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रायपुर@डीएमएफ फंड घोटाले में अनिल टुटेजा गिरफ्तार

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डिजिटल साक्ष्य और दस्तावेजों के आधार पर कार्रवाई, कोर्ट ने 26 फरवरी तक पुलिस रिमांड पर भेजा

रायपुर,23 फरवरी 2026। छत्तीसगढ़ डीएमएफ (जिला खनिज न्यास) घोटाला मामले में आरोपी पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा को ईओडब्ल्यू ने गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई ब्यूरो ने दर्ज अपराध की विस्तृत जांच के बाद की है। जांच के दौरान मिले डिजिटल सबूत, दस्तावेज और गवाहों के बयानों से यह सामने आया है कि आरोपी ने डीएमएफ फंड से जुड़े काम अपने परिचित लोगों और फर्मों को कमीशन लेकर दिलवाए। आरोप है कि उसने अपने रिश्तेदारों और करीबी लोगों के जरिए भी अलग-अलग फर्मों को कमीशन लेकर डीएमएफ के काम आवंटित करवाए। जांच में मिले साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ सरकारी धन के दुरुपयोग, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार से जुड़े अपराध प्रथम दृष्टया पाए गए हैं। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को विधि अनुसार कोर्ट में पेश किया गया। जहां से 26 फरवरी 2026 तक की पुलिस रिमांड की अनुमति दी गई है। मामले की जांच जारी है। प्रवर्तन निदेशालय की रिपोर्ट के आधार पर ईओडब्ल्यू ने धारा 120 बी 420 के तहत केस दर्ज किया है। केस में यह तथ्य निकल कर सामने आए हैं कि डिस्टि्रक्ट माइनिंग फंड कोरबा के फंड से अलग-अलग टेंडर आवंटन में बड़े पैमाने पर आर्थिक अनियमितता पाई गई। टेंडर भरने वालों को अवैध लाभ पहुंचाया गया। ईडी की जांच ने डीएमएफ घोटाले के तौर-तरीकों का खुलासा किया है। इसमें यह बात सामने आई है कि ठेकेदारों के बैंक खाते में जमा की गई राशि का बड़ा हिस्सा ठेकेदारों ने सीधे कैश में निकाल लिया है। जांच के दौरान ईडी ने ठेकेदारों,सरकारी और उनके सहयोगियों के अगल-अगल ठिकानों पर रेड मारी थी। कोरबा में हुए 575 करोड़ रुपए से ज्यादा के डिस्टि्रक मिनरल फंड (डीएमएफ) घोटाला मामले में महत्वपूर्ण खुलासे हुए हैं। घूस लेने के लिए खर्च के नियम बदले गए। कलेक्टर को 40′, सीईओ 5′, एसडीओ 3′ और सब इंजीनियर को 2′ कमीशन मिला।
करप्शन के लिए फंड खर्च के नियमों को बदला गया…
डीएमएफ के वर्क प्रोजेक्ट में करप्शन के लिए फंड खर्च के नियमों को बदला गया था। फंड खर्च के नए प्रावधानों में मटेरियल सप्लाई, ट्रेनिंग, कृषि उपकरण, खेल सामग्री और मेडिकल उपकरणों की कैटेगरी को जोड़ा गया था, ताकि संशोधित नियमों के सहारे डीएमएफ के तहत जरूरी डेवलपमेंट वर्क को दरकिनार कर अधिकतम कमीशन वाले प्रोजेक्ट को अप्रूव किया जा सके। इसकी पुष्टि रायपुर कोर्ट में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की ओर से पेश किए गए 6 हजार पेज के चालान से हुई।


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