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खड़गवां@प्रधानमंत्री आवास योजना में अनियमितताओं के आरोप अधूरे मकानों पर पूरी राशि आहरण का मामला

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पक्के मकानों की छत पर बन रहे पीएम आवास जियो-टैगिंग और भुगतान प्रक्रिया पर उठे सवाल
राजेन्द्र शर्मा-
खड़गवां,08 मार्च 2026 (घटती-घटना)। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जिले के खड़गवां विकासखंड में बन रहे आवासों को लेकर गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं,ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर योजना के नियमों को दरकिनार कर आवास स्वीकृत किए जा रहे हैं और अधूरे निर्माण के बावजूद पूरी राशि आहरित कर ली गई है, सूत्रों के अनुसार खड़गवां मुख्यालय में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां पहले से पक्का मकान होने के बावजूद हितग्राहियों को प्रधानमंत्री आवास योजना की स्वीकृति दे दी गई। इतना ही नहीं, कई लाभार्थी अपने पुराने पक्के मकानों की छत के ऊपर ही प्रधानमंत्री आवास का निर्माण करा रहे हैं, जिससे योजना के नियमों और पात्रता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पक्के मकान होने के बाद भी मिली स्वीकृति- ग्रामीणों का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ उन परिवारों को मिलना चाहिए जिनके पास रहने के लिए पक्का मकान नहीं है। लेकिन खड़गवां में ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं, जहां पहले से पक्के मकान होने के बावजूद दोबारा आवास स्वीकृत कर दिया गया, कुछ मामलों में हितग्राही के पास जमीन की कमी होने के कारण पुराने मकान की छत पर ही नए आवास का निर्माण कराया जा रहा है। अब सवाल यह उठता है कि ऐसे निर्माण कार्य योजना के नियमों के अनुरूप हैं या नहीं।
अधूरे मकानों पर भुगतान का आरोप- ग्रामीणों के मुताबिक कई स्थानों पर आवास निर्माण अधूरा पड़ा है, लेकिन संबंधित लाभार्थियों के नाम पर अधिकांश या पूरी राशि निकाल ली गई है, जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत राशि किस्तों में दी जाती है,जो निर्माण की प्रगति के आधार पर जारी होती है। लेकिन आरोप है कि कुछ मामलों में जियो-टैगिंग और निरीक्षण की प्रक्रिया में लापरवाही बरतते हुए अधूरे मकानों को ही पूर्ण दिखाकर भुगतान कर दिया गया, ग्रामीणों का कहना है कि कई मकानों की दीवारें अधूरी हैं, छत नहीं डली है या प्लास्टर का काम बाकी है,इसके बावजूद पोर्टल में आवास को पूर्ण दर्शाया गया है।
कमीशन मांगने के आरोप भी लगे- कुछ हितग्राहियों ने यह भी आरोप लगाया है कि योजना की राशि जारी करने के लिए उनसे कमीशन की मांग की गई, उनका कहना है कि जब तक निर्धारित राशि नहीं दी गई, तब तक भुगतान की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई गई, हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है,लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यदि इन मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई अनियमितताएं सामने आ सकती हैं।
जांच की उठी मांग-स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है, उनका कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह गरीब और जरूरतमंद लोगों के अधिकारों के साथ गंभीर अन्याय है, उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि सभी आवासों का भौतिक सत्यापन कराया जाए और जिन मामलों में अनियमितता पाई जाए,वहां जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
अधिकारियों ने कही जांच की बात- इस संबंध में संबंधित अधिकारियों का कहना है कि यदि कहीं भी गड़बड़ी पाई जाती है तो जिम्मेदार कर्मचारियों और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, उन्होंने यह भी बताया कि शिकायतों के आधार पर आवासों का पुनः भौतिक सत्यापन कराया जाएगा ताकि योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
योजना की पारदर्शिता पर सवाल- प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराना है, लेकिन यदि अधूरे भवनों पर भुगतान और पात्रता से बाहर लोगों को आवास स्वीकृति के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह योजना की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है,अब देखना यह होगा कि प्रशासन इन शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या वास्तव में जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाती है या नहीं।


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