

सूरजपुर,18 फरवरी 2026(घटती-घटना)। जिले के लटोरी क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत सुंदरगंज के बथान पारा में अतिक्रमण हटाने पहुंची प्रशासनिक टीम पर हुए हमले ने पूरे इलाके को तनावपूर्ण बना दिया है, राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम जब अवैध कब्जों को हटाने की कार्रवाई कर रही थी, उसी दौरान उग्र भीड़ ने अचानक पथराव शुरू कर दिया। घटना में कई सरकारी वाहनों के शीशे टूट गए, एक जेसीबी मशीन को भी नुकसान पहुंचा,और मौके पर अफरा-तफरी की स्थिति बन गई।
फिलहाल स्थिति-
मौके पर पुलिस बल तैनात है और प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है,क्षेत्र में शांति बनाए रखने की अपील की गई है, अफवाहों पर ध्यान न देने और कानून हाथ में न लेने की चेतावनी भी दी गई है, हालात नियंत्रण में बताए जा रहे हैं,लेकिन तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
कानून-व्यवस्था पर बड़ा सवाल
सुंदरगंज की यह घटना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है,अतिक्रमण हटाने जैसी कार्रवाइयों में पूर्व संवाद,पर्याप्त सुरक्षा और संवेदनशीलता जरूरी मानी जाती है,यदि स्थानीय स्तर पर सहमति और विश्वास कायम नहीं किया गया,तो ऐसे टकराव की आशंका बनी रहती है,यह भी जांच का विषय है कि क्या कार्रवाई से पहले पर्याप्त सूचना और समझाइश दी गई थी? क्या सुरक्षा बल पर्याप्त संख्या में मौजूद थे? क्या स्थिति का आकलन सही ढंग से किया गया था?
आगे की संभावित कार्रवाई
पथराव और तोड़फोड़ में शामिल आरोपियों की पहचान, शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों पर एफआईआर,अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया का पुनर्मूल्यांकन,दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित करने की पहल,सुंदरगंज की घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि विकास और वैधानिक कार्रवाई तभी सफल हो सकती है,जब प्रशासनिक सख्ती के साथ सामाजिक संवाद भी समानांतर रूप से चले,फिलहाल पूरा इलाका प्रशासन की निगरानी में है और स्थिति संवेदनशील बनी हुई है।
कार्रवाई की पृष्ठभूमि
प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रशासन को लंबे समय से बथान पारा क्षेत्र में शासकीय भूमि पर अतिक्रमण की शिकायतें मिल रही थीं,जांच के बाद राजस्व विभाग ने नोटिस जारी कर अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू की, तय कार्यक्रम के अनुसार राजस्व अधिकारी, पुलिस बल और मशीनरी के साथ संयुक्त टीम मौके पर पहुंची,जैसे ही बुलडोजर से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू हुई,विरोध कर रहे लोग एकजुट हो गए। शुरुआत में नारेबाजी और मौखिक विरोध हुआ, लेकिन स्थिति कुछ ही मिनटों में उग्र हो गई।
अचानक भड़की हिंसा
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कार्रवाई के दौरान भीड़ ने प्रशासनिक टीम को घेर लिया और पथराव शुरू कर दिया। कुछ लोगों ने जेसीबी और अधिकारियों की गाडि़यों को निशाना बनाया, पत्थरबाजी में कई वाहनों के शीशे टूट गए और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा, स्थिति इतनी बिगड़ गई कि पुलिस को हल्का बल प्रयोग कर भीड़ को पीछे हटाना पड़ा। कुछ समय के लिए कार्रवाई रोकनी पड़ी।
गांव में दो गुट आमने-सामने
घटना ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब अतिक्रमण हटाने के समर्थन में खड़े ग्रामीणों और विरोध कर रहे लोगों के बीच भी झड़प हो गई। दोनों पक्षों के बीच लाठी-डंडे चलने की सूचना है,इससे गांव में दहशत और तनाव का माहौल बन गया, बताया जा रहा है कि कुछ लोग मामूली रूप से घायल भी हुए हैं, हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी प्रतीक्षित है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
घटना की सूचना मिलते ही अतिरिक्त पुलिस बल मौके पर भेजा गया, राजस्व एवं पुलिस अधिकारी स्थिति को नियंत्रित करने में जुटे रहे, क्षेत्र को संवेदनशील घोषित कर निगरानी बढ़ा दी गई है, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाना वैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा है और कानून-व्यवस्था से समझौता नहीं किया जाएगा, साथ ही, उपद्रव में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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