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खड़गवां@मौत को दावत देती नहर! अंजनी जलाशय की लाइनिंग बनी ‘खुला खतरा’

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-संवाददाता-
खड़गवां,19 मार्च 2026 (घटती-घटना)। अंजनी जलाशय से निकली नहर, जो किसानों की सिंचाई और विकास की रीढ़ बननी थी, आज लापरवाही,घटिया निर्माण और प्रशासनिक उदासीनता का जिंदा उदाहरण बन चुकी है,जिस नहर से हरियाली और समृद्धि की उम्मीद थी,वही अब मौत का रास्ता बनती नजर आ रही है, हालात इतने खतरनाक हैं कि ग्रामीण खुलेआम कह रहे हैं— ‘यह नहर नहीं,हादसे का इंतजार है। ‘
घटिया निर्माण का नमूनाः
लाइनिंग में खुली पोल-

नहर की लाइनिंग में भारी अनियमितताएं सामने आई हैं,कई जगह निर्माण अधूरा छोड़ दिया गया है, दीवारों में दरारें और कमजोर संरचना साफ दिख रही है,ढलान इतनी खतरनाक है कि संतुलन बिगड़ते ही सीधा मौत के मुंह में गिरने का खतरा,यह साफ दर्शाता है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता मानकों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है,सवाल उठता है—क्या सिर्फ कागजों में ही काम पूरा दिखाया गया?
30 फीट गहराईः एक चूक,सीधी मौत
स्थानीय लोगों के मुताबिक नहर की गहराई लगभग 30 फीट तक है,किनारों पर कोई सुरक्षा दीवार नहीं,न रेलिंग,न बैरिकेडिंग, ऐसी स्थिति में अगर कोई गिरता है, तो बचने की उम्मीद लगभग खत्म हो जाती है,यह नहर अब ग्रामीणों और मवेशियों के लिए ‘खुला मौत का कुआं’ बन चुकी है।
न चेतावनी, न सुरक्षाः क्या हादसे का इंतजार?- सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कहीं भी चेतावनी बोर्ड नहीं लगाए गए,न कोई सुरक्षा संकेत,न रोशनी की व्यवस्था,रात के समय पूरा इलाका अंधेरे में डूबा रहता है, यह लापरवाही नहीं,बल्कि सीधा-सीधा लोगों की जान से खिलवाड़ है।
हर दिन डर के साए में जी रहे ग्रामीण- नहर के आसपास रहने वाले ग्रामीण लगातार भय में जी रहे हैं, बच्चों को नहर से दूर रखना चुनौती बन गया है,बुजुर्गों के लिए रास्ता पार करना जोखिम भरा,मवेशियों के गिरने की घटनाएं कभी भी हो सकती हैं, बरसात में यह खतरा कई गुना बढ़ जाता है, जब फिसलन जानलेवा रूप ले लेती है।
प्रशासन और ठेकेदार पर गंभीर सवाल
-क्या निर्माण में भ्रष्टाचार हुआ?
-क्या बिना जांच के भुगतान कर दिया गया?
-क्या जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ फाइलों तक सीमित हैं?
-अगर हादसा हुआ,तो जवाबदेही तय कौन करेगा?
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा,उठी सख्त मांग…
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से कड़े शब्दों में मांग की है,नहर के किनारों पर तत्काल मजबूत बैरिकेडिंग की जाए, चेतावनी बोर्ड और लाइटिंग की व्यवस्था हो, घटिया निर्माण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए,दोषी अधिकारियों और ठेकेदार पर सख्त कार्रवाई हो।
हादसे से पहले जागे सिस्टम
अंजनी जलाशय की यह नहर अब ‘टाइम बम’ बन चुकी है, हर दिन,हर पल यहां एक बड़ी दुर्घटना का खतरा मंडरा रहा है, अगर प्रशासन अब भी नहीं जागा,तो यह केवल एक हादसा नहीं होगा,बल्कि यह सरकारी लापरवाही की ऐसी कहानी बनेगी,जिसे नजरअंदाज करना संभव नहीं होगा।


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