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अम्बिकापुर@जिले में महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल….

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स्व-सहायता समूहों से सैकड़ों महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर


-संवाददाता-
अम्बिकापुर,07 मार्च 2026 (घटती-घटना)। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर सरगुजा जिले की महिलाओं ने यह साबित कर दिया है कि वे अब केवल चूल्हे-चौके तक सीमित नहीं हैं,बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मुख्य धुरी बन चुकी हैं। जिले में ’बिहान’ और ’प्रधानमंत्री आवास योजना’ के संगम ने एक ऐसी आर्थिक क्रांति को जन्म दिया है, जिसने ग्रामीण महिलाओं को निर्माण क्षेत्र का बड़ा उद्यमी बना दिया है।
निर्माण क्षेत्र में महिलाओं का दबदबा : सरगुजा जिले में महिला सशक्तिकरण का एक अनूठा मॉडल उभर कर सामने आया है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बन रहे मकानों ने महिलाओं के लिए व्यवसाय के नए द्वार खोले हैं। जिले की 650 से अधिक महिलाएं आज 1000 से ज्यादा सेंट्रिंग प्लेट सेटों का सफल व्यवसाय कर रही हैं। इतना ही नहीं, निर्माण की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए 271 महिलाएं ईंट निर्माण और 24 महिलाएं सीमेंट-छड़ के व्यवसाय में अपनी धाक जमा चुकी हैं।
संघर्ष से स्वावलंबन की बनीं प्रेरणा : लुण्ड्रा विकासखंड के ग्राम पडोली की देवराजो दीदी आज सरगुजा की नारी शक्ति का चेहरा बन चुकी हैं। 2016 में एक साधारण गृहणी के रूप में ससुराल आईं देवराजो ने आर्थिक तंगी को मात देने के लिए ’एकता स्व-सहायता समूह’ का दामन थामा। किराना दुकान से शुरुआत करने वाली देवराजो ने समय की मांग को पहचाना और प्रधानमंत्री आवास योजना के बढ़ते कार्यों को देखते हुए सेंट्रिंग प्लेट रेंटल का काम शुरू किया। आज देवराजो घर बैठे सालाना 2.50 लाख रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। वे कहती हैं, सरकार की योजनाओं ने हमें न केवल पैसा दिया, बल्कि समाज में सिर उठाकर जीने का हौसला भी दिया है।
जिले में महिलाएं बन रही हैं ’लखपति दीदी’ : जिला प्रशासन के प्रयासों और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में जिले में अब तक 319 महिलाएं ‘लखपति दीदी’ की श्रेणी में शामिल होकर आर्थिक सशक्तिकरण की मिसाल बन चुकी हैं। ये वे महिलाएं हैं जिन्होंने विभिन्न स्वरोजगार गतिविधियों के माध्यम से अपनी वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक तक पहुंचाई है। स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं निर्माण एवं आजीविका आधारित व्यवसायों में भी सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। जिले में 650 से अधिक महिलाएं सेंट्रिंग प्लेट व्यवसाय से जुड़कर निर्माण कार्यों में उपयोग होने वाली सामग्री उपलब्ध करा रही हैं, जिससे उन्हें नियमित आय प्राप्त हो रही है।
इसके अलावा 271 महिलाएं ईंट निर्माण व्यवसाय में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। यह कार्य ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए रोजगार का महत्वपूर्ण साधन बन गया है और इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं।
इसी प्रकार 12 महिलाओं द्वारा मिक्सर मशीन व्यवसाय का सफल संचालन किया जा रहा है, जिससे निर्माण कार्यों में उपयोग होने वाली सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं और महिलाओं को निरंतर आय का स्रोत मिल रहा है। विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से सरगुजा जिले की महिलाएं न केवल आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि समाज में महिला सशक्तिकरण का सशक्त उदाहरण भी प्रस्तुत कर रही हैं। शासन की योजनाओं और स्व-सहायता समूहों के सहयोग से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।
नारी शक्ति को नमन
कलेक्टर श्री अजीत वसंत ने महिला दिवस पर जिले की सभी कर्मठ महिलाओं को बधाई देते हुए कहा कि सरगुजा की महिलाएं आज बदलाव और विकास की नई कहानी लिख रही हैं। सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन और महिलाओं की अटूट इच्छाशक्ति ने सरगुजा को महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में प्रदेश के अग्रणी जिलों में खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि जब एक महिला सशक्त होती है, तो पूरा परिवार और आने वाली पीढि़यां सशक्त होती हैं। सरगुजा की ’लखपति दीदियां’ आज विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार कर रही हैं।


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