फिर पहुंचा मामला हाई कोर्ट
जब इसके बाद भी अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो शिकायतकर्ता ने दोबारा उच्च न्यायालय बिलासपुर में याचिका दाखिल कर न्याय की मांग की,इसी दौरान अतिक्रमण पक्ष ने भी उच्च न्यायालय में याचिका दायर की,लेकिन सुनवाई के दौरान न्यायालय की फटकार के बाद याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका वापस ले ली।
आयुक्त के पास पहुंचा मामला…
इसके बाद मामला सरगुजा संभाग के आयुक्त के समक्ष अपील के रूप में पहुंचा,आयुक्त ने प्रक्रिया संबंधी एक तकनीकी कारण का हवाला देते हुए तहसीलदार और एसडीएम के आदेश को निरस्त कर दिया और प्रकरण को पुनः तहसीलदार के पास कार्यवाही के लिए भेज दिया।
फिर भी नहीं हुई कार्रवाई
आयुक्त के आदेश के बाद भी कई महीनों तक कोई कार्रवाई नहीं हुई,शिकायतकर्ता ने बार-बार तहसीलदार के समक्ष आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की,लेकिन स्थिति जस की तस बनी रही, आखिरकार शिकायतकर्ता ने एक बार फिर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की।
हाई कोर्ट का दूसरा आदेश
1 सितंबर 2025 को उच्च न्यायालय ने तहसीलदार बैकुंठपुर को आयुक्त के निर्देशों के अनुसार जल्द कार्रवाई करने का आदेश दिया, लेकिन आरोप है कि इस आदेश का भी पालन नहीं किया गया।
2023 में शुरू हुआ विवाद
इस पूरे मामले की शुरुआत मई 2023 में हुई,आरोप है कि एक समाज विशेष को खुश करने के उद्देश्य से तत्कालीन कांग्रेस विधायक द्वारा नहर की भूमि पर ही भूमिपूजन कर दिया गया,इसके बाद स्थानीय कृषक के पुत्र को आशंका हुई कि नहर की जमीन पर स्थायी निर्माण किया जा सकता है,इस आशंका को देखते हुए उन्होंने एसडीएम बैकुंठपुर के समक्ष लिखित आवेदन देकर हस्तक्षेप की मांग की,हालांकि शिकायत के बावजूद तत्काल कोई कार्रवाई नहीं हुई,आरोप है कि प्रशासनिक स्तर पर इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया।
आधी रात को हुआ निर्माण
स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब 5 और 6 जून की दरम्यानी रात को कथित तौर पर नहर की भूमि पर अवैध निर्माण कर दिया गया, बताया जाता है कि रात के समय नहर की भूमि पर दीवार खड़ी कर दी गई और वहां मूर्ति स्थापित कर दी गई, जब शिकायतकर्ता मौके पर पहुंचकर आपत्ति दर्ज कराने लगे तो उन्हें कथित तौर पर सत्ता का भय दिखाकर वहां से भगा दिया गया,अगले दिन शिकायतकर्ता ने सीधे कलेक्टर कोरिया के समक्ष शिकायत दर्ज कराई,कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम बैकुंठपुर ने मामले की जांच के लिए राजस्व निरीक्षक को मौके पर भेजा।
जांच में सामने आया अतिक्रमण
जांच के बाद राजस्व निरीक्षक बड़गांव ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट बताया कि ग्राम पंचायत भांडी में नहर की भूमि पर बिना किसी अनुमति के निर्माण किया गया है,रिपोर्ट में कहा गया कि यह भूमि सिल्फोड़ा जलाशय की माइनर नहर की भूमि है जिसकी चौड़ाई लगभग 32 फीट निर्धारित है,रिपोर्ट के साथ नक्शा,खसरा और पंचनामा भी प्रस्तुत किया गया, जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि निर्माण कार्य नहर की जमीन पर ही किया गया है।
जल संसाधन विभाग ने भी माना अतिक्रमण
मामले में एसडीएम बैकुंठपुर ने जल संसाधन विभाग से अभिमत मांगा कि क्या इस भूमि पर अनुमति दी जा सकती है, इसके जवाब में जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता ने 12 जून 2023 को जारी पत्र में स्पष्ट कहा कि यह नहर की भूमि है और इस पर किसी प्रकार की अनुमति या अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं दिया जा सकता,उन्होंने अपने पत्र में यह भी लिखा कि आधी रात को किया गया निर्माण अवैध है और इसे हटाया जाना चाहिए।
तहसीलदार कोर्ट में दर्ज हुआ प्रकरण
लगातार शिकायतों के बाद प्रशासन ने इस मामले को तहसीलदार बैकुंठपुर के न्यायालय में दर्ज किया,धारा 248 के अंतर्गत अतिक्रमण का प्रकरण पंजीबद्ध किया गया और सुनवाई शुरू हुई,सुनवाई के दौरान जब अतिक्रमणकर्ताओं द्वारा निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने की कोशिश की गई तो तहसीलदार ने स्थगन आदेश भी जारी किया।
हाई कोर्ट का पहला आदेश
मामले में लंबे समय तक कोई ठोस निर्णय नहीं होने पर शिकायतकर्ता ने माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर में याचिका दाखिल की,इस पर न्यायालय ने 29 फरवरी 2024 को आदेश जारी करते हुए कहा कि सभी पक्षों को सुनवाई का अवसर देते हुए चार माह के भीतर मामले का निराकरण किया जाए।
तहसीलदार का आदेश, फिर भी नहीं हटा अतिक्रमण
हाई कोर्ट की समय सीमा पूरी होने से तीन दिन पहले 27 जून 2024 को तहसीलदार बैकुंठपुर ने आदेश पारित किया, अपने आदेश में उन्होंने लिखा कि यह निर्माण अवैध अतिक्रमण की श्रेणी में आता है और इसे हटाया जाना चाहिए, इसके साथ ही अतिक्रमणकर्ता पर दो हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया, लेकिन आदेश के बावजूद न तो कब्जा हटाया गया और न ही प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई की।
उठ रहे कई सवाल
अगर यह भूमि शासकीय नहर की है तो अब तक अतिक्रमण क्यों नहीं हटाया गया?
हाई कोर्ट और राजस्व अधिकारियों के आदेश के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
और अगर निर्माण अवैध है तो फिर एनओसी कैसे जारी की गई?
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur