(घटती-घटना होली विशेष व्यंग्य)।
होली का मौसम है…रंग उड़ रहे हैं…और प्रशासनिक गलियारों में एक नई चर्चा गुलाल की तरह फैल रही है-जो मद का सही उपयोग करे,वही सत्ता के करीब पहुंचे! कहा जा रहा है कि जिला पंचायत कोरिया के सीईओ डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी की कार्यशैली अब बड़े मंच तक पहुँचने वाली है,चर्चा यह भी है कि उन्हें गृहमंत्री का ओएसडी बनाए जाने की तैयारी है।
डीएमएफ : रंगों की खुली बाल्टी?
जिले में फुसफुसाहट है की डीएमएफ मद का खुलकर उपयोग हुआ है, अब खुलकर उपयोग का अर्थ अलग-अलग लोग अलग-अलग लगा रहे हैं,कोई कहता है की तेज काम,तेज खर्च,तेज परिणाम! कोई मुस्कुराकर कहता है जहाँ मद हो,वहाँ गति होनी चाहिए,होली में भी अगर रंग बचा रह जाए तो मज़ा नहीं आता,प्रशासन में भी अगर मद पड़ा रह जाए तो रिपोर्ट फीकी लगती है।
कार्यकुशलता का प्रमोशन
राज्य शासन का सूत्र जो बजट को बहता पानी बना दे,वही असली खिलाड़ी,अगर यह चर्चा सही हुई तो संदेश साफ है की उपलब्ध संसाधनों का पूरा उपयोग करो, तभी अगली कुर्सी करीब आएगी,होली का नियम है की रंग खत्म मत होने दो,प्रशासन का नियम है की मद शेष मत रहने दो।
गृह विभाग की नई उम्मीद?
अगर सच में ओएसडी की भूमिका मिली, तो कहा जा रहा है कि उनकी यही कार्यकुशलता अब गृह विभाग में भी काम आएगी,लोग व्यंग्य में कह रहे हैं-जहाँ फाइल रुकी,वहाँ रंग डालो।
जनता का सवाल,जनता पूछ रही है…
क्या पदोन्नति का पैमाना खर्च की रफ्तार है?
या परिणाम की गुणवत्ता?
क्या बड़े पद के लिए बड़ा उपयोग जरूरी है?
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