(घटती-घटना होली विशेष व्यंग्य)।
होली का रंग अभी सूखा भी नहीं था कि कोरिया की प्रशासनिक पिच पर एक विकेट गिर गया,कोरिया उत्सव के तुरंत बाद जनपद बैकुंठपुर के सीईओ का पद से हटाया जाना ऐसा लगा मानो रंग खेलते-खेलते अचानक सीटी बज गई हो-आउट! जिला प्रशासन ने इसे तात्कालिक प्रशासनिक निर्णय बताया, पर गलियारों में चर्चा कुछ और ही रंग ले रही है।
विकेट लेने का आत्मविश्वास
चर्चा यह भी है कि एसडीएम बैकुंठपुर का आत्मविश्वास इन दिनों होली के गुलाल से भी ज्यादा गाढ़ा है, लोग कह रहे हैं कि उन्होंने मजाक-मजाक में कहा-अभी और विकेट गिरेंगे…देखते जाओ! अब यह क्रिकेट है या प्रशासन? यह समझना थोड़ा मुश्किल है,होली में जैसे कोई एक-एक कर रंग लगाता जाता है,वैसे ही प्रशासनिक पिच पर एक-एक कर फैसले हो रहे हैं।
खुद को बचाओ, दूसरे को हटाओ?
जनता के बीच सवाल उठ रहे हैं-क्या यह नियमित प्रक्रिया थी? या जिम्मेदारी का रंग किसी और पर डाल दिया गया? क्या नया चेहरा सिस्टम एडजस्टमेंट का हिस्सा बना? होली में अक्सर लोग अपने कपड़े बचाने के लिए दूसरों पर ज्यादा रंग डाल देते हैं,राजनीति और प्रशासन में भी यह फार्मूला नया नहीं है।
ऊपर तक पहुँच की चर्चा
गलियारों में यह भी कहा जा रहा है कि ऊपर तक बात है…सब समझ लो। जब प्रशासनिक फैसलों के साथ ताकत का रंग मिल जाए,तो अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है कि कौन सच में आउट हुआ और किसने गेंद फेंकी।
आगे और विकेट?
अगर वाकई विकेट पर विकेट की रणनीति चल रही है,तो आने वाले दिनों में और नाम चर्चा में आ सकते हैं,लेकिन जनता का असली सवाल अलग है-इन सबके बीच विकास का स्कोर कितना है? क्योंकि प्रशासन की होली में अगर सिर्फ विकेट गिरते रहें और रन न बनें तो मैच जीतना मुश्किल होता है।
अंतिम कटाक्ष
होली सिखाती है रंग मिलाओ,रिश्ते निभाओ,प्रशासन सिखाता है फाइल मिलाओ,आदेश निभाओ,अब देखना यह है की यह सिर्फ एक तात्कालिक फैसला था या सच में कोई विकेट अभियान चल रहा है,क्योंकि रंग उतर जाते हैं…पर फैसलों की छाप देर तक रहती है।
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