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- .स्वास्थ्य मंत्री का आश्वासन…मितानिन समन्वयकों को मिलेगा बकाया भुगतान
- 5 माह बाद पसीने की कमाई,मितानिनों के खातों में बरसेगा मानदेय
- आर्थिक आईसीयू से राहत,शासन ने जारी किया लंबित भुगतान
- मितानिनों की पुकार सुनी गई,मानदेय पर सरकार का फैसला
- लंबित मानदेय पर शासन सक्रिय,जल्द खातों में पहुंचेगी राशि
- पांच माह का इंतजार खत्म,मितानिनों को राहत की उम्मीद
- सूखे खातों में फिर मुस्कान : मितानिनों को मिला भुगतान का भरोसा
- घर-घर स्वास्थ्य पहुंचाने वाली महिलाओं को अब आर्थिक संबल
- संघर्ष रंग लायाः मितानिनों के मानदेय पर सकारात्मक कदम
-राजन पाण्डेय-
बैकुंठपुर,03 मार्च 2026 (घटती-घटना)। पांच माह से मानदेय के इंतजार में आर्थिक संकट झेल रहीं मितानिनों और स्वास्थ्य पंचायत समन्वयकों के लिए राहत की खबर आई है,लगातार उठाए गए मुद्दे और प्रेस वार्ता में सीधे सवालों के बाद शासन ने लंबित भुगतान जारी करने का आश्वासन दिया है, स्वास्थ्य मंत्री के स्पष्ट बयान के बाद अब संबंधित समन्वयकों के बैंक खातों में राशि हस्तांतरित होने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। पांच माह के लंबे इंतजार के बाद मानदेय जारी होने की खबर से कोरिया जिले में खुशी की लहर है। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि जब मुद्दों को तथ्यपरक ढंग से उठाया जाता है और जिम्मेदार मंच पर सवाल रखे जाते हैं, तो समाधान की राह निकलती है,अब मितानिन समन्वयकों के ‘सूखे’ बैंक खातों में राहत की राशि पहुंचने की उम्मीद है—और इसके साथ ही ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को भी नई ऊर्जा मिलने की संभावना है।
संगठन और समाज की सक्रियता, मुद्दे को लेकर स्वास्थ्य पंचायत मितानिन संगठन और सामाजिक संगठनों ने भी आवाज उठाई-
प्रदेश अध्यक्ष सरोज सिंह सेंगर ने कहा— ‘हम लंबे समय से मानदेय जारी करने की मांग कर रहे थे। अब सरकार के निर्णय से हमारे परिवारों को राहत मिलेगी। ‘
प्रेस वार्ता में उठा मुद्दा,मिला स्पष्ट जवाब…
3 मार्च को कोरिया प्रवास के दौरान आयोजित प्रेस वार्ता में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से मितानिन समन्वयकों के लंबित मानदेय को लेकर सवाल पूछा गया, मंत्री ने जवाब देते हुए कहा की मितानिन समन्वयकों की समस्याओं से सरकार अवगत है, तकनीकी और बजटीय प्रक्रियाओं के कारण भुगतान में देरी हुई है,सरकार ने तत्काल कदम उठाए हैं और सभी लंबित मानदेय की राशि शीघ्र खातों में ट्रांसफर कर दी जाएगी,यह बयान उन हजारों महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के लिए उम्मीद की किरण बना, जो पिछले पांच महीनों से बिना मानदेय के कार्य कर रही थीं।
‘आर्थिक सूखे’ से जूझता परिवार
मितानिन और स्वास्थ्य पंचायत समन्वयक ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। वे टीकाकरण,मातृ-शिशु स्वास्थ्य,पोषण अभियान और जनजागरूकता कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाती हैं,पांच माह तक मानदेय न मिलने से कई परिवारों की आर्थिक स्थिति डगमगा गई, बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई,कुछ परिवारों को ब्याज पर उधार लेने की स्थिति बनी,इस स्थिति को‘आर्थिक आईसीयू’ की संज्ञा दी जा रही थी,क्योंकि आय का स्रोत रुकने से जीवनयापन कठिन हो गया था।
कोरिया जन सहयोग समिति के अध्यक्ष पुष्पेंद्र राजवाड़े ने कहा…
‘यह हजारों मितानिनों की मेहनत और संघर्ष की जीत है,हम मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और स्वास्थ्य मंत्री का आभार व्यक्त करते हैं कि उन्होंने समस्या को समझा और त्वरित निर्णय लिया। ‘समिति के कार्यकारी अध्यक्ष अधिवक्ता जयचंद सोनपाकर ने इसे लोकतांत्रिक संवाद और जनसरोकार की जीत बताया।
पारदर्शिता का भरोसा
स्वास्थ्य मंत्री ने आश्वस्त किया कि भविष्य में केंद्रांश और राज्यांश की राशि के वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी, ताकि ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो,प्रशासनिक स्तर पर तकनीकी और बजटीय प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने की बात भी कही गई है।
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